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अयोध्या राम मंदिर से सप्तर्षि मंदिर तक पहुंचने के लिए नया रास्ता बनाने पर मंथन

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने रामलला के दर्शनार्थियों को परिसर में निर्माणाधीन सप्तर्षि मंदिर के साथ कुबेर टीला में भी दर्शन कराने की योजना बनाई। इसके लिए नये रास्ते की तलाश जारी।

Srishti Kunj कमलाकान्त सुन्दरम, अयोध्याMon, 27 May 2024 06:34 AM
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अयोध्या राम मंदिर से सप्तर्षि मंदिर तक पहुंचने के लिए नया रास्ता बनाने पर मंथन

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने रामलला के दर्शनार्थियों को परिसर में निर्माणाधीन सप्तर्षि मंदिर (महर्षि अगस्त्य, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वाल्मीकि, माता शबरी, देवी अहिल्या व निषादराज) के मंदिरों के साथ उन्हें कुबेर टीला में भी दर्शन कराने की योजना बनाई है। इसके लिए नये रास्ते की तलाश हो रही है। भवन निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र कहते हैं कि दर्शनार्थियों को सप्त मंदिरों के कुबेर टीला पर बिना जूता-चप्पल पहने भेजना अन्याय करने जैसा होगा। 

ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि रामलला के दर्शनार्थियों को राम मंदिर से सीधे कुबेर टीला या सप्त मंदिरों की ओर कैसे भेजा जाए, क्योंकि जूते-चप्पल लेने के लिए दर्शनार्थियों को तो यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) तक लौटकर आना पड़ेगा। इसके बाद ही वह दूसरी ओर जा सकेंगे। तीर्थ क्षेत्र पीएफसी से कुबेर टीला के लिए नये रास्ते के विकल्प पर विचार विमर्श कर रहा है। भवन निर्माण समिति चेयरमैन मिश्र कहते हैं किसी भी निर्माण की सफलता तभी है जब लोग वहां जाएं और निर्माण कार्य को देखें, उसके उद्देश्य को समझें और इतिहास से परिचित हों और उससे प्रेरणा भी लें। 

इसी के चलते शनिवार को भवन निर्माण समिति चेयरमैन मिश्र ने पीएफसी के निरीक्षण के दौरान रास्ते के विकल्प पर निर्माण एजेंसी के अभियंताओं के साथ स्थलीय सत्यापन किया और सम्पूर्ण भू-भाग के नक्शे का भी अवलोकन किया था। इस विषय को बोर्ड आफ ट्रस्टीज के समक्ष प्रस्तुत कर होगा अंतिम निर्णय। श्रीरामजन्म भूमि परिसर के 70 प्रतिशत भू-भाग को हरियाली से आच्छादित करने का जिम्मा नेशनल रिसर्च बाटनिकल सेंटर लखनऊ व कृषि विभाग ने संभाला है। रिसर्च बाटनिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने शोध के जरिए रामायणकालीन 150 पौधों की प्रजातियों की पहचान कर उनकी नर्सरी तैयार करा रहे हैं। 

इसके साथ कुबेर टीला के चतुर्दिक भूदृश्य सौन्दर्य निखारने के लिए के लिए भी काम शुरू कर दिया है। कुबेर टीला काफी ऊंचाई पर स्थित है। इस टीले को स्तूप का आकार देकर भूमि की सतह से ऊपर जाने के लिए सर्किल में सड़क का निर्माण किया गया है। इस सड़क के दोनों तरफ रेलिंग लगाई गई है और अगल-बगल हरियाली को विस्तार दिया गया है। इस रास्ते से गुजरना श्रद्धालुओं के लिए एक सुखद अहसास होगा। इसके एहसास को कुबेर टीला के तस्वीरों से समझ सकते हैं। भवन-निर्माण समिति चेयरमैन मिश्र बताते हैं कि कुबेर टीला पर जटायु राज की मूर्ति की स्थापना हो चुकी है। इसके अलावा शिखर पर कुबेरेश्वर महादेव भी स्थापित है। निर्माण एजेंसी ने कुबेरेश्वर महादेव मंदिर का भी पुनर्निर्माण कराया है। यह निर्माण अगस्त माह तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद निर्माण एजेंसी तीर्थ क्षेत्र के सुपुर्दगी में दे देगी। 

चार जून के बाद यूपीआरएनएन कराएगा वीथिकाओं के निर्माण का टेंडर
भवन निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र का कहना है कि ऑडिटोरियम का कान्सेप्ट हम लोगों ने तैयार कर लिया है। उन्होंने बताया कि अब निर्माण शुरू करना है लेकिन चुनाव आचार संहिता के कारण टेण्डर का कार्य नहीं हो सका जिससे मामला फंस गया। बताया गया कि चार जून को मतगणना के बाद आदर्श आचार संहिता हट जाएगी तो फिर टेण्डर प्रक्रिया शुरू होगी। श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ने ऑडिटोरियम (प्रेक्षागृह) निर्माण के साथ संतों के लिए अतिथि गृह व तीर्थ क्षेत्र के कार्यालय का भी निर्माण प्रस्तावित है। इस सम्पूर्ण निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की लखनऊ इकाई को सौंपी गई है। निर्माण कार्य के टेण्डर भी यूपीआर एन की ओर से ही निकाला जाएगा।

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