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Hindi News उत्तर प्रदेशअखिलेश ने MY को PDA में बदल लिखी कामयाबी की दास्तां, सपा को बनाया देश की तीसरी बड़ी पार्टी

अखिलेश ने MY को PDA में बदल लिखी कामयाबी की दास्तां, सपा को बनाया देश की तीसरी बड़ी पार्टी

अखिलेश यादव ने मुस्लिम-यादव के एमवाई को पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक के पीडीए में बदलकर कामयाबी की दास्तां लिखी है। अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी को देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बना दिया है।

अखिलेश ने MY को PDA में बदल लिखी कामयाबी की दास्तां, सपा को बनाया देश की तीसरी बड़ी पार्टी
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,लखनऊWed, 05 Jun 2024 08:06 AM
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मुलायम सिंह यादव ने जिस एमवाई (मुस्लिम- यादव) फार्मूले को आजमा कर सियासत की ऊंचाइयों को नापा, अखिलेश यादव ने इसका विस्तार पीडीए के रूप में कर कामयाबी की नई दास्तां लिख दी है। पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए के जरिए इंडिया गठबंधन की इन वर्गों को खास तौर पर साधने की रणनीति कामयाब हो गई है। यह सपा का ऐसा ट्रंप कार्ड है, जिसके चलते विरोधियों के दांव उलटे पड़ गए।  अब सपा देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।
 
इंडिया गठबंधन की कमान अपने पास रख कर अखिलेश ने पहले यह संकेत दिया कि यूपी में विपक्षी सियासत में सबसे बड़े खिलाड़ी वहीं हैं और सपा ही गठबंधन की धुरी है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के अधिकांश टिकट तय करने में भी खासी भूमिका निभाई। सपा की तरह कांग्रेस ने भी ज्यादा मुस्लिमों को टिकट देने से परहेज किया। 

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अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 
यूपी की 80 सीटों में इंडिया गठबंधन का चालीस सीटों से ज्यादा सीटें लाना बड़ी जीत माना जा रहा है। सपा ने 38 सीट जीत कर भाजपा को 62 से 33 सीट पर ला दिया। सपा ने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में 2004 में 35 सीटें जीती थीं और अब अखिलेश के नेतृत्व में सपा इससे आगे बढ़ गई है। जब मुलायम ने यह कामयाबी हासिल की थी तो वह यूपी के मुख्यमंत्री थे। अखिलेश ने यह कामयाबी सत्ता से सात साल से दूर रहने के बावजूद हासिल की। सपा ने देश में किसी भी पार्टी से ज्यादा अपनी सीटों में इजाफा किया है। 

यह जतन किए 
अखिलेश यादव ने सामाजिक न्याय का रास्ता जातीय जनगणना से जाता है, यह उदघोष करते हुए पीडीए यात्रा निकाली। बूथ मैनेजमेंट पर खास जोर दिया। संगठन का पुनर्गठन किया और बीच चुनाव प्रदेश अध्यक्ष बदल दिया। 

सपा ने गैर यादव ओबीसी को दिया सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व 
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जातिगत जनगणना की मांग करते हुए गैर-यादव ओबीसी को काफी टिकट दिए। इस बार 62 सीटों में से यादव बिरादरी के केवल पांच व मुस्लिम वर्ग के चार उम्मीदवारों को टिकट दिया था। सपा ने 2019 में 10 व 2014 में 12 यादवों को टिकट दिया गया था। पहले सपा के साथ दलित वोट जुड़ने में हिचकता था। 

प्रतिकूल समीकरण को साधने के चलते इस बार सपा को दलित वोट साधने में सहूलियत रही। सपा ने इस बार 27 ओबीसी को टिकट दिए थे। इनमें  सर्वाधिक 10 टिकट कुर्मी व पटेल बिरादरी को दिए। इस कारण नरेश उत्तम, लालजी वर्मा, एसपी  सिंह पटेल, राम प्रसाद चौधरी सांसद हो गए। सपा ने इस बार 15 दलित को टिकट दिए।  मेरठ व अयोध्या सामान्य सीट पर भी दलित कार्ड चल दिया। इसमें फैजाबाद सीट  सपा जीतने में कामयाब रही।