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यूपी के दिग्गजों ने बाहर भी फहराया है कामयाबी का परचम, दूसरे राज्यों में भी दिखाया जलवा

यूपी के दिग्गजों ने बाहर भी कामयाबी का परचम फहराया है। उन्हें जब भी मौका मिला तो अपनी लोकप्रियता के बूते विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया। 

यूपी के दिग्गजों ने बाहर भी फहराया है कामयाबी का परचम, दूसरे राज्यों में भी दिखाया जलवा
Deep Pandeyअजित खरे,लखनऊFri, 03 May 2024 07:32 AM
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके राजबब्बर इस बार यूपी नहीं हरियाणा से लोकसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। भाजपा की जीती हुई सीट गुरुग्राम से कांग्रेस के टिकट पर उनकी उम्मीदवारी का ऐलान होने के बाद अब यह चुनाव खासा दिलचस्प हो गया है। यूपी से कई बड़ी  शख्सियतों ने इस राज्य से बाहर जाकर जहां चुनाव लड़ा, उन्हें कामयाबी मिली। यह बड़े नेता दूसरे राज्यों में अपना सियासी जलवा दिखाने में पीछे नहीं रहे हैं। उन्हें जब भी मौका मिला तो अपनी लोकप्रियता के बूते विरोधियों को चारों खाने चित्त कर दिया। 

इंदिरा गांधी (चिकमंगलूर व मेडक) 
देश की तीसरी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 1967, 1971 व 1980 का लोकसभा चुनाव  रायबरेली से जीतीं लेकिन 1977 का चुनाव वह रायबरेली से हार गईं। उन्हें जनता पार्टी के राजनारायण ने हराया था। इसके बाद 1980 का चुनाव उन्होंने रायबरेली के अलावा आंध्र प्रदेश की मेडक लोकसभा सीट से लड़ा और दोनों सीट से जीत दर्ज की। मेडक सीट अब तेलगांना राज्य में आती है। केवल मेडक ही नहीं इंदिरा गांधी यूपी से बाहर एक बार कर्नाटक से चुनाव लड़ चुकी हैं। कर्नाटक के लोकसभा सीट चिकमंगलूर पर उपचुनाव होने को था। एक साल पहले रायबरेली से चुनाव हारी इंदिरा गांधी ने 1978 में यहां चिकमंगलूर से चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। 

अटल बिहारी वाजपेयी (गांधीनगर,नई दिल्ली, विदिशा) 
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता ऐसी रही उन्होंने अलग-अलग राज्यों में कई सीटों पर चुनाव लड़ा। वह लखनऊ से 1991 से 2004  तक पांच बार लगातार जीते थे। बलरामपुर सीट से भी जीते थे। गुजरात की गांधीनगर सीट जीती। नई दिल्ली से भी वह सांसद रहे। मध्य प्रदेश की ग्वालियर से एक बार जीते और मध्य प्रदेश की विदिशा सीट से वह सांसद रहे। हालांकि उन्हें 1957 में मथुरा, 1962 में बलरामपुर, 1962 में लखनऊ, 1984 में ग्वालियर से हार का स्वाद का भी चखना पड़ा।
 
सोनिया गांधी (बेल्लारी)
सोनिया गांधी यूं तो मूलत: इटली की रहने वाली हैं और कांग्रेस की लंबे समय तक अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अपनी कर्मभूमि अमेठी व रायबरेली को ही बनाया और एक तरह से उनका यूपी से संसदीय राजनीति का रिश्ता गहरा होता गया। अपनी सास इंदिरा गांधी की सीट रायबरेली व पति राजीव गांधी की सीट अमेठी से चुन लड़कर वह सांसद बनीं।  सोनिया गांधी ने 1999 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा और अमेठी से जीत दर्ज की। उन्होंने कनार्टक की बेल्लारी लोकसभा सीट से भी चुनाव लड़ा और भाजपा की लोकप्रिय नेता सुषमा स्वराज को हरा दिया। साल 2004 में रायबरेली से चुनाव जीतीं। इसके बाद ही 2009, 2014 व 2019 में भी जीतीं। बीच में 2006 में हुए उपचुनाव में सोनिया ने जीत दर्ज की। 

अमेठी (वायनाड) 
राहुल गांधी अमेठी से तीन बार लगातार सांसद रहे और पिछली बार वह वायनाड (केरल) से जीते और अमेठी से हारे। वह एक बार फिर केरल की वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां वोट पड़ चुके हैं। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि राहुल गांधी अमेठी से चुनाव लड़ते हैं या नहीं। राहुल गांधी के सामने जब 2004 में पहली बार चुनाव लड़ने का मौका आया तो उन्होंने अपने पिता राजीव गांधी की सीट अमेठी को प्राथमिकता दी।

राजबब्बर (गुरुग्राम- प्रत्याशी)
रंगकर्मी, अभिनेता से नेता बने राजबब्बर यूपी के रहने वाले हैं और उनका सियासी सफर वीपी सिंह के जनमोर्चा के वक्त से शुरू हुआ। बाद में वह मुलायम सिंह के करीब आए और लखनऊ से वह अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ सपा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। इसके बाद वह लखनऊ से आगरा पहुंचे और अगले दो चुनाव 1999 व 2004 लड़े और आगरा से सपा के सांसद बने। इसके बाद जब 2009 में फिरोजाबाद में लोकसभा उपचुनाव हुआ तो उन्होंने कांग्रेस के जरिए सपा की डिंपल यादव को हरा दिया। पिछला चुनाव वह फतेहपुर सीकरी से जीत नहीं पाए। अब वह यूपी से बाहर हरियाणा में किस्मत आजमा रहे हैं।