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अयोध्या राम मंदिर के शिखर निर्माण के साथ होगी रामदरबार की प्रतिष्ठा, जानें कब

अयोध्या राम मंदिर के शिखर निर्माण के साथ रामदरबार की प्रतिष्ठा होगी। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामदरबार पर ध्यान केंद्रित है। दूसरे तल का निर्माण पूरा हो जाने के बाद ही शिखर का निर्माण होगा।

अयोध्या राम मंदिर के शिखर निर्माण के साथ होगी रामदरबार की प्रतिष्ठा, जानें कब
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,अयोध्याTue, 28 May 2024 07:54 AM
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राम मंदिर निर्माण समिति ने 2024 के दिसंबर तक मंदिर के निर्माण को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। भूतल व प्रथम तल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। दूसरे तल का निर्माण पूरा करने के बाद ही शिखर पर काम शुरू होगा। प्रथम तल पर रामदरबार की प्रतिष्ठा की जाएगी। इसके साथ ही शिखर की भी प्रतिष्ठा पूरी हो जाएगी। यह दिसंबर तक होना संभावित है। खास बात यह है कि सबसे ऊपर यानी दूसरे तल पर केवल विशेष अनुष्ठान आयोजित होंगे जो ट्रस्ट की अनुमति के बाद ही संभव हो पाएंगे। यहां सभी श्रद्धालुओं को जाने की अनुमति नहीं होगी क्योंकि यह अनुष्ठान का केंद्र होगा। 

रामलला के नवीन विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही राममंदिर में श्रद्धालुओं का दर्शन शुरू हो गया। इसकी वजह से कुछ दिन मंदिर निर्माण कार्य बाधित रहा लेकिन फरवरी के दूसरे पखवारे से निर्माण कार्य ने तेजी पकड़ ली है। अब दिसंबर के पहले द्वितीय तल शिखर मंदिर, परकोटा के सात मंदिर का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद के वर्ष में बाकी के 71 एकड़ में ऑडिटोरियम और ट्रस्ट के दफ्तर आदि कई निर्माण होंगे। कुल मिलाकर मंदिर का कार्य 2024 में पूरा हो जाएगा। प्रथम स्थल पर सभी भाइयों के साथ पूरा रामदरबार होगा। 

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रामदरबार के विग्रह का रेखाचित्र चित्रकार वासुदेव कामत बनाएंगे
राम मंदिर के प्रथम तल में राम दरबार के विग्रह का रेखाचित्र बनाने का जिम्मा पुणे, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध चित्रकार वासुदेव कामत को दिया गया है। चित्रकार कामत ने रामलला का भी रेखाचित्र तैयार किया था। वहीं परकोटा की परिधि में निर्माणाधीन छह मंदिरों में अलग-अलग जिन मूर्तियों का निर्माण प्रस्तावित है, उनका निर्माण किस शिला से किया जाएगा, यह अभी तय नहीं है। परकोटे में छह मंदिर में सूर्यदेव, भगवान शिव, गणपति, माता दुर्गा , हनुमान, अन्नपूर्णा का मंदिर बनना है। 

उधर श्रीरामजन्म भूमि परिसर में रामायण कालीन ऋषियों व अन्य पात्रों के साथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास महाराज की मूर्तियों का निर्माण मकराना के संगमरमर से कराने पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगस्त्य, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वाल्मीकि के अलावा माता शबरी, निषाद राज व देवी अहिल्या के भी मंदिर बनाए जाने हैं। इन मंदिरों के फाउण्डेशन का निर्माण शुरू हो चुका है।