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पुजारी ने बताया 32 साल पहले कैसे मंदिर से टेंट में पहुंचे राम लला, कैसे होती थी पूजा

यूपी अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने से साधू-संत अभिभूत हैं। राम लला के पुजारी ने बताया कि 32 साल पहले कैसे मंदिर से टेंट में राम लला पहुंचे। उन्होंने बताया कि कैसे पूजा होती थी।

पुजारी ने बताया 32 साल पहले कैसे मंदिर से टेंट में पहुंचे राम लला, कैसे होती थी पूजा
Srishti Kunjअनुराग शुक्ला,अयोध्याWed, 24 Jan 2024 10:30 AM
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संतोष तिवारी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि 6 दिसंबर 92 को ढांचा विध्वंस से पहले उन्हें 1 मार्च 1992 को सहायक पुजारी पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने 10 महीना तक ढांचे में रामलला की पूजा की। इसके बाद भगवान कारसेवकों द्वारा बनाए गए टेंट में विराजमान हुए। उन्हें धूप, बरसात और हवा से बचाते हुए पूजा की जाती रही। कुछ महीने बाद हाई कोर्ट के आदेश से टेंट लगा। तब तीन किलो के गैस सिलेंडर में भगवान को खिचड़ी खीर और दूध का भोग लगाया जाता था। कोई भंडारी और कोठारी नहीं था।

कभी-कभी दो पेड़े का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता था। इसके बाद समय का पहिया घूमा और भगवान के पक्ष में फैसला आया। 24 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह रामलला को टेंट से निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजमान कराया। प्राण प्रतिष्ठा से पहले (रात वाली) यानी 21 तारीख को उन्होंने श्रीरामलला की शयन आरती 10.30 बजे की। इसके बाद श्रीरामलला नवीन गर्भगृह में शयन के लिए विराजित किए।

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दर्शन के लिए पूरे देश से आए रामभक्त कश्मीर, उत्तराखंड, असोम, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, ओडिशा के श्रद्धालु रामनगरी में पहुंचे हैं। प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और स्पेशल डीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। तेलांगना के कोदंड राम मंदिर से रामलिंगेश्वर राव श्रीरामलला का दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। वह अपने साथ रामानुजाचार्य की पीतल की प्रतिमा लेकर आए थे। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा वे श्रीरामलला को समर्पित करेंगे। एक समय मुख्य प्रवेशद्वार पर भक्तों का रेला बेकाबू नजर आने लगा। जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हवा में लाठियां लहराने का काम किया।

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