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Hindustan Special: यूपी का एक ऐसा मंदिर जहां बिना मूर्ति होती है देवी की पूजा, ये है मान्यता

शक्ति स्वरूपा मां भगवती भक्त की आस्था और श्रद्धा देखकर बिजली के रूप में प्रकट हुईं। जाते हुए अपने चरणों के चिह्न छोड़ गईं। यहां मूर्ति नहीं, मां दुर्गा के छोड़े गए निशान की पूजा अर्चना की जाती है।

Hindustan Special: यूपी का एक ऐसा मंदिर जहां बिना मूर्ति होती है देवी की पूजा, ये है मान्यता
Srishti Kunjअविनाश त्रिपाठी,बलरामपुरThu, 30 Nov 2023 01:47 PM
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यूपी के बलरामपुर जनपद स्थित बिजलीपुर मंदिर एक श्रद्धेय तीर्थ स्थल है। अपनी शानदार वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाने वाला यह मंदिर दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित करता है, सांसारिक दुनिया से अलग एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है। मान्यता यह है कि तत्कालीन महाराजा हर शारदीय नवरात्रि में शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर में दर्शन को जाते थे। तुलसीपुर और बलरामपुर के मध्य राप्ती नदी पड़ती थी। एक बार की बात है कि शारदीय नवरात्रि के दौरा राप्ती नदी में बाढ़ आ गई। इसलिए महाराजा दर्शन करने नहीं जा सके। 

राप्ती नदी के तट पर बसे बिजलीपुर गांव में विशालकाय पीपल वृक्ष के नीचे महाराजा बैठ गए। उन्होंने प्रण किया कि जब तक उन्हें आदि शक्ति दर्शन नहीं देंगी तब तक वह अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे। पीपल वृक्ष के नीचे महाराजा बलरामपुर मुर्छित हो गए। इस दौरान आकाश में तेज गर्जना के साथ बिजली गिरी जिससे दो हिस्सों में बंट गया। 

जब महाराजा मुर्छित अवस्था से जागृत हुए तो उन्होंने देवी के पद चिन्हों का निशान देखा। जहां पर उन्होंने विशालकाय मंदिर का निर्माण कराया। यह मंदिर आज भी लोगों के आस्था का केन्द्र है। शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर जाने वाले श्रद्धालु वापस आने पर बिजलीपुर मंदिर का दर्शन जरूर करते हैं। कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में हुआ है। मंदिर को अपना नाम उस स्थान पर हुए बिजली के प्रहार से मिला। 

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देवी पाटन मंदिर से है संबंध 
इटियाथोक स्थित बाल विद्या मन्दिर इंटर कॉलेज के शिक्षक उदय नारायण तिवारी के अनुसार बलरामपुर से गोंडा और तुलसीपुर तक इस बिजलीपुर मंदिर से हजारों लोगों की आस्था जुड़ी है। मान्यता है कि देवी ने जब देखा कि तुलसीपुर देवीपाटन मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं केलिए बारिश के दौरान नदी बाधा बन रही है तो यहां दर्शन दिए। आज भी बहुत से लोग जो देवीपाटन मंदिर जाते हैं वे रास्ते में पड़ने वाले बिजलीपुर मंदिर में जरूर दर्शन करते हैं। 

जहां गिरी थी बिजली, वही शक्ति का केन्द्र 
मुख्य मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है अपितु जमीन में एक गहरा गड्ढा है जिसे कपड़े से ढंका गया है। इसके ऊपर देवी की प्रार्थना की जाती है जहां निरंतर एक दिव्य रहस्यमयी आभा दैदिप्यमान रहती है। भक्त मंदिर को एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र मानते हैं जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें दिव्य ऊर्जा है जो उनकी मनोकामनाओं को पूरा करने में सक्षम है। 

बेजोड़ है यहां की स्थापत्य कला 
यह मंदिर उत्तम नक्काशी के साथ लाल पत्थर से बना है, जिसके लिए राजस्थान से राजमिस्त्री नियुक्त किए गए थे। बिजलीपुर मंदिर लुभावनी वास्तुकला प्रस्तुत करता है जो विभिन्न शैलियों को जोड़ती है। विस्तृत नक्काशी मंदिर के बाहरी भाग को सुशोभित करती है, जिसमें पौराणिक कथाओं और खगोलीय प्राणियों के दृश्यों को दर्शाया गया है। मुख्य गर्भगृह, वास्तुकला की नागर शैली को प्रदर्शित करता है, जो इसके विशाल शिखर और जटिल विवरण की विशेषता है। धार्मिक उत्सवों के दौरान मंदिर जीवंत हो उठता है, भक्तों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है। भक्त प्रार्थना करने, भजन गाने और धार्मिक आयोजनों में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं। मंदिर परिसर आध्यात्मिक उत्साह से गुंजायमान रहता है और भक्त, भक्ति और एकता की भावना का अनुभव करते हैं। 

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