UP: Fake Blood donation group exposed in Basti - 500 रुपए देकर हर महीने निकालते थे खून, प्राइवेट अस्पतालों को करते थे सप्लाई, पुलिस ने दबोचा DA Image
13 दिसंबर, 2019|8:28|IST

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500 रुपए देकर हर महीने निकालते थे खून, प्राइवेट अस्पतालों को करते थे सप्लाई, पुलिस ने दबोचा

प्रतीकात्मक तस्वीर।

शहर में सोमवार को एक खूनचुसवा गिरोह पकड़ा गया। पुलिस ने इसके मास्टरमाइंड के रूप में एक नकली डॉक्टर और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया। शुरुआती पूछताछत में पता चला है कि यह गिरोह गरीब युवकों को 500 रुपये का लालच देकर हर माह उनके खून निकालता था। उन्हें लाने वालों को भी 500 रुपये कमीशन दिया जाता था। गिरोह निम्न गुणवत्ता वाले इस खून की सप्लाई शहर के दो और संतकबीरनगर के एक प्राइवेट अस्पताल को करता था। ये अस्पताल अपने यहां भर्ती मरीजों को यही खून चढ़ा उनसे मोटी रकम वसूलते थे। 

पुलिस ने न जाने किस हड़बड़ी में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस पर सवाल भी उठने लगे हैं कि उन्हें रिमांड पर लेकर विस्तार से पूछताछ और अस्पतालों पर छापेमारी क्यों नहीं की गई। मामला उछल जाने और लखनऊ से पूछताछ होने के बाद अब पुलिस दोनों को रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। एसपी ने कहा कि पुलिस, गिरोह की जड़ तक जाएगी। 

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दस साल पहले गोरखपुर शहर में भी एक खूनचुसवा गिरोह पकड़ा गया था। तब वह काफी चर्चित हुआ था। अब इस दूसरे गिरोह की बात सामने आने के बाद लोग चौंक पड़े हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मरीजों को निम्न गुणवत्ता का खून चढ़ाया गया होगा, कहीं वह उनकी सेहत से खिलवाड़ करने वाला न साबित हो।

लाल खून के काले कारोबार का खुलासा रविवार की देर रात काफी नाटकीय ढंग से हुआ। पुरानी बस्ती का प्रदीप (25) पुत्र दयाराम निवासी संजय कालोनी महुडर रेहरवा, मजदूरी करता है। रविवार की रात घर पर वह चक्कर खाकर गिर गया। परिजनों ने कड़ाई से पूछताछ की तो उसकी बात सुन कर सब सन्न रह गए। उसने बताया कि पांच सौ रुपए के बदले में वह छह महीने में छह-सात बार अपना खून निकलवा (बेच)चुका है। उसी की तरह उसके कई और साथी भी कई बार खून दे चुके हैं।

प्रदीप ने बताया कि महरीखांवा कोतवाली का रहने वाला डॉ प्रभाकर सिंह अपने सहयोगी आकाश के साथ मिलकर खून निकालता हैं। पुलिस ने सोमवार को भोर में छापा मार कर कोतवाली क्षेत्र के गंदे नाले के पास से डॉ. प्रभाकर और आकाश को गिरफ्तार कर लिया। पुलिसिया पूछताछ में पता चला कि प्रभाकर फार्मासिस्ट है लेकिन खुद को डॉक्टर बताता है। गोरखपुर शहर के एक नर्सिंग होम में वह तैनात था लेकिन गलत हरकतों के चलते छह माह पूर्व निकाला जा चुका है। उसी के बाद बस्ती आ कर उसने इस धंधे की शुरुआत की। 

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पुलिस के अनुसार प्रभाकर के संपर्क में सबसे पहले आकाश ही आया। 500-500 रुपए देकर कई दफा खून निकालने के बाद प्रभाकर ने आकाश को लालच दिया कि अगर अपने किसी दोस्त का खून निकलवाएगा तो उसे भी 500 रुपए कमीशन मिलेगा। बस यहीं से सिलसिला चल पड़ा। खून देने वालों की संख्या एक के बाद दो और दो के बाद तीन और फिर चर्चा के मुताबिक तीस-चालीस तक पहुंच गई। 

एसपी बस्ती दिलीप कुमार ने बताया, 'कुछ लोगों ने अवैध तरीके से खून निकालने का मुकदमा पुरानी बस्ती थाने में दर्ज कराया है। पुलिस तो अपने स्तर से मामले की जांच कर ही रही है। जिलाधिकारी  से भी जांच में विभिन्न विभागों से सहयोग कराने का अनुरोध किया गया है।’

प्रभाकर ने बताया कि खून निकालने के लिए सुई और ब्लड बैग वह जिला अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी को 500 रुपए देकर लेता था। एसओ पुरानी बस्ती सर्वेश राय के मुताबिक प्रभाकर के घर के पिछले हिस्से में एक तख्त मिला। उसी पर युवकों को लिटाकर खून निकाला जाता था। प्रभाकर ने बताया कि दीवार पर कील गाड़कर उसे आईवी स्टैंड के रुप में इस्तेमाल किया जाता था। खून निकालने के बाद शिकार को 500 रुपए और गाजर व कोई फल दिया जाता था। साथ ही प्रभाकर धमकाता था कि किसी को इस कारोबार की जानकारी दी तो जान से जाओगे। 

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