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ब्रज की इन सीटों पर आज तक नहीं बनी कोई महिला सांसद, मैदान में उतरीं केवल इतनी प्रत्याशी

ब्रज की लोकसभा सीटों में आगरा, फिरोजाबाद और एटा ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं जहां से अभी तक कोई महिला संसद में नहीं पहुंच पाई है। हालांकि ब्रज मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस सीट ऐसी हैं जहां महिलाएं जीतीं।

ब्रज की इन सीटों पर आज तक नहीं बनी कोई महिला सांसद, मैदान में उतरीं केवल इतनी प्रत्याशी
Srishti Kunjनीरज शर्मा,आगराWed, 17 Apr 2024 08:57 AM
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ब्रज की लोकसभा सीटों में आगरा, फिरोजाबाद और एटा ऐसे लोकसभा क्षेत्र हैं जहां से अभी तक कोई महिला संसद में नहीं पहुंच पाई है। सीकरी लोकसभा के गठन के साथ पहली जीत बसपा प्रत्याशी सीमा उपाध्याय ने दर्ज की थी। हालांकि ब्रज मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, हाथरस सीट ऐसी हैं जहां महिलाओं ने जीत दर्ज कर दिल्ली का सफर तय किया है। आजादी के बाद 1952 पहले लोकसभा चुनाव अब तक आगरा लोकसभा सीट पर किसी महिला को प्रतिनिधित्व का मौका नहीं मिला है। 

अब तक केवल 9 महिला प्रत्याशी ही चुनावी मैदान में उतर पाई हैं, जबकि 311 पुरुष प्रत्याशी ताल ठोंक चुके हैं। आगरा लोकसभा सीट पर पहले तीन चुनाव में कोई महिला प्रत्याशी नहीं उतरी। पहली बार 1967 में भारतीय जनसंघ ने एच. रानी को उतारा। उन्होंने कांग्रेस से तीन बार के सांसद रहे सेठ अचल सिंह को कड़ी टक्कर दी। एच. रानी दूसरे स्थान पर रहीं और उन्हें तब 68,095 वोट मिले थे। उन्हें कुल 23.99 प्रतिशत वोट मिले थे।

सीकरी सीट पर महिला ने खाता खोला
2009 में परिसीमन के बाद पहली बार अस्तित्व में आई फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर पहली सांसद महिला ही बनीं। बसपा की सीमा उपाध्याय को इस लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। उन्होंने सिने स्टार और आगरा से दो बार के सांसद राज बब्बर को हराया था। वर्ष 2014 के चुनाव में भी प्रमुख दलों बसपा ने सीमा उपाध्याय और समाजवादी पार्टी ने रानी पक्षालिका सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। हालांकि दोनों हार गईं, लेकिन इन दोनों को मोदी लहर में भी अच्छे वोट मिले। सीमा उपाध्याय को 2,53,483 और पक्षालिका सिंह को 2,13,397 वोट मिले थे।

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हेमा हैट्रिक बनाने उतरीं डिंपल विरासत बचाने
मथुरा में भी कभी महिला सांसद नहीं चुनी गई। 2014 के चुनाव में हेमा मालिनी ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद भाजपा ने 2019 के चुनाव में हेमा मालिनी को मैदान में उतारा और कान्हा की नगरी ने उन्हें भरपूर दिया। उन्हें 671293 वोट मिले थे। उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के कुंवर नरेंद्र सिंह को 293471 वोटों से शिकस्त दी थी। हेमा मालिनी मथुरा से हैट्रिक बनाने के लिए फिर से मैदान में हैं। इसी तरह मैनपुरी सीट पर 2022 में हुए उप चुनाव में डिंपल यादव ने महिलाओं का खाता खोला था। उन्होंने भाजपा के रघुराज शाक्य को हराया था।

अलीगढ़ में शीला गौतम ने चार बार जीता चुनाव
अलीगढ़ लोकसभा सीट पर नारी शक्ति ने अपनी धाक जमाई है। यहां से भाजपा की प्रत्याशी शीला गौतम ने चार बार लोकसभा चुनाव जीता है। उन्होंने 1991 में राम लहर के दौरान पहला चुनाव जीता। इसके बाद 1996 में दूसरी बार चुनाव जीत कर दिल्ली पहुंची। 1998 के चुनाव और 1999 के चुनाव में भी उन्होंने यहां कमल खिलाया था। 2004 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी बिजेंद्र सिंह उन्हें चुनाव हरा दिया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी राजकुमारी चौहान ने जीत हासिल की थी। हाथरस सीट पर 2009 में आरएलडी प्रत्याशी सारिका सिंह जीती थी।

राष्ट्रीय-क्षेत्रीय दलों ने नहीं बनाया उम्मीदवार
1984 में निर्दलीय सुमन ने चुनाव लड़ा, पर 600 वोट पा सकीं। 1996 में तीन महिला प्रत्याशी आईं, लेकिन किसी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दल ने महिलाओं को टिकट नहीं दिया। भारतीय क्रांति दल ने असफिया बेगम को उतारा, जिन्हें 326 वोट मिले। निर्दलीय रेनू को 124 और चित्रा सचान को 79 वोट मिले। 1989 में निर्दलीय शम्मी 1310 वोट पा सकीं। 2009 में एकमात्र महिला प्रत्याशी रामदेवी को 532 वोट और 2014 में भी इकलौती महिला प्रत्याशी अनीता को 765 वोट मिले थे। 2019 में कांग्रेस ने प्रीता हरित को मैदान में उतारा था।

पी. कुमारी भी लड़ीं थीं
1967 के चुनाव मेें ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पी. कुमारी चुनाव लड़ी। उन्हें 2042 वोट हासिल हुए थे। 1952, 1957, 1962, 1971, 1977, 1980, 1989, 1991, 1999, 2004 के आम लोकसभा चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी आगरा लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में नहीं उतरी। हाथरस लोकसभा सीट पर 2009 में सारिका बघेल ने जीत दर्ज की थी। आगरा लोकसभा सीट की तरह ही फिरोजाबाद और एटा लोकसभा सीट से कोई महिला सांसद नहीं चुनी गई है।

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