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सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने ये होंगी चुनौतियां, कैसे मत प्रतिशत बढ़ाएं 

सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने जनाधार बढ़ाने की चुनौतियां होंगी। दोनों के सामने आसमान सी चुनौतियां हैं कि कैसे वे मत प्रतिशत बढ़ाएं और एक-दूसरे का वोट ट्रांसफर हो सके।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के सामने ये होंगी चुनौतियां, कैसे मत प्रतिशत बढ़ाएं 
Deep Pandeyशैलेंद्र श्रीवास्तव,लखनऊThu, 22 Feb 2024 06:36 AM
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लोकसभा चुनाव के लिए काफी हुज्जत और खींचतान के बाद समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है। यूपी की कुल 80 सीटों में कांग्रेस के हाथ सिर्फ 17 सीटें ही आई हैं और सपा ने मजबूत स्थिति में रही है। इससे यह तो साफ हो गया है कि यूपी में इंडिया गठबंधन की डोर सपा के हाथ में ही रहेगी लेकिन दोनों के सामने आसमान सी चुनौतियां हैं कि कैसे वे मत प्रतिशत बढ़ाएं और एक-दूसरे का वोट ट्रांसफर हो सके।

सपा-कांग्रेस सात साल बाद साथ

पांच साल पहले हुए लोकसभा चुनाव की बात करें तो बसपा से गठबंधन पर सपा के हिस्से में 37 सीटें ही आई थीं। उस समय 38 सीटें बसपा के कोटे में गई थीं। यूपी के चुनाव में सात साल बाद सपा और कांग्रेस एक साथ आए हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों में गठबंधन हुआ था। उस समय सपा सत्ता में थी। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कांग्रेस को गठबंधन में 105 सीटें दी थी और अपने पास 298 सीटें रखी थीं यानी विधानसभा की कुल 403 सीटों में से 26 फीसदी सीटें कांग्रेस के पाले में आई थीं। इस बार उसे 80 सीटों में से सिर्फ 21 फीसदी हिस्सेदारी यानी 17  सीटें मिल सकी हैं। वर्ष 2017 का चुनाव दोनों पार्टियों के लिए अच्छा नहीं रहा था। दोनों पार्टियों का वोट बैंक मिलाकर 28.07 तक ही पहुंच सका था। सपा ने 47 सीटें जीती और उसे वोट 21.82 प्रतिशत मिला, लेकिन कांग्रेस को अधिक फायदा नहीं हुआ। वह मात्र सात सीटें ही जीत पाई और उसका वोट प्रतिशत 6.25 प्रतिशत तक ही पहुंच सका। अब इस बार कांग्रेस-सपा के सामने चुनौती है कि वे कितना मत प्रतिशत बढ़ाने में कामयाब होते हैं।

सपा पीडीए के सहारे
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए बनाम पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) का नारा दिया है। सपा लोकसभा चुनाव के लिए इन पर ही दांव लगा रही है। सपा ने अब तक जो 31 उम्मीदवार घोषित किए थे उनमें ओबीसी 19, दलित छह और मुस्लिम तीन हैं। यह बात अलग है कि कांग्रेस की कोटे में आई सीटों से सपा अपने उम्मीदवार वापस लेगी। इससे आगे घोषित होने वाले उम्मीदवारों के बारे में साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है। अखिलेश दावा करते हैं कि पीडीए का वोट बैंक 85 फीसदी तक बैठता है। अब यह तो समय बताएगा कि उनकी इसमें कितनी हिस्सेदारी बैठती है। वर्ष 2022 में बिना गठबंधन किए ओबीसी के बूते पार्टी ने अपने विधायकों की संख्या 47 से बढ़ा कर सहयोगियों समेत 125 विधायकों तक पहुंचाई थी। अब चुनौती है कि गठबंधन के बाद सपा अपने सांसदों की संख्या कितनी बढ़ा पाती है।

पाना होगा खोया जनाधार
यूपी में कांग्रेस का जनाधार चुनाव दर चुनाव खिसका है। यूपी में उसे सपा का साथ मिला है, पर भाजपा आत्मविश्वास से लबरेज है। भाजपा ने नारा दिया है कि अबकी बार 400 पार है...। इनमें से 80 सीटें यूपी की हैं। कांग्रेस का रिकार्ड पिछले कई चुनावों में काफी खराब रहा है। राहुल गांधी अपनी परंपरागत सीट अमेठी पिछली बार स्मति ईरानी से हार गए। अब देखना होगा कि सपा का साथ पाकर कांग्रेस अपना खोया हुआ जनाधार कितना वापस ला पाती है।

लोकसभा चुनाव परिणाम-2019
पार्टी           जीते     वोटिंग प्रतिशत
भाजपा         62       49.98
अपना दल एस 02       1.21
बसपा           10       19.43
सपा             05        18.11
कांग्रेस           01        6.36

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