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10 अगस्त, 2020|5:48|IST

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यूपी : नदी उफनाने पर रेलवे पुल से पहले खड़ी हो जाएंगी ट्रेनें

railway track over river

बारिश में नदियों का पानी रेलवे पुल पर भरने से होने वाली दुर्घटनाएं अब टाली जा सकेंगी। रेलवे ने प्रयागराज मंडल के 10 प्रमुख नदियों के पुलों पर वाटर लेवल मॉनीटरिंग सिस्टम लगाया है। इसकी इंटेलीजेंस फील्ड डिवाइस 5-5 मिनट के अंतराल पर जलस्तर की रिपोर्ट देगी।

रेलवे अफसरों ने बताया कि नदियों के ओवरफ्लो होने पर पानी ट्रैक पर भरता है तो तत्काल मॉनीटरिंग सिस्टम से सिग्नल रेड हो जाएगा। इससे उस ट्रैक से निकलने वाली ट्रेन पहले ही रुक जाएगी।

इन पुलों पर लगा सिस्टम
कानपुर में गंगा पुल, प्रयागराज मंडल के यमुना, टोंस और सोन नदी के पुल, आगरा मंडल में यमुना पुल, झांसी मंडल के चंबल, यमुना कालपी, बागिन, यमुना साउथ बैंक और बेतवा नदी के 2 पुल।

इस तरह सिस्टम काम करेगा
जलस्तर मापने का उपकरण (डब्ल्यूएलएमआई) निरंतर अल्ट्रासोनिक तरंगें भेजता है, जो नदी के पानी के ऊपर से लौटती हैं। अल्ट्रासोनिक तरंगों को उपकरण तक वापस आने में लगने वाले समय से जल स्तर की सटीक जानकारी होती। उपकरण इसकी तुलना पूर्व निर्धारित संदर्भित पानी के खतरे के स्तर से करता है। इसके बाद इंटेलीजेंट फील्ड डिवाइस (आईएफडी) के साथ जल स्तर मापने वाला उपकरण संचार करता है। इसके बाद हर पुल के जलस्तर का डाटा केंद्रीय सर्वर तक पहुंचता है। इसमें हर 5 मिनट में जल स्तर की रिकार्डिंग होती है। इसके जरिए ट्रेन संचालन तय होगा। नदियों का पानी ट्रैक के लिए खतरे के निशान से जैसे ही ऊपर जाएगा, वैसे ही सिग्नल रेड हो जाएगा और ट्रेन पुल के पहले खड़ी हो जाएगी।    

ब्रिज वाटर लेवल सिस्टम लगने से बारिश में पुलों पर ट्रेन संचालन पूरी तरह से सुरक्षित होगा। चालक को पहले से पता होगा कि पुल के ट्रैक पर कितना पानी है। इससे तय कर सकेगा कि किस गति से ट्रेन निकालनी है या फिर रोकनी है। - अमित मालवीय, पीआरओ, एनसीआर

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  • Web Title:Trains will be stop before the railway bridge when river water rise