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पाकिस्तान से रामलला दर्शन को पहुंचा जत्था, कहा- यही रामराज्य, सिंध में खौफ-पाबंदी यहां तो प्रभु के जयकारे

राम लला के दर्शन को पाकिस्तान से अयोध्या एक जत्था पहुंचा। वहां से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि सिंध में खौफ और पाबंदी ही है। अयोध्या में तो प्रभु के जयकारे हैं। हिन्दुस्तान के आबोहवा देख कहा यही रामराज्य।

पाकिस्तान से रामलला दर्शन को पहुंचा जत्था, कहा- यही रामराज्य, सिंध में खौफ-पाबंदी यहां तो प्रभु के जयकारे
Srishti Kunjस्वरमिल चंद्रा,अयोध्याFri, 03 May 2024 06:10 AM
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पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यकों के लिए माहौल ठीक नहीं है। वहां त्योहारों, धार्मिक आयोजनों पर जबरदस्त पाबंदियां हैं। हिन्दुस्तान में हर तरफ माहौल बेहद खुला-खुला है। कहीं कोई पाबंदी नहीं, हर तरफ प्रभु के जयकारे बेहतर एहसास दिला रहे हैं। देर रात तक सड़कों पर अपनी मन मर्जी के कपड़ों में आती जाती महिलाएं यह बताती हैं माहौल कितना खुशनुमा है। पाकिस्तान के 34 जिलों से अयोध्या आए सिंधी श्रद्धालुओं के जत्थे में से ज्यादातर का यही मानना है। गुरुवार की देर शाम अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए पहुंचे इन सिंधी श्रद्धालुओं को कुरेदने पर सब कुछ बयां किया। 

सिंध प्रांत के सांगण जिले के शेदातपुर निवासी नरेंद्र कुमार पहली बार हिन्दुस्तान आए हैं। कहा, जैसा सुना था वैसा पाया है। यहां हर तरफ अमन चैन है। लोग अपने जयकारे लगा रहे हैं । धार्मिक माहौल बेहद खुशनुमा है। हमारे सिंध में ऐसा नहीं है हम अपने त्योहार नहीं मना पाते है। मंदिर नहीं हैं। शिवरात्रि, जन्माष्टमी, बड़ा मंगल, रामनवमी पर हमें कुछ सामूहिक रूप से पर्व मनाने की इजाजत नहीं होती है। यहां तो बिल्कुल अलग माहौल है। मुझे लगता है रामराज्य ऐसा ही रहा होगा। अब राममंदिर बना है तो हम लोग यहां दर्शन के लिए आए हैं। 

सिंध के सक्खर जिले से आए व्यवसायी रवि कुमार खत्री कहते हैं कि अमृतसर, अमरावती, रायपुर, प्रयागराज और अब अयोध्या में माहौल बेहद खूबसूरत है। मंदिरों में आरती, जयकारे, शंख, घंटे की गूंज, हर तरफ पूजा, प्रसाद, झंडे ये सबकुछ वहां नहीं होता है हम केवल तय समय पर ही अपने स्थान पर जाकर पूजा पाठ कर सकते हैं। वहां  राममंदिर निर्माण के बारे में हम लोगों ने यू ट्यूब पर खूब देखा अब सभी यहां आना चाहते हैं। सिंध के ही जरवार से आए रमेश अपने रिश्तेदार से मिलकर भावुक हैं। कहते हैं कि यहां बार बार आने को जी करता है। यहां अच्छा लग रहा है। अमन चैन शांति आजादी ऐसी ही होनी चाहिए। रोकटोक बहुत है वहां अपने मन से कुछ नहीं कर सकते बेटियां सूर्य अस्त होने के बाद घर में ही होनी चाहिए। 

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शाम होने तक बेटी घर नहीं आती तो बढ़ जाती हैं धड़कनें
सिंध के ही पन्ने अकिल से आईं सोना बक्शानी कहती हैं कि महिलाओं के लिए हिन्दुस्तान में बेहतर माहौल है। मै यहां पहली बार आई हूं। वहां महिलाओं के लिए बेहद खराब माहौल है। बेटी यदि शाम को समय से घर नहीं पहुंचती तो हमारी धड़कनें तेज हो जाती हैं। लड़कियां यहां पढ़ रहीं हैं नौकरी कर रही हैं वहां केवल पैसे वालों के बच्चे ही उच्च शिक्षा ले पाते हैं वो भी विदेश भेजकर। नहीं तो किसी तरह से उसे पाल पोस कर बड़ा करिए और सुरक्षित विदा कर दीजिए इसी में भलाई है। 

छह बसों से पहुंचे अयोध्या 
उत्तर प्रदेश सिंधी युवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश ओमी ने बताया कि इस जत्थे में कराची, लाहौर,  घोटकी, हैदाराबाद के श्रद्धालु हैं। खास ये है कि इस जत्थे में सबसे अधिक पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सक्खर, सांगण, पैनो, बैजी, मैसरा, भैलारी, कंथकोट, पीतापिन, रेहणीकी, चिचड़ा आदि जिलों से हैं। पंद्रह दिन पहले ये सभी हिन्दुस्तान आए हैं। अमृतसर, अमरावती, रायपुर, प्रयागराज, अयोध्या व हरिद्वार में धार्मिक स्थलों अपने गुरुओं के यहां होते हुए सभी वापस पाकिस्तान जाएंगे। गुरुवार की देर शाम सभी अयोध्या के भरत की तपोस्थली भरतकुंड पहुंचकर माथा टेका। छह बसों में पहुंचे 250 श्रद्धालु शुक्रवार को दर्शन करेंगे। कुछ छोटे वाहनों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गुरुवार रात दर्शन किए।