ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News उत्तर प्रदेशयूपी में अब ड्रोन से होगी खेती, ट्रेनिंग के बाद किसानों और युवाओं को कानपुर से लेना होगा सर्टिफिकेट

यूपी में अब ड्रोन से होगी खेती, ट्रेनिंग के बाद किसानों और युवाओं को कानपुर से लेना होगा सर्टिफिकेट

यूपी में अब ड्रोन से खेती की शुरुआत होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने अनुमति प्रदान की। ड्रोन से खेती के लिए कानपुर का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। इससे पहले किसानों और युवाओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।

यूपी में अब ड्रोन से होगी खेती, ट्रेनिंग के बाद किसानों और युवाओं को कानपुर से लेना होगा सर्टिफिकेट
Srishti Kunjअभिषेक सिंह,कानपुरFri, 12 Apr 2024 10:53 AM
ऐप पर पढ़ें

यूपी में अब ड्रोन से खेती की शुरुआत होगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने अनुमति प्रदान कर दी है। लेकिन, ड्रोन से खेती के लिए कानपुर का सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा। प्रदेश सरकार ने इसके लिए कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि को पहला व इकलौता नॉलेज सेंटर बनाया। नोडल सेंटर के तहत विवि में ड्रोन से जुड़े शार्ट टर्म कोर्स व प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। खेती में बढ़ रहे तकनीक के प्रयोग से किसानों को अधिक लाभ होगा। 

वैज्ञानिकों ने ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं, जिसकी मदद से दवा का छिड़काव, फसलों की निगरानी, मिट्टी व पौधों की स्वास्थ्य रिपोर्ट आदि की जानकारी मोबाइल पर मिल सकती है। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार खेती में ड्रोन के उपयोग को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को केंद्र बनाया है। विवि से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किसान या युवाओं को सर्टिफिकेट दिया जाएगा, जिसके आधार पर वह अपने क्षेत्र में खेती में ड्रोन का प्रयोग कर सकेंगे। 

बिना मिट्टी 100 तरह के गुलाब उगा रहे यूपी के रोज मैन, ऐसे ले सकतें हैं ट्रेनिंग

आईआईटी संग विवि ने किया ट्रायल
सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि ने आईआईटी कानपुर संग ड्रोन से जुड़ी रिसर्च पर काम किया है। जिसका विवि के फॉर्म में सफल ट्रायल भी हुआ है। रिसर्च में विकसित ड्रोन से फसलों पर दवा का छिड़काव कम समय में व कम लागत में किया गया। ड्रोन सेंसर व आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से फसलों के सिर्फ उस क्षेत्र में दवा का छिड़काव करता है, जहां कीट लग होते हैं या लगने की संभावना होती है। मिट्टी की स्वास्थ्य रिपोर्ट से खाद या पोषकतत्वों का जरूरत के हिसाब से छिड़काव होता है।

कुलपति-सीएसए विश्वविद्यालय के डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती में ड्रोन की मदद को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए विवि को प्रदेश का पहला नॉलेज सेंटर बनाया गया है। विवि में जल्द प्रशिक्षण कोर्स संचालित किए जाएंगे। खेती में ड्रोन के प्रयोग के लिए यह सर्टिफिकेट अनिवार्य होगा। विवि जल्द ही खेती में ड्रोन से जुड़े शार्ट टर्म कोर्स भी तैयार कर रहा है, जिसके अगले सत्र से लागू किया जाएगा।