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Hindi News उत्तर प्रदेशब्राह्मण, ओबीसी और दलित... कैसे मोदी के प्रस्तावकों के जरिए भाजपा साध गई जातीय समीकरण

ब्राह्मण, ओबीसी और दलित... कैसे मोदी के प्रस्तावकों के जरिए भाजपा साध गई जातीय समीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी से तीसरी बार अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। इस दौरान मोदी की तरफ से चार प्रस्तावक कलक्ट्रेट पहुंचे। इन प्रस्तावकों के जरिए जातीय समीकरण साधा गया है।

ब्राह्मण, ओबीसी और दलित... कैसे मोदी के प्रस्तावकों के जरिए भाजपा साध गई जातीय समीकरण
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीTue, 14 May 2024 11:02 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावकों के जरिए भाजपा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जातिगत समीकरण साधने का भी प्रयास किया है। चार में से एक प्रस्ताव ब्राह्मण, एक दलित और दो ओबीसी समाज से थे। चारों प्रस्तावकों में ज्योतिषाचार्य पं. गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को छोड़ बाकी तीन भाजपा से जुड़े हैं। उनमें पुराने कार्यकर्ता बैजनाथ पटेल और भाजपा महानगर के पूर्व मंडल अध्यक्ष लालचंद कुशवाहा ओबीसी और जिला महामंत्री संजय सोनकर दलित कार्यकर्ता हैं। प्रस्तावकों के जरिए भाजपा समाज में दखल बढ़ाने के साथ ही पूर्व के सम्बंधों को और मजबूत करना चाहती है। इसलिए इस बार प्रस्तावकों का चयन गोपनीय तरीके से हुआ। प्रस्तावकों का भी नाम उजागर न करने की हिदायत दी गई थी। नामांकन के कुछ घंटे पहले तक प्रस्तावकों का नाम किसी को नहीं पता था।

असल में पूर्वांचल में ओबीसी जातियों पर हर दल की नजर रहती है। इनकी मूवमेंट पासा बदलकर रख देती है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की लहर के बाद भी पूर्वांचल में कई सीटों पर बीजेपी को झटका लगा था। वाराणसी के आसपास की गाजीपुर, घोसी, आजमगढ़, जौनपुर सीटें भाजपा हार गई थी। इसके अलावा विधानसभा के चुनाव में भी आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर जैसे जिलों में भाजपा का खाता नहीं खुल सका था।

इस हार के लिए ओबीसी और दलित वोटरों की एकजुटता को ही कारण माना गया था। इसके बाद से ही भाजपा ने ओपी राजभर, संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल को पहले से ज्यादा महत्व देना शुरू किया था। मंगलवार को ही वाराणसी में जनवादी पार्टी के अध्यक्ष संजय चौहान को भी भाजपा ने अपने साथ मिला लिया है। अपनी बिरादरी पर संजय चौहान का काफी प्रभाव है।

मोदी के पहले प्रस्तावक गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ लगातार नामांकन के दौरान उनके साथ ही रहे। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा और पूजा का मुहूर्त भी काशी के प्रकांड विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने ही निकाला था। वह ज्योतिष के दुर्लभ विद्वान हैं। ज्योतिष और कर्मकांड के साथ वह चारों वेदों के भी अच्छे जानकार हैं। गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ मूल रूप से दक्षिण भारतीय हैं लेकिन लम्बे समय से वह काशी के मीरघाट इलाके के सांगवेद विद्यालय में रहते हैं। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के बाद उसके लोकर्पण का भी मुहूर्त निकाला था।

दूसरे प्रस्तावक बैजनाथ पटेल सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में हरसोस के रहने वाले हैं। वह जनसंघ के समय से जुड़े हैं। उम्र के साथ सक्रियता भले ही कम हो गई हो लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में हमेशा जुड़े रहे हैं। सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र में वह एक सफल रणनीतिकार भी माने जाते हैं। 

दूसरे ओबीसी प्रस्तावक लालचंद कुशवाहा छित्तूपुर-सिगरा के रहने वाले हैं। वह पूर्व में भाजपा की महानगर कमेटी में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते रहे। कैंट विधानसभा क्षेत्र के अंदर विभिन्न चुनावों में उनकी बड़ी भूमिका रहती थी। क्षेत्र के पुराने कार्यकर्ताओं के रूप में उनकी पहचान है। 

संजय सोनकर सबसे युवा प्रस्तावक और शिवपुर के रहने वाले हैं। संजय सोनकर वर्तमान में पार्टी के जिला महामंत्री हैं। इसके पूर्व वह एससी मोर्चा के जिलाध्यक्ष, जिला कार्यसमिति सदस्य, विधानसभा क्षेत्र में संगठन प्रमुख, प्रधानमंत्री की रैलियों की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। संजय ने कहा कि एक छोटे से कार्यकर्ता को इतना बड़ा सम्मान देने के लिए मैं पार्टी का धन्यवाद करता हूं।

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