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फाइनेंस कंपनियों में फंसा 18 लाख लोगों का पैसा दिलवाएगी यूपी सरकार, ऐसे होगी अरबों की रिकवरी

यूपी सरकार फाइनेंस कंपनियों में फंसा 18 लाख लोगों का पैसा निकलवाएगी। फंसी रकम दो कानून के जरिए रिकवर की जाएगी। इसके लिए यूपी सरकार सेबी की मदद लेने जा रही है। इन कंपनियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र होंगे।

फाइनेंस कंपनियों में फंसा 18 लाख लोगों का पैसा दिलवाएगी यूपी सरकार, ऐसे होगी अरबों की रिकवरी
Srishti Kunjअजित खरे,लखनऊThu, 21 Dec 2023 10:27 AM
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यूपी के 18 लाख लोगों की विभिन्न फाइनेंस कंपनियों में फंसी रकम को अब वापस कराया जाएगा। इसके लिए यूपी सरकार सेबी की मदद लेने जा रही है। सेबी के सहयोग से इन कंपनियों के खिलाफ साक्ष्य एकत्र होंगे। इस संबंध में विभिन्न जिलों से सरकार के पोर्टल पर दर्ज इससे संबंधित शिकायतों का परीक्षण कर कार्यवाही होगी।

हाल में मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने इस संबंध में संस्थागत वित्त महानिदेशक को इस काम के लिए नोडल अधिकारी बनाया है। नोडल अधिकारी सेबी (सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) व रिजर्व बैंक से समन्वय कर अगले तीन महीनों तक इस पर सम्पत्तियों का ब्योरा व साक्ष्य एकत्र करेंगे।

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दो कंपनियों से पीड़ित हैं 15 लाख लोग
सूत्रों के मुताबिक विभिन्न कंपनियों में 18 लाख लोगों की अरबों की रकम फंसी है। इसमें लखनऊ व चंडीगढ़ की दो बड़ी फाइनेंस कंपनियों की वित्तीय धोखाधड़ी के 15 लाख लोग शिकार हुए हैं। इसके अलावा दर्जन भर छोटी कंपनियों से पीड़ित लोगों की संख्या लगभग तीन लाख है।

महानिदेशक संस्थागत वित्त, उत्तर प्रदेश, शिव सिंह यादव ने कहा कि सेबी के साथ बैठकें कर उनके सामने इन कंपनियों के खिलाफ आए साक्ष्य रखे जाएंगे। साक्ष्य जुटाने व सम्पत्तियों का ब्योरा एकत्र करने का काम शुरू हो गया है। पीड़ितों से मिले फीडबैक के आधार पर पूरी पड़ताल होगी और फंसी धनराशि की रिकवरी कराई जाएगी।

दो कानूनों के जरिए कसा जाएगा शिकंजा
हाल में यूपी सरकार ने अनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी एक्ट मंजूर किया है। अब इसे केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए भेजा गया है। वहां से इसे मंजूरी मिलते ही यह एक्ट पूरे राज्य में लागू हो जाएगा। इसमे धोखाधड़ी कर आम लोगों की रकम लेकर चंपत हो जाने वाली फाइनेंस कंपनियों पर दस लाख जुर्माना व दस साल की जेल का प्रावधान है। यही नहीं,यूपी में डिपाजिटर प्रोटेक्शन एक्ट पहले से लागू है। इन दोनों कानूनों के जरिए गड़बड़ी करने वाली फाइनेंस कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।

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