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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशहस्तशिल्पियों के लिए मार्केट कनेक्ट व लीडरशिप की जरूरत: पीयूष गोयल

हस्तशिल्पियों के लिए मार्केट कनेक्ट व लीडरशिप की जरूरत: पीयूष गोयल

लखनऊ। विशेष संवाददाताDinesh Rathour
Sun, 14 Nov 2021 07:41 PM
हस्तशिल्पियों के लिए मार्केट कनेक्ट व लीडरशिप की जरूरत: पीयूष गोयल

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि यूपी में फिर योगी आदित्यनाथ सरकार चलाएं ताकि अगले पांच वर्षों में 'एक जिला एक उत्पाद' जैसी सफल योजनाओं की ही तरह अन्य योजनाओं व कार्यक्रमों से इस प्रदेश से निर्यात और बढ़े, कारीगरों और हस्तशिल्पियों का और ज्यादा आर्थिक विकास हो। उन्होंने कहा कि  हस्तशिल्पियों के लिए मार्केट कनेक्ट व लीडरशिप की जरूरत है।

रविवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हस्तशिल्पियों, कारीगरों के उत्साह वर्धन के लिए आयोजित कार्यक्रम में पीयूष गोयल ने कहा कि कारीगरों और बाजार को आपस में जोड़ने के लिए और प्रयास किये जाने चाहिए। स्वयंसेवी संस्थाएं और कार्यकर्ता आगे आएं, इस मामले में नए सुझाव केन्द्र सरकार को भेजे जाएं। उन्होंने कहा कि यूपी में मोदी और योगी की सरकारों ने विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिये कारीगरों, हस्तशिल्पियों को काफी प्रोत्साहन मिला है और 'एक जिला एक उत्पाद' योजना का सबसे बेहतर क्रियान्वयन उत्तर प्रदेश में ही हुआ है।

इस अवसर पर केन्द्रीय राज्य मंत्री व मोहनलालगंज के सांसद कौशल किशोर ने कहा कि हस्तशिल्पियों और कारीगरों को उनकी कला और मेहताना का समुचित प्रतिफल नहीं मिलता है और बिचौलियां ज्यादा लाभ उठाते हैं। यही वजह है कि प्रदेश में चिकन कारीगरों की तादाद लगातार कम होती जा रही है। ऐसे कारीगरों और हस्तशिल्पियों को चाहिए कि वह केन्द्र व राज्य की सरकारों द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों व योजनाओं का समुचित लाभ उठाएं।

कार्यक्रम में अम्बा गौतम, पूजा गौतम, ममता रावत, प्रियंका, गुड़िया, पुष्पा देवी, श्रीमती नीलम, रवि, किरन शिल्पकार व शालिनी शिल्पकार को टूलकिट वितरित किए गए। शामिल हैं। इसी क्रम में आधार कार्ड से जुड़े हुए पहचान कार्ड विभा गौतम, कामिनी गौतम, सुधा व शालिनी देवी को वितरित किये गये। कई निर्यातकों, हस्तशिल्पियों और इनके बीच कार्य कर रही संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं से केन्द्रीय मंत्री को अवगत करवाया और कई निर्यातकों ने सुझाव भी दिये। शिक्षण संस्थाओं में बालिकाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देने के लिए फंडिंग की जरूरत भी जतायी गयी।
 

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