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बसपा के लिए अब अकेले माहौल बनाएंगी मायावती, विरोधियों का बिगाड़ेंगी खेल

यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए बसपा प्रमुख मायावती अपनी पार्टी के लिए अब अकेले माहौल बनाएंगी। मायावती अकेले स्टार प्रचारक के रूप में कमान संभाले हुए हैं।

बसपा के लिए अब अकेले माहौल बनाएंगी मायावती, विरोधियों का बिगाड़ेंगी खेल
Deep Pandeyशैलेंद्र श्रीवास्तव,लखनऊSun, 12 May 2024 06:02 AM
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लोकसभा चुनाव के लिए अब शेष चार चरण बचे हैं। अन्य दलों के कई-कई नेता जहां अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हुए हैं, वहीं मायावती अकेले स्टार प्रचारक के रूप में कमान संभाले हुए हैं। आकाश आनंद के सभी कार्यक्रम रद्द करने के साथ ही सोशल मीडिया पर पार्टी की बात भी अब सावधानीपूर्वक रखी जा रही है। मायावती अवध के साथ अब पूर्वांचल को मथेंगी। यही वह चरण है जिसमें बसपा ने पिछले चुनाव में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया था।

जातीय समीकरण साधेंगी
बसपा ने पिछले चुनाव में जो दस सीटें जीती थीं उसमें छह सीटें अंबेडकरनगर, श्रावस्ती, गाजीपुर, घोसी, जौनपुर और लालगंज इन्हीं चरणों में आती हैं। मछलीशहर सीट बसपा मात्र 181 वोटों से हारी थी। जातीय समीकरण के हिसाब से देखा जाए तो बसपा के लिए यह सीटें हमेशा फायदेमंद साबित हुई हैं। मायावती ने पहले इन सीटों पर दलितों वोटों को साधे रखने के लिए आकाश आनंद को भेजने का कार्यक्रम तय किया गया था, लेकिन उनके उग्र भाषण और सरकार पर हमलावर रुख के बाद हुई एफआईआर के बाद यूपी के साथ देश के अन्य राज्यों में प्रस्तावित उनके कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। कोआर्डिनेटरों को संदेश दे दिया गया है कि वे आकाश की जगह अब मायावती का कार्यक्रम लगवाएं। हर चरण के लिए अलग-अलग कार्यक्रम लगाया जा रहा है।

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स्वयं सभाएं करने के पीछे सोची-समझी रणनीति 
बसपा ने वैसे तो चरणवार 40-40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी, लेकिन प्रमुख रूप से तीन नेताओं को रखा गया। क्रम संख्या में सबसे ऊपर मायावती फिर आकाश आनंद और सतीश चंद्र मिश्र को रखा गया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल समेत अन्य नेताओं को रखा गया है। सतीश चंद्र मिश्र को अभी तक सभाओं से दूर रखा गया है। पार्टी स्तर पर जो भी कार्यक्रम लगाए गए उसमें मायावती और आकाश आनंद के ही लगाए गए। कुछ स्थानों पर प्रदेश अध्यक्ष के कार्यक्रम हैं। मायावती द्वारा स्वयं सभाएं करने के पीछे सोची-समझी रणनीति बताई जा रही है। मायावती को जहां लगेगा कि बसपा की स्थिति अच्छी नहीं है वहां विरोधियों का खेल बिगाड़ने का काम करेंगी।

संविधान बदलने का भय दिखा रोकेंगी वोट
बसपा सुप्रीमो प्रचार के दौरान अब संविधान बदलने को मुद्दा बनाने जा रही है। इसके पीछे यह मकसद है कि दलित वोट बैंक किसी कीमत पर न बंटने पाए। भाजपा द्वारा 400 पार का नारा दिए जाने के बाद यह चर्चाएं शुरू हो गई है कि संविधान बदलने की तैयारी है। प्रदेश में दलित वोट 27 फीसदी है, लेकिन कुछ सीटों पर इसकी संख्या 30 से 40 फीसदी तक भी बताई जा रही है। दलित वोट बैंक के सहारे ही मायावती यूपी में मुख्यमंत्री बनती आई हैं, लेकिन पिछले कुछ चुनावों का ट्रेंड देखा जाए तो इस वोट बैंक में बंटवारा होता हुआ दिखाई दिया है। मायावती को संविधान बदलने की चर्चाओं पर अपना वोट बैंक बचाए रखने का बैठे-बैठाए मुद्दा मिल गया है। वह अब इसे हाथियार के रूप में इस्तेमाल करने जा रही हैं।