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विरासत बचाने के लिए बदल लिए रास्ते, सियासत में पैर जमाने को अपने भी हो गए बेगाने

यूपी की सियासत में पैर जमाने को अपने भी बेगाने हो गए । विरासत बचाने के लिए रास्ते बदल लिए। इस विरासत को लेकर अपने कब बेगाने हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता है।

विरासत बचाने के लिए बदल लिए रास्ते, सियासत में पैर जमाने को अपने भी हो गए बेगाने
Deep Pandeyशैलेंद्र श्रीवास्तव,लखनऊThu, 09 May 2024 08:41 AM
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यूपी में राजनीतिक विरासत को लेकर अपनों में जंग भी कुछ कम नहीं है। इस विरासत को लेकर अपने कब बेगाने हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता है। यूपी में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल सकते हैं। पिता की पार्टी को लेकर मां-बेटी में जंग चल रही है, तो देवरानी भाजपा के साथ अपनों के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है। जब अपनों के खिलाफ चुनाव लड़ने की बात आई तो साफ मना कर दिया। पिता ने अपनी पार्टी बनाई फिर भी बेटी भाजपा के साथ कदम-ताल कर रही है।  

गांधी परिवार में अलग राह
संजय गांधी के निधन के बाद उनकी पत्नी मेनका गांधी ने राजनीति में पहचान बनाने के लिए अलग राह चुनी। कोई समानांतर पार्टी तो नहीं बनाई, लेकिन पति के नाम से सबसे पहले संजय विचार मंच का गठन किया। इसका पहला सम्मेलन राजधानी के कैसरबाग स्थित बारादरी में हुआ। जिसमें सभी कांग्रेस जनों से शामिल होने की अपील की गई थी, लेकिन कांग्रेसी इसमें आने का साहस नहीं दिखा पाए। इसी के बाद मेनका ने अलग राह चुनी और चुनावी राजनीति में उतर आई। मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी अब दोनों भाजपा में हैं।

मां-बेटी में विरासत को लेकर जंग
अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल की मौत के बाद राजनीतिक विरासत को लेकर जंग किसी से छिपी नहीं है। वर्ष 2014 में भाजपा से गठबंधन से बेटी अनुप्रिया पटेल के सांसद बनने के साथ ही राजनीतिक विरासत को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि दोनों ने अलग राह चुनना मुनासिब समझा। राजनीतिक विरासत को लेकर मां-बेटी में ऐसी जंग छिड़ी कि आज के दौर में दोनों अलग-अलग होकर चुनाव लड़ और लड़ा रही हैं। अनुप्रिया भाजपा के साथ खड़ी हैं तो उनकी मां कृष्णा पटेल पीडीएम के सहारे लोकसभा के मैदान में हैं। दोनों बिरादरी के वोट बैंक पर पकड़ होने का दावा कर रही हैं। 

भाजपा की राह पकड़ी
मुलायम सिंह की राजनीतिक विरासत को अखिलेश यादव आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी छोटी बहू अपर्णा ने भाजपा के साथ हैं। मुलायम के रहते हुए वह भाजपा की नीतियों की सिर्फ तारीफें किए करती थीं, लेकिन अब वह पूरी तरह से भाजपाई हो चुकी हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य एक समय बसपाई हुआ करते थे, फिर भाजपाई हुए और वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपाई हो गए। अखिलेश से नाराज होने के बाद अपनी पार्टी का ऐलान कर दिया, लेकिन उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं से टिकट कटने के बाद भी भाजपाई हैं। 

मां भाजपाई तो बेटा सपाई
रीता बहुगुणा जोशी किसी जमाने में कांग्रेसी हुआ करती थी। लखनऊ कैंट से पहली बार 2012 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनी, वर्ष 2017 में वह भाजपाई हो गईं और फिर कैंट से विधायक चुनी गई। भाजपा की पहली सरकार में वह मंत्री बनाई गई, लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में उन्हें इलाहाबाद लोकसभा से चुनाव लड़ाया गया और वह जीती भी। इस बार उनका टिकट काट दिया गया है। रीता भाजपाई हैं तो उनका बेटा मयंक जोशी सपाई है। 

फतेहपुर सीकरी से भाजपा के विधायक हैं चौ. बाबूलाल। लोकसभा चुनाव में उनके बेटे रामेश्वर ने बगावत कर दी और फतेहपुर सीकरी से भाजपा उम्मीदवार राजकुमार चाहर के खिलाफ ताल ठोंक दिया। उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन बेकार साबित हुई। चौ. बाबूलाल भले ही भाजपाई हैं, लेकिन उनका बेटा बागी होकर मैदान में है।