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Hindi News उत्तर प्रदेशरुचि वीरा ने चौतरफा विरोध के बीच 15 दिन में लिखी जीत की कहानी, सपा का समय पर बदलाव आया काम

रुचि वीरा ने चौतरफा विरोध के बीच 15 दिन में लिखी जीत की कहानी, सपा का समय पर बदलाव आया काम

सपा की रुचिवीरा ने चौतरफा विरोध के बीच 15 दिन में जीत की कहानी लिखी। पार्टी आलाकमान की ओर से समय पर संगठन में बदलाव करना जीत का मुख्य कारण माना जा रहा है। सपा ने एसटी हसन का टिकट नामांकन के बाद काटा।

रुचि वीरा ने चौतरफा विरोध के बीच 15 दिन में लिखी जीत की कहानी, सपा का समय पर बदलाव आया काम
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,मुरादाबादWed, 05 Jun 2024 11:33 AM
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चौतरफा विरोध के बाद भी आखिरकार सपा की रुचिवीरा ने इतिहास रच दिया। उन्होंने मात्र 15 दिनों के भीतर ही जीत की कहानी लिख दी। पार्टी आलाकमान की ओर से समय पर संगठन में बदलाव करना भी उनकी जीत का मुख्य कारण माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद से डॉ. एसटी हसन पर विश्वास जताते हुए उनका टिकट फाइनल किया था। यही नहीं उन्होंने जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष के साथ पहुंचकर अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया था। 

दूसरे दिन रुचिवीरा ने भी अपना नामांकन दाखिल किया था। इसके बाद डॉ. एसटी हसन का नामांकन निरस्त कर दिया गया था। इससे सपा दो धड़ों में बंट गई थी। टिकट कटने पर डॉ. एसटी हसन ने अपनी नाराजगी सार्वजनिक मंचों पर बयां की थी। यही नहीं उन्होंने रुचिवीरा का प्रचार भी करने से इनका कर दिया था। उन्होंने मुरादाबाद छोड़कर रामपुर, संभल, आजमगढ़ में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया था। पार्टी में गुटबाजी और मौजूदा सांसद का खुलेआम प्रचार न करने के बाद भी रुचि वीरा ने हार नहीं मानी। समर्थकों के साथ रणनीति बनाकर चुनाव प्रचार किया। यही नहीं उन्होंने मुरादाबाद से पहली महिला सांसद बनकर इतिहास भी रच डाला। 

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पार्टी आलाकमान ने लिए थे सख्त फैसले
मुरादाबाद। रुचिवीरा की जीत में पार्टी आलाकमान के सही समय पर लिए गए सही फैसले भी माने जा रहे हैं। एक समय पार्टी प्रत्याशी रुचिवीरा और निवर्तमान जिलाध्यक्ष डीपी यादव की राहें जुदा-जुदा हो गई थीं। मामले की जानकारी पार्टी आलाकमान तक पहुंची। इसके बाद तत्काल जिलाध्यक्ष डीपी यादव को हटाकर कमान जयवीर सिंह यादव को सौंपी गई थी। चुनाव में आलाकमान की ओर से जिलाध्यक्ष को हटाने का फैसला सही भी साबित हुआ।