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झोपड़ी में आग लगने से तीन मासूम भाई-बहन जिंदा जले, पिता भी झुलसा, भागने का भी नहीं मिला मौका

फिरोजाबाद के में शनिवार देर रात झोपड़ी में आग लगने से तीन मासूम भाई-बहनों की जिंदा जलकर मौत हो गई। दर्दनाक हादसे में दो बच्चों ने मौके पर तो एक ने अस्पताल में दम तोड़ा। झुलसे पिता का इलाज चल रहा है।

झोपड़ी में आग लगने से तीन मासूम भाई-बहन जिंदा जले, पिता भी झुलसा, भागने का भी नहीं मिला मौका
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,फिरोजाबादMon, 04 Dec 2023 08:37 AM
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फिरोजाबाद के जसराना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक झोपड़ी में आग लगने से तीन मासूम भाई-बहनों की जिंदा जलकर मौत हो गई। दर्दनाक हादसे में दो बच्चों ने मौके पर तो एक ने अस्पताल में दम तोड़ा। झुलसे पिता का इलाज चल रहा है। जसराना के गांव खड़ीत में शनिवार देर रात करीब साढ़े 10 बजे बंजारा शकील (33) अपने तीन बच्चों अनीश (4), रेशमा (3) और सामना (7) के साथ झोपड़ी में सो रहा था। शकील की पत्नी नेमजादी (30) उस समय पानी भरने गई हुई थी। अचानक फॉल्ट होने से चिंगारी के चलते झोपड़ी में आग लग गई। 

परिवार को बचाव का समय तक नहीं मिल पाया। आग की चपेट में आने से अनीश और रेशमा की मौके पर मौत हो गई, जबकि पिता व सामना गंभीर रूप से झुलस गए थे। सभी को ग्रामीणों और पुलिस की मदद से इलाज के लिए जिला अस्पताल में भिजवाया। यहां इलाज के दौरान रविवार को सामना की भी मौत हो गई। पिता शकील का इलाज चल रहा है। एसपी देहात कुमार रणविजय सिंह ने बताया कि शनिवार की देर रात झोपड़ी में आग लगी थी। तीन बच्चों की मौत हो गई है, जबकि गंभीर रूप से झुलसे पिता का इलाज चल रहा है।

बिजली आई तो कहर बन टूटी
घायल शकील ने बताया कि बिजली चली गई थी। कुछ देर बाद बिजली आई तो तेज आवाज से फॉल्ट हुआ और बल्ब से निकली चिंगारी से आग लग गई। आग ने इतनी तेज झोपड़ी को जद में लिया कि भागने तक का मौका ही नहीं मिला।

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तीसरी किश्त मिलती तो बन जाता मकान
शकील और उसकी पत्नी नेमजादी दोनों मिलकर फिरोजाबाद से चूड़ियां लाते और फेरी लगाकर बेचते हैं। परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला तो उन्होंने पास में ही अपना मकान बनवाना शुरू कर दिया। लेकिन तीसरी किश्त को रोक दिया जिसको जारी कराने में परिवार का पसीना छूट गया था। अगर यह किश्त मिल जाती तो परिवार नए मकान में जा सकता था।

खड़ीत में लोगों ने बताया कि शकील का परिवार पीएम आवास की किश्तों को पाकर और योजना का लाभ मिलने के बाद खुश था। उनको लग रहा था कि कम से कम इस झोपड़ी से निजात मिल जाएगी। लेकिन समय को यह मंजूर नहीं था व शकील के तीनों बच्चे आग में जलकर मर गए। अब शकील भी जीवन और मौत से जूझ रहा है। लोगों का कहना है कि पीएम आवास की दो किश्तों से मकान खड़ा कर लिया लेकिन तीसरी किश्त रोक दी गई।

क्यों रुकी किश्त, जांच की मांग
परिवार चक्कर लगाकर परेशान था। उनको अपनी फेरी का काम भी करना पड़ता था। लोगों का कहना है कि उसकी तीसरी किश्त कैसे रुकी, क्यों रोकी गई इसे लेकर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

डेरा की कॉलोनी नहीं बनी
डेरा के लोगों का कहना है कि उनकी झोपड़पट्टी की जगह एक कॉलोनी बनाकर देने की बात कही थी। इसका प्रस्ताव भी पास होने की बात सामने आई लेकिन आज तक कॉलोनी नहीं बनी और सालों से इन झोपड़पट्टी में जीवन गुजार रहे हैं। कुछ लोगों को पीएम आवास का लाभ मिल गया है।

अधिकारियों ने पहुंचकर ली जानकारी परिवार में तीन बच्चों की मौत के बाद एससडीएम आदेश कुमार सागर, नायब तहसीलदार ब्रजराज सिंह, सीओ राजवीर सिंह, थाना प्रभारी विनय कुमार मिश्र, लेखपाल इंद्रपाल सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर इसके बारे में जानकारी ली।

एसडीएम जसराना, आदेश कुमार सागर ने कहा कि शकील के परिवार को पीएम आवास की दो किश्तें मिल चुकी थीं। पहली किश्त 40 हजार, दूसरी 70 हजार रुपये की थी। कुल 1.10 लाख रुपये मिल चुके थे। तीसरी किश्त अभी आएगी। आवास वर्ष 22-23 में स्वीकृत हुआ है।

एक वर्ष चार दिन बाद हुआ दूसरा हादसा
पाढ़म में 29 नवंबर 2022 को भीषण अग्निकांड हुआ था। जिसमें परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इलैक्ट्रोनिक एवं फर्नीचर की दुकान में आग से एक ही परिवार के मनोज कुमार, नीरज (35) पत्नी मनोज कुमार, शिवानी पत्नी नितिन, तेजस्वी पुत्री नितिन, हर्ष पुत्र मनोज, भारत पुत्र मनोज की मौत हुई थी। एक परिवार के छह की मौत पर जसराना विधायक ने अग्निशमन केंद्र की मांग को लेकर विधानसभा में मुद्दा उठाया था। हादसे में बचे रमन सिंह एवं उनके पुत्र अभी भी हादसे उभर नहीं पाए हैं। तब तक दूसरा हादसा हो गया।

तीनों बच्चों को कब्र खोदकर दफनाया
खड़ीत में हुए अग्निकांड में तीनों बच्चों को कब्र खोदकर कर दफनाया गया। वहीं सभी ग्राम वासियों की आंखें नम हो गई थीं। बाबा कलुआ, चाचा अकील, रफीक ने मिट्टी देकर अंतिम विदाई दी। हर ओर चीख पुकार थी। अब सभी लोग शकील के जल्दी स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

काफी समय के बाद हुए थे बच्चे
बंजारे शकील का कहना है कि उसकी शादी के कई सालों बाद बच्चे हुए थे। परिवार में खुशी थी। एक-एक कर तीन बच्चे हो गए। अब तीनों एक साथ ही चले गए। इससे परिवार संतान विहीन हो गया है। मां की रोते-रोते अस्पताल में हालत बिगड़ रही थी।

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