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Lok Sabha Chunav: यूपी की वो सीटें, जहां पीढ़ी दर पीढ़ी जाती रही चुनावी कमान, कोई पिता तो कोई दादी की संभाल रहा विरासत

देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव चल रहा है। सात चरणों में हो रहे इस चुनाव में सबसे ज्यादा लोगों की नजरें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं। इस प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं।

Lok Sabha Chunav: यूपी की वो सीटें, जहां पीढ़ी दर पीढ़ी जाती रही चुनावी कमान, कोई पिता तो कोई दादी की संभाल रहा विरासत
Dinesh Rathourलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊSat, 04 May 2024 05:35 PM
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Lok Sabha Election: देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव चल रहा है। सात चरणों में हो रहे इस चुनाव में सबसे ज्यादा लोगों की नजरें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं। इस प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं। मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी राज्य के वाराणसी सीट से सांसद हैं। 1950 में इस प्रदेश के गठन के बाद यूपी में पहला लोकसभा चुनाव 1951 में हुआ। 80 सीटों वाले इस राज्य में कई  ऐसी सीटें हैं जहां की चुनावी कमान पीढ़ी दर पीढ़ी संभालती चली आ रही हैं। यहां किसी को मां की विरासत मिली तो किसी ने खुद ही अपने बेटे को सत्ता सौंप दी। इनमें मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, सोनिया गांधी जैसे कई नेता शामिल जिनके बाद अब उनके बेटे सत्ता संभाल रहे हैं। अब बात करते हैं लोकसभा सीट की। चुनाव आते हैं तो यूपी की एक सीट खासी चर्चा में रहती है। 20 सालों से इस सीट पर सोनिया गांधी लोकसभा चुनाव जीतती चली आ रही हैं। इस बार ये सीट सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल को सौंप दी।

तीन मई को राहुल गांधी ने इस से नामांकन भी कर दिया है। रायबरेली सीट पर राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी भी चुनाव लड़ चुके हैं। फिरोज गांधी (1952 और 1957) तक सांसद रहे और बाद में उनकी दादी इंदिरा गांधी (1967 और 1971) ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। ये सिलसिला रायबरेली ही नहीं बल्कि कैसरगंज, बहराइच, कैराना और बिजनौर में भी देखने को मिला। इन सीटों पर भी माता-पिता ने अपनी चुनावी विरासत बच्चों को सौंप दी। 

बिजनौर की बात करें तो यहां मीरापुर से रालोद के मौजूदा विधायक चंदन चौहान लोकसभा में पदार्पण करना चाह रहे हैं। वह पूर्व सांसद संजय सिंह चौहान के बेटे हैं, जिन्होंने 2009 में सीट जीती थी, जब आरएलडी का बीजेपी के साथ गठबंधन था।

कैसरगंज में बृजभूषण के बेटे करण चुनावी मैदान में

कैसरगंज में भाजपा ने निवर्तमान सांसद बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके छोटे बेटे करण को मैदान में उतारा है, जो अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं। करण के बड़े भाई प्रतीक भूषण गोंडा से विधायक हैं। बृज भूषण 2009, 2014 और 2019 में तीन बार कैसरगंज से सांसद चुने गए। हालांकि, पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न विवाद को देखते हुए बीजेपी ने उनसे अपने बेटे के लिए रास्ता बनाने को कहा था।

बहराइच में अक्षयबर की जगह बेटा लड़ रहा चुनाव

बहराइच में बीजेपी ने मौजूदा सांसद अक्षयबर लाल गोंड की जगह उनके बेटे आनंद गोंड को टिकट दिया है, जिनकी शैक्षिक योग्यता में एमबीए और पीएचडी शामिल हैं। आनंद सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं। भाजपा के दिग्गज नेता अक्षयबर पांच बार विधायक रह चुके हैं। भले ही इस बार उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया, लेकिन अक्षयबर के पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़ाव को देखते हुए, भाजपा ने उनके बेटे को बहराइच से मैदान में उतारकर उनकी वफादारी का इनाम दिया।

कैराना में मां ने बेटी को सौंपी जिम्मेदारी

कैराना के एसपी विधायक नाहिद हसन की बहन इकरा हसन उस लोकसभा सीट से मैदान में हैं, जिसका प्रतिनिधित्व कभी उनकी मां तबस्सुम बेगम करती थीं। तबस्सुम ने भाजपा के दिग्गज नेता हुकुम सिंह के निधन के बाद रालोद उम्मीदवार के रूप में 2018 के उपचुनाव में कैराना से जीत हासिल की थी। एसपी के समर्थन से उन्होंने सिंह की बेटी मृगांका को हराया था और 2014 के बाद यूपी से लोकसभा के लिए निर्वाचित होने वाली पहली मुस्लिम उम्मीदवार थीं।