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Hindi News उत्तर प्रदेशपीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी लड़ेंगी चुनाव, हिन्दू महासभा ने बनाया प्रत्याशी

पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी लड़ेंगी चुनाव, हिन्दू महासभा ने बनाया प्रत्याशी

वाराणसी लोकसभी सीट से किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी भी मैदान में होंगी। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने हिमांगी को वाराणसी से प्रत्याशी घोषित किया है। इसके अलावा बीस सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान हुआ।

पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी लड़ेंगी चुनाव, हिन्दू महासभा ने बनाया प्रत्याशी
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीMon, 08 Apr 2024 04:30 PM
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वाराणसी लोकसभी सीट से किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी भी मैदान में होंगी। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा ने हिमांगी को वाराणसी से प्रत्याशी घोषित किया है। हिंदू भारत महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ऋषि कुमार त्रिवेदी ने 20 लोकसभा सीटों के लिए लिस्ट जारी की है। इसमें वाराणसी से देश की पहली किन्नर महामंडलेश्वर हिमांगी सखी को टिकट दिया गया है। हिमांगी किन्नरों के लिए समान अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। वह पांच भाषाओं में भागवत कथा सुनाती हैं। 12 अप्रैल से वह वाराणसी में अपना चुनाव प्रचार भी शुरू करेंगी। वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। वाराणसी में अंतिम चरण में एक जून 2024 को वोट डाले जाएंगे। हिन्दू महासभा ने वाराणसी के साथ ही 20 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान किया है। 

वाराणसी से प्रत्याशी हिमांगी सखी ने बताया कि किन्नर समाज को उनका अधिकार व सम्मान दिलाने के लिए वह चुनावी मैदान में उतरी हैं। प्रधानमंत्री का ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ नारा अच्छा है लेकिन ‘किन्नर बचाओ-किन्नर पढ़ाओ’ की आवश्यकता नहीं समझी गई। उनकी मांग है कि किन्नर समाज को भी नौकरियों व लोकसभा, विधानसभा व पंचायत चुनावों में सीटें आरक्षित की जाएं ताकि उनका भी प्रतिनिधित्व सदन में हो सके और उनकी समस्याओं और मांगों पर विचार किया जा सके।

महामंडलेश्वर हिमांगी सखी के पिता भी गुजरात के ही रहने वाले और मां पंजाबी थीं। इनका बचपन महाराष्ट्र में बीता। कई स्थानों पर आने-जाने की वजह से इन्होंने बहुत पहले ही पांच भाषाओं पर कमांड कर लिया। हिमांगी सखी पांच भाषाओं हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी, गुजराती और मराठी में भागवत कथा सुनाती हैं। 
 उनका यह मानना है कि भागवत हर किसी को सुननी और समझनी चाहिए। हिमांगी के अनुसार भागवत सुनने की प्रक्रिया में भाषा बाधा न हो इसलिए वह श्रोताओं को उनकी भाषा में भागवत कथा सुनाती हैं। हिमांगी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। उनके फैन और फॉलोवर्स की काफी संख्या है। 

माता-पिता का निधन होने के बाद बहन की शादी हो गई। इसके बाद हिमांगी वृंदावन पहुंचीं और वहां जाकर शास्त्रों का अध्ययन शुरू कर दिया। फिर गुरू के आदेश पर वे धर्म प्रचार के लिए वापस मुंबई लौटीं। मुंबई मायानगरी है तो यहां हिमांगी सखी ने फिल्मों में काम करने का भी प्रयास किया। कई रोल किए लेकिन मन नहीं रमा तो वापस धर्म प्रचार के काम में जुट गईं। वहीं से भागवत कथा सुनाने का सिलसिला चालू हुआ।

अब तक वह बैंकाक, सिंगापुर, मारीशस, मुंबई, पटना आदि जगहों पर 50 से अधिक भागवत कथाएं कर चुकी हैं। देश-विदेश में पूरे वर्ष उनका कार्यक्रम रहता है। हिमांगी सखी को महामंडलेश्वर की उपाधि पशुपतिनाथ पीठ अखाड़े से मिली है। यह अखाड़ा नेपाल में है। वर्ष 2019 में प्रयागराज में हुए कुंभ में नेपाल के गोदावरी धाम स्थित आदिशंकर कैलाश पीठ के आचार्य महामंडलेश्वर गौरीशंकर महाराज ने उन्हें पशुपतिनाथ पीठ की तरफ से महामंडलेश्वर की उपाधि दी।
 
इन 20 प्रत्याशियों का  ऐलान
वाराणसी से महामंडलेश्वर किन्नर हिमांगी सखी
सीतापुर से ऋषि कुमार त्रिवेदी
लखनऊ से अश्वनी कुमार श्रीवास्तव।
देवरिया से अशोक श्रीवास्तव
बागपत से पूजा जी
मिर्जापुर से मृत्युंजय सिंह भूमिहार
संत कबीर नगर से रमाकांत पांडे
गोंडा ऋषभ श्रीवास्तव
सलेमपुर से महामंडलेश्वर आनंद स्वरूप जी महाराज
बलिया से राजू प्रकाश श्रीवास्तव
गाजियाबाद से सचिन पुराण चौधरी
गौतम बुद्ध नगर से रणवीर चौधरी
फतेहपुर से कांता प्रसाद द्विवेदी
उन्नाव से उमेश बाजपेई
गोरखपुर से सुधांशु सिंह श्रीवास्तव 60
डुमरियागंज से दिवाकर विक्रम सिंह
बांदा चित्रकूट नवीन कुमार उपाध्याय
प्रयागराज से संजय श्रीवास्तव
आगरा से अनिकेत अग्रवाल
आजमगढ़ से पूनम चौबे