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मनरेगा और एसएचजी से गांवों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देगी यूपी सरकार

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Deep Pandey
Thu, 04 Jun 2020 09:12 AM
मनरेगा और एसएचजी से गांवों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देगी यूपी सरकार

कोरोना संक्रमण ने प्रदेश के गांवों में रोजगार के नए द्वार खोलने शुरू कर दिए हैं। शहरों से पलायन कर गांवों में पहुंचे मजदूर परिवार अब गांव में ही अपनी आजीविका के साधनों की तलाश में जुटे हैं। इसमें अहम भूमिक ग्राम्य विकास विभाग निभा रहा है। विभाग ने अगले दो महीने के अंदर करीब एक करोड़ लोगों को मनरेगा और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार से जोड़ देने की तैयारी की है। इस लक्ष्य को मुश्किल इसलिए नहीं माना जा रहा है क्योंकि महज एक महीने की कोशिश में ही राज्य में 40 लाख से अधिक लोगों को मनरेगा के तहत रोजगार से जोड़ दिया गया है। 

शहरों से लौटे मजदूर भी तेजी से जुड़ने लगे मनरेगा से करीब साढ़े पांच लाख प्रवासी मजदूर भी मनरेगा के तहत दीहाड़ी करने लगे हैं। ये वह मजदूर हैं जो दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद आदि शहरों में रोजाना 400 से 1000 रुपये तक कमा रहे थे। इन लोगों ने महज 201 रुपये रोजाना की दीहाड़ी पर मनरेगा के काम को अपना लिया है। 

दो लाख सक्रिय समूह हैं राज्य में, 70 हजार और जल्द ही सक्रिय किए जाएंगे

उ.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य में वर्तमान में करीब 3.5 लाख समूह हैं। इन समूहों से 38 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। मिशन निदेशक सुजीत कुमार के मुताबिक दो लाख समूह सक्रिय हैं। इन समूहों से जुड़ी 20 लाख महिलाओं में से करीब दस लाख महिलाएं किसी ना किसी रूप में स्वरोजगार से जुड़ी हैं। वर्तमान परिस्थितियों में समूह की अन्य सदस्य महिलाएं भी किसी ना किसी कामधंधे से खुद को जोड़ रही हैं। सुजीत कुमार के मुताबिक अगले कुछ दिनों के अंदर ही निष्क्रिय चल रहे 1.5 लाख समूहों में से 70 हजार समूहों को फिर से सक्रिय कर दिया जाएगा। इन समूहों के सक्रिय होने पर करीब सात लाख महिलाएं रोजगार से जुड़ेंगी। उन्होंने बताया है कि दो माह के अंदर राज्य में समूहों से जुड़ी करीब 30 लाख महिलाओं को रोजगार से जोड़ दिए जाने की उम्मीद है। 2024 तक समूहों के माध्यम से ही एक करोड़ ग्रामीण महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है। 
 
 
अगले दस दिनों के अंदर राज्य में मनरेगा के तहत ही 50 लाख लोग रोजगार से जोड़ दिए जाएंगे। गांवों में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से भी तेजी से महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है। गांवों में एक करोड़ लोगों को रोजगार से जोड़ने के हम काफी करीब हैं, कुछ और प्रयास के बाद इस लक्ष्य को भी हासिल कर लिया जाएगा। 
मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग


बुधवार तक के आंकड़े:
4059022 मनरेगा मजदूर काम में लगे थे
557585 प्रवासी मजदूरों को मिल गया था मनरेगा में काम
02  लाख एसएचजी ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय थे 
20 लाख महिलाएं जुड़ी हैं इन एसएचजी से

आगे का लक्ष्य:
दस दिनों में मनरेगा के तहत 50 लाख मजदूरों को काम देने की तैयारी
70 हजार निष्क्रिय एसएचजी को सक्रिय करने कर देंगे कुछ दिनों में

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