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Hindi News उत्तर प्रदेशसाध्वी ने फोड़ा ‘भितरघात’ बम तो कई सीटें रडार पर, बुंदेलखंड से मध्य यूपी तक गद्दारी की चर्चा

साध्वी ने फोड़ा ‘भितरघात’ बम तो कई सीटें रडार पर, बुंदेलखंड से मध्य यूपी तक गद्दारी की चर्चा

साध्वी निरंजन ज्योती ने भितरघात बम फोड़ा तो कई सीटें रडार पर आ गईं। बुंदेलखंड से मध्य उप्र तक गद्दारी की चर्चा हो रही है। फतेहपुर में तो खुलकर शिकायत हुई है। अपनों के खेल और धोखे की चर्चा चली।

साध्वी ने फोड़ा ‘भितरघात’ बम तो कई सीटें रडार पर, बुंदेलखंड से मध्य यूपी तक गद्दारी की चर्चा
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,कानपुरThu, 06 Jun 2024 01:03 PM
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फतेहपुर की पूर्व सांसद और मंत्री रहीं साध्वी निरंजन ज्योति ने ‘भितरघात’ का बम फोड़ा तो कई और सीटों पर भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। बुंदेलखंड-कानपुर क्षेत्र की सभी 13 लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा था। इनमें से छह सीटें सपा ने छीन ली हैं। लगभग सभी छीनी गई सीटों पर भाजपा में अपनों के धोखा देने की बातें कही जा रही हैं। साध्वी निरंजन ज्योति ने पार्टी के चार लोगों के नाम लिख कर केन्द्रीय संगठन को दिए हैं। उन्होंने कहा कि मेरी हार भितरघात से हुई। इसमें लिप्त रहे लोगों पर कार्रवाई कराऊंगी।

दरअसल भाजपा में हर सीट पर टिकट के कई ऐसे दावेदार थे, जिन्होंने हर सूरत में टिकट हासिल करने के जतन किए। असफल रहने पर वे चुनाव में शिथिल रहे। कहा जा रहा है कि इनमें से कुछ ने खेल किया और गठबंधन की मदद कर दी। हालांकि साध्वी को छोड़ कर किसी भाजपा प्रत्याशी ने अभी तक खुल कर यह कहा नहीं है। ऑफ द रिकार्ड बातचीत में कई प्रत्याशियों ने पार्टी के कुछ लोगों की ओर इशारा किया।

हाईकमान तक पहुंची थी शिकायत
सूत्रों के मुताबिक फतेहपुर में भितरघात की शिकायत साध्वी ने चुनाव से पहले ही हाईकमान तक पहुंचाई थी। उन्होंने दो पूर्व विधायक, एक पूर्व अध्यक्ष और एक अन्य पर आरोप लगाए। इस पर बड़े नेताओं ने हस्तक्षेप भी किया लेकिन बात नहीं बनी। खेल करने वालों में एक टिकट के दावेदार भी थे। साध्वी 33 हजार वोटों से चुनाव हार गई हैं।

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बांदा में खेल की खुलेआम चर्चा
बांदा में भाजपा की सीट भी ऐसी वजहों से ही छिनी बताई जा रही है। चर्चा है कि यहां पार्टी के दो प्रभावशाली नेताओं ने अपने प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने की जगह बसपा की मदद की। यही वजह रही कि बांदा में बसपा को 2.45 लाख से ज्यादा वोट मिल गए। इसके पीछे टिकट की दावेदारी, जातीय राजनीति और पिछले चुनावों का मनमुटाव रहा। हालांकि प्रत्याशी ने खुल कर इसके बारे में कोई शिकायत नहीं की है।

इटावा में भी अपनों ने घेरा
भाजपा से सांसद रहे डॉ. रामशंकर कठेरिया इस बार 58 हजार वोटों से हार गए। हालांकि हार के बाद उन्होंने अपने चुनाव प्रबंधन को कमजोर बता कर बात खत्म की लेकिन क्षेत्र में भितरघात की चर्चाएं हो रही हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कठेरिया के चुनाव से दूरी बनाए रखी। वोटरों तक इसका संदेश भी गया।

कई सीटों के बारे में जुटाई जा रही जानकारी
इस क्षेत्र में भाजपा हमीरपुर, जालौन और कन्नौज सीटें भी हारी हैं। कन्नौज में भाजपा प्रत्याशी से पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं से नोकझोंक पहले ही हो चुकी थी। इसमें वायरल ऑडियो की चर्चा बड़े नेताओं तक पहुंची थी। कहा जा रहा है कि ऐसे कई नेताओं ने वहां खेल किया। हालांकि कन्नौज में सपा प्रमुख के खुद उतरने के बाद मुकाबला बेहद सख्त होने की बात स्वाभाविक मानी जा रही थी। उन्नाव जैसी सीट, जहां पिछले चुनाव में लीड चार लाख से ज्यादा थी, इस बार हजारों में सिमट गई। इसके पीछे भी अपनों की बेरुखी की चर्चा है।

कानपुर भी अछूता नहीं
भितरघात की चर्चाओं से कानपुर भी अछूता नहीं है। भाजपा प्रत्याशी के आने के साथ ही बाहरी होने की चर्चा शुरू करने वाले अंदर के ही लोग थे। बाद में करीबी संगठनों के प्रभावशाली लोगों ने भी इसे हवा दी। यह अलग बात है कि यह सीट किसी तरह भाजपा बचा ले गई। कानपुर में लंबे समय बाद कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन वह महज 21 हजार वोट से पीछे रह गई। कहा जा रहा है कि सपा और कांग्रेस में अंदरूनी खेमेबंदी ने नुकसान पहुंचाया वरना यह अंतर पाटा जा सकता था।

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