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Hindi News उत्तर प्रदेशवायरस और बैक्टीरिया का पता लगाने को गोल्ड चिप तैयार, 5 मिनट में हो रही पहचान

वायरस और बैक्टीरिया का पता लगाने को गोल्ड चिप तैयार, 5 मिनट में हो रही पहचान

आईवीआरआई बरेली के वैज्ञानिकों ने एक तकनीक से गोल्ड चिप तैयार की है जिससे 5 मिनट में वायरस की पहचान कर सकते हैं। गोल्ड चिप पर हर तरह के वायरस और बैक्टीरिया की बायोमार्कर प्रोटीन लगाकर टेस्ट करते हैं।

वायरस और बैक्टीरिया का पता लगाने को गोल्ड चिप तैयार, 5 मिनट में हो रही पहचान
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Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,बरेलीTue, 18 Jun 2024 01:36 PM
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पशु चिकित्सा के क्षेत्र में बीमारियों की त्वरित पहचान कर पशुओं के इलाज में आईवीआरआई, बरेली की बायो सेंसर तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है। इस तकनीक में एक छोटी गोल्ड चिप के इस्तेमाल से महज पांच से सात मिनट में ही यह आसानी से बता दिया जाता है कि पशु में किस वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण है।

भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण सिंह ने बताया कि कई मामलों में वायरस या बैक्टीरिया का संक्रमण बहुत तेजी से होता है तो कई मामलों में धीरे-धीरे असर दिखता है। इस स्थिति में एसपीआर बायोसेंसर तकनीक से किसी भी सैंपल का टेस्ट करके बहुत ही कम समय में यह बताया जा सकता है कि पशु किस वायरस या बैक्टीरिया के चपेट में है। इतना ही नहीं एसपीआर बायो सेंसर तकनीक से यह भी बताया जा सकता है कि पशु में वायरस का लोड (किस हद तक प्रभावित) कितना है। 

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जांच की इस आधुनिक प्रणाली में गोल्ड चिप की सबसे अहम भूमिका है। पशुओं की जांच के लिए संस्थान की प्रयोगशाला में लगभग हर वायरस और बैक्टीरिया की जांच के लिए गोल्ड चिप तैयार की गई है। डॉ. प्रवीण ने बताया कि एक बार किसी वायरस या बैक्टीरिया के लिए जब कोई गोल्ड चिप तैयार किया जाता है तो वह करीब एक साल तक प्रयोगशाला में टेस्ट के लिए कारगर रहता है। इस दौरान उसकी मदद से कई बार टेस्ट किया जा सकता है।

ऐसे काम करती है तकनीक
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण सिंह ने बताया कि पशुओं में लक्षण के आधार पर जब उसके सैंपल की जांच करनी होती है तो उससे पहले गोल्ड चिप तैयार किया जाता है। जैसे यदि कोई ब्रूसेल्ला या लंपी स्किन डिजिज का सैंपल आया तो प्रयोगशाला में गोल्ड चिप की सतह पर उस बीमारी से संबंधित मार्कर प्रोटीन लगा देते हैं। उसके बाद चिप को एक मशीन में डालकर उस पर सैंपल को डालते ही मशीन ऑप्टीकल इमेज के जरिए बता देती है कि वायरस है या नहीं। वायरस होने की स्थिति में मशीन उसकी मात्रा भी बता देती है।