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सजा का समय हुआ पूरा फिर भी अब तक जेल में कैद, इस कारण बंदी भुगत रहे अतिरिक्त सजा

आगरा में कई कैदी हैं जो जिला और सेंट्रल जेल में सजा पूरी कर लेने के बाद भी अतिरिक्त सजा काट रहे हैं। जिला जेल में सात और सेंट्रल जेल में आठ बंदियों के परिजनों को रुपये जमा करने हैं।

सजा का समय हुआ पूरा फिर भी अब तक जेल में कैद, इस कारण बंदी भुगत रहे अतिरिक्त सजा
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,आगराWed, 06 Dec 2023 09:10 AM
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अपराध किया। सजा हुई। जेल गए। सजा की अवधि भी काट ली, लेकिन अर्थदंड जमा नहीं कर पाए। ऐसे में सजा और बढ़ गई। ये अर्थदंड भी ज्यादा नहीं है। बस परिवारीजनों के पास देने को नहीं है। नतीजतन आगरा में जिला और सेंट्रल जेल में सजा पूरी कर लेने के बाद भी उन्हें अतिरिक्त सजा काटनी पड़ रही है। जिला जेल में सात बंदी 189000 रुपये और सेंट्रल जेल में आठ बंदियों के परिजनों को लगभग 35 लाख रुपये जमा करने हैं। ऐसा होने पर वह जेल की सीखचों से बाहर हो सकते हैं।

जिला जेल में थाना कैलारस जिला मुरैना के सजायाफ्ता बंदी ने अपनी सजा की अवधि पूरी कर ली,लेकिन 50 हजार रुपये का अर्थदंड न दे पाने पर एक माह 20 दिन के लिए सजा बढ़ गई है। थाना घाटी गांव ग्वालियर के एक बंदी ने तीन मामलों में सजा की अवधि पूरी की, लेकिन 3300 रुपये का अर्थदंड न दे पाने पर 30 दिन की सजा और बढ़ गई। थाना शाहगंज के बंदी को 10 हजार रुपये बतौर अर्थदंड देने हैं, लेकिन न दे पाने पर 30 दिन की सजा और बढ़ गई।

शाहगंज के ही एक बंदी पर 47000 का अर्थदंड है। न देने पर दो माह की सजा बढ़ गई। एमएम गेट के बंदी पर 41 हजार का अर्थंदंड लगा, लेकिन जमा न कर पाने पर एक माह 20 दिन की और सजा काटनी पड़ रही है। शाहगंज के ही एक बंदी ने सजा पूरी कर ली, लेकिन आठ हजार रुपये का अर्थदंड जमा न कर पाने पर 15 दिन की सजा और बढ़ गई।

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सेंट्रल जेल, वरिष्ठ अधीक्षक, ओपी कटियार ने कहा कि सेंट्रल जेल में 28 बंदी ऐसे हैं जिनकी सजा के विरुद्ध कोर्ट से अपील पर जमानत हो चुकी है, लेकिन जमानतियों का इंतजाम न होने की वजह से अभी तक उनकी रिहाई नहीं हो सकी है। जिला जेल अधीक्षक, हरिओम शर्मा ने बताया कि जिन बंदियों द्वारा सजा की अवधि पूरी कर ली जाती है और वह अर्थदंड की छोटी सी राशि नहीं जमा कर पाते हैं तो कई सामाजिक संगठन ये राशि जमा करा देते हैं। यदि किसी संगठन ने ये राशि जमा कर दी तो बंदियो द्वारा उनकी सजा पूरी कर लिए जाने पर उनकी रिहाई की जा सकती है।

500 न दे पाने पर तीन माह सजा बढ़ी
सेंट्रल जेल के एक बंदी ने सजा की अवधि पूरी कर ली, लेकिन 500 रुपये का अर्थदंड न दे पाने पर उसे तीन माह की सजा अतिरिक्त काटनी पड़ रही है। ये बंदी लादूखेड़ा थाना सैंया का है। ईदगाह कुतलूपुर के बंदी ने सजा पूरी कर ली, लेकिन 25 हजार न दे पाने पर 10 माह और जेल में काटने पड़ेंगे। थाना डिबाई बुलंदशहर के बंदी को 50 हजार रुपये अर्थदंड देना है। न दे पाने पर 10 माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। थाना मंसूरी देहरादून के बंदी को एक लाख न दे पाने पर एक वर्ष, हिंगोली महाराष्ट्र के बंदी को एक लाख न दे पाने पर एक वर्ष, थशना एकलेरा झालावाड़ राजस्थान के बंदी को दो लाख न दे पाने पर दो वर्ष, थाना हरदुआगंज मैनपुरी के बंदी को 55500 न दे पाने पर एक वर्ष चार माह और थाना गांधी नगर अलीगढ़ के बंदी को 30 लाख का अर्थदंड न दे पानी पाने पर छह वर्ष का अतिरिक्त कारावास भोगना पड़ रहा है।

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