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चुनावी हार से सोशल मीडिया के निशाने पर आए अयोध्या के लोग, कहा- राम के नहीं हुए

रामनगरी अयोध्या में भाजपा को मिली शिकस्त को सनातन धर्म में विश्वास रखने वाली देश की जनता स्वीकार नहीं कर पा रही है। सोशल मीडिया पर अयोध्या की हार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है।

चुनावी हार से सोशल मीडिया के निशाने पर आए अयोध्या के लोग, कहा- राम के नहीं हुए
ayodhya ram mandir
Srishti Kunjस्वरमिल चंद्रा,अयोध्याThu, 06 Jun 2024 09:37 AM
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रामनगरी अयोध्या में भाजपा को मिली करारी शिकस्त को सनातन धर्म में विश्वास रखने वाली देश की जनता स्वीकार नहीं कर पा रही है। मंगलवार देर शाम से ही सोशल मीडिया पर अयोध्या की हार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है और लोग अयोध्यावासियों को जमकर कोस रहे हैं। हर प्लेटफार्म पर लोग अयोध्यावासियों को सीट हराने के लिए लानत, मलानत भेज रहे हैं। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम व व्हाट्सअप पर यूजर इस करारी हार के लिए जिम्मेदार फैजाबाद संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं पर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। अयोध्यावासियों को उनके नातेदार, रिश्तेदार, मित्र फोन करके असहज कर रहे हैं। 

‘शर्म करो, धिक्कार है’ की मिल रही टिप्पणी
सबसे ज्यादा वायरल रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण का एक संवाद वायरल हो रहा है जिसमें राम की भूमिका में अरुण गोविल सीताजी को समझा रहे हैं कि ‘जनता को तुम नहीं जानती हो, जनता से बड़ा स्वार्थी व निर्दयी कोई भी नहीं होता, अपने स्वार्थ के लिए वो राजा से उसकी रक्त की अंतिम बूंद तक मांग लेती है, लेकिन जब राजा के लिए उसे कुछ त्यागना पड़े तो वह क्षण भर में मुंह फेर लेती है।’ इसके साथ ही शर्म करो, तुम पर धिक्कार है का ‘टैग’ लगाकर लोग वायरल कर रहे हैं। कहा, इतिहास गवाह है कि अयोध्यावासियों ने हमेशा ही सच्चे राजा के साथ विश्वासघात ही किया है, धिक्कार है। 

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लगता है रामराज नहीं रावणराज चाहिए
फेसबुक पर तरह तरह के कमेंट की भरमार है उसमें प्रमुख रूप से ‘अयोध्या में इतने विकास के बाद भी बीजेपी की सीट नहीं निकली, लगता है अयोध्या को रामराज नहीं रावणराज चाहिए’। ‘आज सभी को पता चल गया कि राममंदिर 500 वर्षो तक क्यूं नहीं बन पाया’। ‘हम भूल गए कि यह वही अयोध्यावासी हैं जिन्होंने वनवास से आने के बाद सीता माता पर ही संदेह किया था’। ‘अयोध्या वाले जब त्रेता युग में राम के नहीं हुए तो कलयुग में कैसे हो जाते’। एक अन्य पोस्ट में कहा गया कि ‘रामायण का अंतिम ज्ञान ये है कि राजाराम ने कितना भी कष्ट सहकर प्रजा को संतुष्ट करना चाहा लेकिन प्रजा कभी संतुष्ट नहीं हुई, वही हाल आज भी है’। इस तरह की पंक्तियों वाले स्टेटस इस वक्त भरे पड़े हैं।
 
सोनू निगम की एक पोस्ट भी वायरल 
इस बीच सोनू निगम नाम के एक शख्स का भी एक्स पर एक पोस्ट भी खूब वायरल हो रहा है। इसमें लिखा गया है कि ‘जिस सरकार ने पूरे अयोध्या को चमका दिया एक पूरी टेंपल इकोनामी दे दिया उसी पार्टी को जीत के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है , शर्मनाक है अयोध्यावासियों’। हालांकि यह पोस्ट प्लेबैक सिंगर सोनू निगम का नहीं है। 

श्री हनुमत निवास अयोध्या, आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण, महंत ने कहा कि अयोध्या के परिणाम को लेकर सद्भाव से ही सही कई आतुर टिप्पणियां आ रही हैं। हमें यह सब सही नहीं लगता, लोकतान्त्रिक व्यवस्था में परिणाम अनिश्चित होते ही हैं। जो अयोध्या श्रीराम के वनगमन से नहीं हारी, वह लोकसभा की हार से भी नहीं हारेगी। अयोध्या आपके ज्ञात इतिहास-भूगोल से कहीं विराट है। यह वैकुंठ है। पर हां, इतना अवश्य है कि अयोध्या के उत्थान के महान उपक्रम में अयोध्यावासियों के सामने जो व्यावहारिक चुनौतियां उभरी हैं, उनको अनसुना किया जाना एक चिन्तनीय बिन्दु है। अयोध्या संतों-महापुरुषों का केंद्र है, इसकी स्तब्धता के अर्थ बहुत गहरे हैं। इसके मौन को भी सुना जाना चाहिए। पुनश्च, राष्ट्र के समग्र उत्थान की यात्रा का पथ आसान नहीं है, अनेक चुनौतियों को पार करते हुए ही बड़े संकल्पों की सिद्धि होती है।