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यूपी में डेढ़ साल से लाखों मरीजों को बांट रहे घटिया दवा, जांच में इस बीमारी की दवा के सैंपल फेल

यूपी में डेढ़ साल से लाखों मरीजों में बीपी की घटिया दवा बांटी जा रही है। अब जांच में दवा घटिया मिली है। उत्तर प्रदेश में 10 लाख से अधिक टैबलेट की सप्लाई हुई है जो अलग-अलग शहरों में बांटने के लिए भेजी।

यूपी में डेढ़ साल से लाखों मरीजों को बांट रहे घटिया दवा, जांच में इस बीमारी की दवा के सैंपल फेल
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,बरेलीThu, 29 Feb 2024 07:03 AM
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यूपी के राजकीय अस्पतालों में डेढ़ साल से ब्लड प्रेशर और हृदयरोग के मरीजों को बांटी जा रही मेटोप्रोलोल टैबलेट -50 एमजी जांच में अधोमानक निकली। भदोही जिले में स्थानीय औषधि विभाग ने दवा का सैंपल जांच के लिए भेजा था जो लैब टेस्ट में फेल हो गया। यूपी मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन ने दवा के वितरण पर रोक लगाकर दवा वापस करने को कहा है। इसको लेकर एक पत्र गुणवत्ता नियंत्रक महाप्रबंधक ने प्रदेश के जनपदीय वेयर हाउस प्रभारियों को जारी किया है। 

मेटोप्रोलोल टैबलेट- 50 एमजी दवा की आपूर्ति रिलिफ बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने करीब दो साल पहले यूपी मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन को की थी। प्रदेश के सभी 75 जिलों को 10 लाख से अधिक टैबलेट सप्लाई की गई थी। बरेली को 20 हजार टैबलेट मिली थी। बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर और खीरी जिले में 10-10 हजार टैबलेट लखनऊ से सप्लाई की गई थी।

डेढ़ साल पहले आई दवा मरीजों को बांटी भी जा रही थी। बीते साल नवंबर में भदोही जिले में औषधि निरीक्षक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने मेटोप्रोलोल दवा का सैंपल जनपद के वेयर हाउस से लिया गया था। उसकी जांच मेरठ लैब में हुई। जांच रिपोर्ट में दवा अधोमानक निकली है।

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नवंबर में ही आ गई थी रिपोर्ट
मेरठ की लैब ने नवंबर माह में ही रिपोर्ट दे दी थी कि मेटोप्रोलोल टैबलेट-50 एमजी जांच में अधोमानक निकली है। इसके बाद भी दवा का वितरण जारी रहा। अब फरवरी माह में उप्र मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन ने सभी जिलों के ड्रग वेयर हाउस प्रभारी फार्मासिस्ट को पत्र भेजकर दवा बांटने पर रोक लगाई है। साथ ही बची हुई दवा वापस देने को कहा है। जनपदीय ड्रग वेयर हाउस प्रभारी ने जिला अस्पताल, सीएचसी प्रभारियों को पत्र लिखकर दवा वापस करने को कहा है।

जिला अस्पताल के दवा काउंटर पर सिर्फ 1 पत्ता
महाराणा प्रताप संयुक्त जिला चिकित्सालय में भी दवा मेटोप्रोलोल - 50 एमजी की सप्लाई आई थी। करीब डेढ़ साल से यह दवा डाक्टर लिख रहे थे और मरीजों को दी जा रही थी। अस्पताल में सिर्फ 1 पत्ता दवा ही बची है जिसे अलग कर दिया गया है। उसके वितरण पर रोक लगा दी गई है।

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