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तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने पर रोक, 3.5 साल से त्रिशंकु बने हैं 979 टीचर

यूपी के 979 तदर्थ शिक्षक साढ़े तीन साल से त्रिशंकु बने हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने पर रोक लगा दी है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में इनकी नियुक्ति हुई थी।

तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने पर रोक, 3.5 साल से त्रिशंकु बने हैं 979 टीचर
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Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजSun, 07 Jan 2024 05:56 AM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के शासनादेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। तदर्थ शिक्षकों की ओर से दाखिल याचिकाओं में उनकी सेवा समाप्त करने के नौ नवंबर 2023 के शासनादेश को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में अंतरिम आदेश में यह भी स्पष्ट किया है की यह आदेश केवल उन्हीं तदर्थ शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी नियुक्तियां सेकंड रिमूवल ऑफ डिफिकल्टी ऑर्डर एवं धारा 18 तथा यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा आयोग रूल्स 1995 के नियम 15 के तहत हुई हो।

हाईकोर्ट ने यह आदेश विनोद कुमार श्रीवास्तव व कई अन्य की याचिकाओं पर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अंतरिम आदेश का लाभ उन्हीं तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा जो धारा 33 बी, सी, जी के तहत विनीयमितीकरण के हकदार होंगे। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त तदर्थ शिक्षकों ने याचिकाएं दाखिल कर प्रदेश सरकार द्वारा नौ नवंबर 2023 के शासनादेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी है। सरकार ने इस शासनादेश से प्रदेश तदर्थ शिक्षकों को जो धारा 33 जी के तहत विनीयमितीकरण के हकदार नहीं है, उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया है।

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साढ़े तीन साल से त्रिशंकु बने हैं 979 तदर्थ शिक्षक
सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सात अगस्त 1993 से 30 दिसंबर 2000 तक नियुक्त 979 तदर्थ शिक्षक साढ़े तीन साल से त्रिशंकु बने हुए हैं। संजय सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 26 अगस्त 2020 के आदेश पर इन शिक्षकों को नौ नवंबर 2023 को बाहर कर दिया गया था जिसके खिलाफ 2000 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों की याचिका पर हाईकोर्ट ने फिलहाल उनकी सेवाएं समाप्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है। 

इस पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों से तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के निस्तारण की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इन शिक्षकों का तर्क है कि संजय सिंह के आदेश पर वर्ष 2000 के बाद नियुक्त शिक्षकों को तो प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में मौका दिया गया था। लेकिन साल 2000 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अवसर नहीं मिला था। बिना मौका दिए सभी को बाहर का रास्ता दिखाना उचित नहीं है। सूत्रों के अनुसार सभी तदर्थ शिक्षकों को निश्चित मानदेय पर समायोजित करने की तैयारी चल रही है।

प्रबंधक और डीआईओएस देंगे प्रमाणपत्र
पांच जनवरी के आदेश के अनुसार जेडी दो दिन के अंदर जिला विद्यालय निरीक्षकों को कार्यवाही के निर्देश देंगे। डीआईओएस दो दिन के अंदर संस्था प्रबन्धक को कार्यवाही के निर्देश देंगे। संस्था प्रबन्धतंत्र एक सप्ताह के अंदर पत्रावली डीआईओएस कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। डीआईओएस तीन दिन में पत्रावली जेडी को उपलब्ध कराएंगे, जिसके सात दिन के अंदर मंडलीय समिति की बैठक कर सभी मामलों का निस्तारण करते हुए निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जानी है। संबंधित जेडी प्रबन्धक एवं डीआईओएस का प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध कराएंगे कि कोई भी प्रकरण निस्तारण के लिए शेष नहीं है। अन्यथा की स्थिति में संयुक्त शिक्षा निदेशक उत्तरदायी होंगे।