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पूरब में जाति के जोर से निपटने को BJP ने उतारी क्षत्रपों की फौज, 27 सीटों के लिए लगाया एड़ी-चोटी का जोर

बीजेपी ने चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी एक ओर मोदी-योगी के डबल इंजन से पूर्वांचल को गर्माने में जुट गई है। वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्यों के इंजन भी इसमें जोड़ दिए गए हैं।

पूरब में जाति के जोर से निपटने को BJP ने उतारी क्षत्रपों की फौज, 27 सीटों के लिए लगाया एड़ी-चोटी का जोर
Ajay Singhविशेष संवाददाता,लखनऊSat, 25 May 2024 05:19 AM
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Lok Sabha Election 2024: पूरब में जाति के जोर से निपटने को भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी एक ओर मोदी-योगी के डबल इंजन से पूर्वांचल को गर्माने में जुट गई है। वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्यों के इंजन भी इसमें जोड़ दिए गए हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई गई है। पूरा जोर सोशल इंजीनियरिंग पर है। भाजपा ने सामाजिक समीकरण साधने को जातीय क्षत्रपों की लंबी-चौड़ी फौज उतार दी है।

पश्चिम और मध्य यूपी से होते हुए चुनावी एक्सप्रेस अब पूर्वांचल में दौड़ रही है। 25 मई को छठे चरण में शामिल 14 सीटों पर मतदान होना है। यह सीटें भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दरअसल, 2019 के चुनाव में इनमें से पांच सीटों आजमगढ़, श्रावस्ती, अंबेडकरनगर, जौनपुर और लालगंज में भगवा खेमे को हार का सामना करना पड़ा था। इसी चरण में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, हरीश द्विवेदी, जगदंबिका पाल के भाग्य का फैसला होना है। साथ ही अंबेडकर नगर, श्रावस्ती, फूलपुर, जौनपुर और भदोही में किए गए नए प्रयोगों का इम्तिहान भी है। इन सीटों पर पार्टी ने प्रत्याशी बदले हैं।

27 सीटों के लिए लगाया एड़ी-चोटी का जोर
यूं तो जाति है कि जाती नहीं, वाली कहावत पूरे प्रदेश पर लागू होती है। मगर पूरब में इसका जोर कुछ ज्यादा ही है। हालांकि 2014 और 2019 में मोदी लहर में तमाम जातीय बंधे बह गए थे। मगर इस बार हालात थोड़े जुदा हैं। ऐसे में भाजपा ने पूरब की 27 सीटों को साधने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। पार्टी एक दिन में रैलियां, कार्यक्रम, बैठकें मिलाकर 100 से अधिक चुनावी आयोजन कर रही है। प्रधानमंत्री ने जहां एक दिन में दो से तीन रैलियां और कार्यक्रम किए हैं।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दिन में आधा दर्जन तक सभाएं कर विकास, राष्ट्रवाद और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर विपक्ष को घेर रहे हैं। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के प्रभाव का इस्तेमाल भी पार्टी विभिन्न सीटों पर कर रही है। यादव पट्टी को प्रभावित करने को मध्य प्रदेश के सीएम डा. मोहन यादव के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई गई है तो ब्राह्मणों के बीच राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा को भी उतारा गया है। उत्तराखंड के सीएम धामी के कार्यक्रम भी लगाए गए हैं।  

सोशल इंजीनियरिंग में जुटे शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 2014 और 2019 में लोकसभा चुनावों में यूपी की कमान संभाल चुके हैं। इस बार भी वो चुनावी गुणा-गणित दुरुस्त करने में जुटे हैं। शाह ने जहां चरणवार सीटों को लेकर संगठनात्मक बैठकें कर रणनीतिक चर्चा की है, वहीं लगातार चुनावी रैलियां भी कर रहे हैं। उधर, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह संगठनात्मक बैठकों के जरिए निचले स्तर तक संगठन को सक्रिय करने में जुटे हैं।

संगठन महामंत्री हर लोकसभा सीट पर दो से तीन बैठकें कर रहे हैं। सोशल इंजीनियरिंग के लिए यूपी के जातिवार चेहरों के साथ ही पड़ोसी राज्यों के नेताओं को भी विधानसभावार जिम्मेदारियां दी गई हैं। हर सीट को लेकर माइक्रो मैनेजमेंट किया जा रहा है। कहीं विपक्ष की सेंधमारी रोकने तो कहीं रूठों को मनाने के लिए उसी जाति के नेताओं को सजातीय मतदाताओं के बीच लगाया गया है।