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10 अगस्त, 2020|10:35|IST

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गर्मी में कूल-कूल बना हुआ है, यह अनोखा लखटकिया घर- VIDEO

Gorakhpur cool house

न नमी, न सीलन। बनने के चार साल बाद भी मजदूर खुदरू का घर जस का तस है। यही नहीं बाहर चिलचिलाती धूप और गर्मी के बावजूद अंदर का वातावरण कूल-कूल बना हुआ है। खुदरू के इस लखटकिया घर की कामयाबी के बाद इसे बनाने वाली संस्था ने सरकार से इस तकनीक को गरीबों के लिए बन रहे घरों में इस्तेमाल करने की गुजारिश की है। 

राप्ती नदी के किनारे शहर के निचले हिस्सों में शुमार महेवा में हर बारिश में जलजमाव होता है। चार साल पहले गोरखपुर एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप ने शीड इंडिया कम्पनी से मिलकर ऐसे इलाकों के लिए टिकाऊ, सस्ते और मौसम अनुकूलित मकान बनाने का प्रयोग किया। दिहाड़ी मजदूर खुदरू की 435 वर्ग फीट जमीन को इस प्रयोग के लिए चुना गया। 

चूहा जाल ईंट बंधन विधि से बना है मकान 

खुदरू का यह मकान चूहा जाल ईंट बंधन विधि से बना है। खड़ी ईंटें जोड़कर बनाई गई दीवारों के बीच तीन इंच की जगह छोड़ी गई है। इस जगह में धान की भूसी भरी गई। इस तरह तैयार दीवारों की खासियत यह है कि इसमें धूप का असर अंदर की दीवार पर नहीं पड़ता। मकान जब बना था तो टिनशेड की इसकी छत के नीचे बांस की चटाई बिछाई गई थी। चार साल में वह चटाई गायब हो गई फिर भी चूहा जाल ईंट बंधन विधि की वजह से घर के अंदर का वातावरण ठंडा बना हुआ है। 

ईंट और सीमेंट की बचत 

इस घर को बनाने में बीम और कंकरीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। सरिया भी सिर्फ कोनों पर लगाई गई है। गोरखपुर एन्वायरमेंटल एक्शन ग्रुप के समन्वयक जितेन्द्र द्विवेदी बताते हैं कि इसे बनाने में करीब 20 प्रतिशत ईंट और 50 प्रतिशत सीमेंट कम खर्च हुई। उनके मुताबिक बेसमेंट की डिजाइन भूकम्परोधी है और मजबूती किसी मायने में कम नहीं है।

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  • Web Title:this cool economical home of gorakhpur is perfect for scorching hot weather