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यूपी के इस शहर में डकैती, लूट और अपहरण घटे, बढ़ गईं हत्याएं, वारदात बढ़ने की ये वजह

यूपी के आगरा में पुलिस कमिश्नरेट बने एक साल पूरा हो गया। पुलिस की सख्ती से डकैती, लूट और अपहरण घटे हैं। हालांकि कई इलाकों में हत्याएं बढ़ गई हैं। पुलिस ने बताया कि वारदात बढ़ने की ये वजह क्या है।

यूपी के इस शहर में डकैती, लूट और अपहरण घटे, बढ़ गईं हत्याएं, वारदात बढ़ने की ये वजह
Srishti Kunjविशाल शर्मा,आगराSun, 26 Nov 2023 10:35 AM
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आगरा को पुलिस कमिश्नरेट बने रविवार को पूरा एक साल हो जाएगा। इस एक साल में पुलिस की सख्ती और सक्रियता के चलते लूट, डकैती, फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं का ग्राफ गिरा। वाहन चोरी कम हुई। इसके विपरीत हत्या का ग्राफ बढ़ गया। घरों में चोरी की घटनाओं में इजाफा हुआ। इसके पीछे क्या वजह यही। आपके अखबार हिन्दुस्तान ने पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह से यह जानने का प्रयास किया।

25 नवंबर 2022 को आगरा, कानपुर और गाजियाबाद को पुलिस कमिश्नरेट बनाने की घोषणा हुई थी। पहले पुलिस कमिश्नर के रूप में डॉ. प्रीतिंदर सिंह को आगरा में नियुक्त किया गया था। आगरा उनके लिए कोई नया जिला नहीं था। वर्ष 2017 में उन्होंने आगरा में विधानसभा चुनाव कराया था। वह बतौर एसएसपी रहे थे। वर्तमान में पुलिस कमिश्नर हैं।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि कमिश्नरेट बनने के बाद क्या बदलाव आया जनता के सामने है। हाल ही में दीपावली का त्योहार बीत कर चुका है। दीपोत्सव में पुलिस की सक्रियता के चलते कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। दशहरा वाले दिन एक लूट की घटना हुई थी। उसका भी 48 घंटे के अंदर खुलासा कर दिया गया था। वर्ष 2022 में दीपोत्सव के दौरान तीन वारदातें हुई थीं। वर्ष 2023 में एक भी वारदात नहीं हुई। देर रात तक बाजार खुले।

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पुलिस आयुक्त ने बताया कि कमिश्नरेट बनने से पहले और बाद के अपराध के आंकड़ों की समीक्षा की जाए तो अंतर सामने आएगा। आगरा में लूट, डकैती, फिरौती के लिए अपहरण की घटनाओं में कमी आई है। कमिश्नरेट बनने के बाद आगरा में लूट की जो भी वारदात हुई पुलिस ने उसका खुलासा किया। शत प्रतिशत तक बरामदगी हुई। 50 से अधिक पेशेवर बदमाशों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई। संपत्ति जब्तीकरण तक की कार्रवाई हुई। एक समय था जब आगरा में कार चुराने के लिए बदमाश कार से आया करते थे। वाहन चोरी का ग्राफ गिरा है।

हत्या की वारदातें बढ़ने की वजह
एक जनवरी 2023 से 25 नवंबर 2023 के बीच आगरा कमिश्नरेट में हत्या की 82 घटनाएं हुईं। पिछले साल कमिश्नरेट बनने से पहले 70 घटनाएं हुई थीं। पुलिस ने एक-एक वारदात में बारीकी से जांच की। पुलिस ने पाया कि हत्या की ज्यादातर वारदातों को आस-पास वाले और अपनों ने अंजाम दिया। खून के रिश्ते दरके हैं। दोस्तों ने दगा दिया है। इस वजह से हत्या की घटनाएं बढ़ी हैं। ये हत्याएं पेशेवर बदमाशों ने नहीं की हैं। अपनों ने ही अपनों के खून से हाथ रंगे हैं। किसी मामले में पति ने पत्नी को मारा है तो किसी में दोस्त ने दोस्त की जान ली है। ऐसी घटनाएं भी हुई हैं जिसमें पत्नी ने पति की हत्या कराई है।

पांच दिक्कतें जो सामने
- पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह का कहना है कि यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं हो सका है। गाड़ियों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
- वेंडिंग जोन नहीं हैं। दोनों तरफ की सड़क व्यापारियों के वाहनों से घिर जाती है। पुलिस ठेल वालों को हटाती है तो वे परेशान हो जाते हैं। ये कहां जाएं।
- फोर्स की कमी है। कमिश्नरेट बनने के बाद संसाधन भी अभी पूरे नहीं है। पुलिस के लिए आवास व कार्यालय की कमी है।
- हजारों की संख्या में वाहनों का निस्तारण नहीं हुआ है। थानों में वाहनों का अंबार लगा हुआ है।
- साइबर अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। प्रत्येक पुलिस कर्मी को साइबर क्राइम की ट्रेनिंग की जरूरत है।

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