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मंदिर में विराजे राम यही थी अंतिम इच्छा, पूरी होते ही त्यागे प्राण; अयोध्या आंदोलन से ऐसे जुड़ा है नाता

अलीगढ़ में एक नेता की अंतिम इच्छा थी कि राम लला मंदिर में विराजें। अंतिम इच्छा पूरी होते ही अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के 24 घंटे बाद ही उन्होंने प्राण त्याग दिए। पढ़ें पूरा किस्सा।

मंदिर में विराजे राम यही थी अंतिम इच्छा, पूरी होते ही त्यागे प्राण; अयोध्या आंदोलन से ऐसे जुड़ा है नाता
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,अलीगढ़Thu, 25 Jan 2024 09:14 AM
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कहते हैं कि जुबां पर आई बात कभी सच भी हो जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ अलीगढ़ के नेता व पूर्व विधायक पुत्र सत्यप्रकाश नवमान सत्तो के साथ। बुधवार शाम उनका निधन हो गया। 22 जनवरी से पूर्व ही उन्होंने कहा था कि आंखों के सामने रामलला अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में विराजेंगे, बस अब तो प्रभु से यही अंतिम इच्छा है। इसी अंतिम इच्छा पूरी होने के 24 घंटे बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

सराय रतनलाल स्थित आवास पर ही बुधवार सत्तो नवमान का निधन हुआ। परिवार में पत्नी मीना वार्ष्णेय, बेटा अमित, रोहित, बेटी पल्लवी व करूणा नवमान हैं। निधन की सूचना मिलते ही तमाम जनप्रतिनिधि, भाजपा, संघ सहित तमाम संगठनों के पदाधिकारी अंतिम दर्शन को आवास पर पहुंचने शुरू हो गए। रात्रि में महेन्द्र नगर स्थित कालीदह मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

परिजनों के अनुसार राम मंदिर आंदोलन में नवमान परिवार के 15 लोग जेल गए थे। 1990 में जिस समय सत्तो नवमान वैशाली एक्सप्रेस से अयोध्या जा रहे थे तो पुलिस ने ट्रेन से खींच बाहर निकाल जमकर लाठियां बरसाईं थीं। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों शहर विधायक मुक्ता राजा, कोल विधायक अनिल पाराशर, डा. पूजा शगुन पांडेय, अर्जुन देव वार्ष्णेय, ब्रजेश कंटक आदि शामिल हुए।

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बेहोशी की हालत में भी बोला था जय श्रीराम
कारसेवक अर्जुन देव वार्ष्णेय ने बताया कि पुलिस उत्पीड़न का शिकार जितना जितना सत्तो नवमान व पूरा परिवार 1990 के आंदोलन में हुआ था, शायद ही कोई हुआ हो। परिवार के अन्य सदस्य बाहर रहते हुए राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। प्रभु राम का नाम लेना कभी नहीं छोड़ा था। 

एक बार तो सत्तोजी पर इतनी लाठियां पुलिस ने मारी थीं, कि वह बेहोश हो गए थे। बीते दिनों पत्रकारों से बातचीत में स्वयं सत्तो नवमान ने कहा था कि लाठियां का दर्द पूरे शरीर में उभरता है तो हालत खराब हो जाती है। पांव से खड़ा नहीं हो पाता हूं, मगर 22 जनवरी को याद करके पूरा दर्द मैं भूल जाता हूं। मेरे रामलला विराजमान होंगे, इससे बड़ी मेरे जीवन में कोई खुशी नहीं हो सकती।

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