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रीढ़ की हड्डी में लगी थी गोली, 32 साल से एक बिस्‍तर पर सिमट गई थी दुनिया; इस कमाल से उठ खड़े हुए कमलेश

रीढ़ में गोली लगी थी। चलना तो दूर बैठना तक संभव नहीं था। तकलीफ के बीच 32 साल बीत गए। चिकित्‍सा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्‍तेमाल से उनकी सालों पुरानी दिक्कत की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

रीढ़ की हड्डी में लगी थी गोली, 32 साल से एक बिस्‍तर पर सिमट गई थी दुनिया; इस कमाल से उठ खड़े हुए कमलेश
Ajay Singhवरिष्ठ संवाददाता ,कानपुरWed, 21 Feb 2024 10:23 AM
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Miracle of new technology in medical field: चिकित्सा क्षेत्र में इलाज की नई टेक्नोलॉजी कितनी कारगर हो सकती है, इसकी बानगी 52 साल के कमलेश अवस्थी हैं। रीढ़ में गोली लगने से उनकी दुनिया एक बिस्तर तक सिमट गई थी। चलना तो दूर बैठना तक संभव नहीं था। तकलीफ के बीच 32 साल बीत गए। बेहतर इलाज की आस में एक दिन हैलट लेकर आए। यहीं से उनकी सालों पुरानी दिक्कत की उल्टी गिनती शुरू हो गई। छह माह पहले स्टेम सेल थेरेपी के जरिए कमलेश का इलाज किया गया। बिस्तर पर लेटे-लेटे सालों गुजार देने वाले कमलेश आज पैरों पर खड़े होने लगे हैं। यह देख उनके अपनों की आंखों में खुशी के आंसू हैं।

हैलट में विजिटिंग प्रोफेसर ने शुरू किया इलाज 
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. बीएस राजपूत ने हमीरपुर के सुमेरपुर ब्लॉक के टेड़ा गांव के कमलेश अवस्थी को हैलट में करीब छह माह पहले देखा। उन्होंने जांच के बाद कमलेश को स्टेम सेल थेरेपी देने का निर्णय लिया। कमलेश की बोन मेरो से सेल को रीढ़ में ट्रांसप्लांट किया गया। डॉ. राजपूत ने बताया कि गोली लगने से कमलेश की नसों ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। थेरेपी की वजह से नसों ने काम करना शुरू कर दिया। डेढ़ घंटे का समय थेरेपी में लगा।

यह अनोखा मामला, वर्ल्ड रिकॉर्ड का करेंगे दावा 
डॉ. राजपूत कहते हैं कि स्टेम सेल थेरेपी के जरिए 32 साल बाद किसी का बिस्तर से उठना संभव हुआ है। यह अनोखा मामला है। इसलिए गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए दावा किया जाएगा। कमलेश े पूरी तरह सामान्य होकर चल सकेंगे।

सीएम से पांच लाख की मदद मिली
कमलेश के मित्र धीरज ने ही उन्हें इस थेरेपी के बारे में बताया था। दोस्त ने भागदौड़ कर मुख्यमंत्री से बतौर ढाई-ढाई लाख रुपये की दो बार आर्थिक मदद भी दिलाई।

हर्ष फायरिंग में हुए थे गोलियों के शिकार
बकौल धीरज कमलेश को 1993 में फतेहपुर में हर्ष फायरिंग के दौरान गर्दन व रीढ़ में गोलियां लगी थीं। गोली किसने मारी, इसका भी आजतक खुलासा नहीं हुआ। मामले में लंबी जांच चली और पूछताछ का दौर चला पर कुछ हासिल नहीं हुआ।

प्राचार्य के घुटनों और मसल्स की भी थेरेपी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला को भी मंगलवार को स्टेम सेल थेरेपी दी गई। मुंबई निवासी डॉ. राजपूत ने प्राचार्य के दोनों घुटनों व मसल्स में सेल ट्रांसप्लांट किए। बताया गया कि घुटनों में दर्द के कारण प्राचार्य को काफी दिक्कत हो रही थी।

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