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Hindustan Special: प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देता यूपी का ये सरकारी स्कूल, अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को सिखाने के लिए है स्पेस लैब

देश का अतिपिछड़ा जिला है। इसे आकांक्षी जनपद का दर्जा मिला है। यूपी में ऐसे पिछड़े आठ जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर का एक प्राइमरी स्कूल चर्चा में है।

Hindustan Special: प्राइवेट स्कूलों को टक्कर देता यूपी का ये सरकारी स्कूल, अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को सिखाने के लिए है स्पेस लैब
Pawan Kumar Sharmaसंतोष श्रीवास्तव,सिद्धार्थनगरMon, 12 Feb 2024 09:25 PM
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देश का अतिपिछड़ा जिला है। इसे आकांक्षी जनपद का दर्जा मिला है। यूपी में ऐसे पिछड़े आठ जिलों में शामिल सिद्धार्थनगर का एक प्राइमरी स्कूल चर्चा में है। नेपाल सीमा से सटे जिले के इस स्कूल में अंतरिक्ष प्रयोगशाला है। यहां अब तक 11 हजार से ज्यादा बच्चों को अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों के बारे में बताया जा चुका है। अब शैक्षणिक टूर के लिए अन्य स्कूलों के बच्चे यहां आते हैं। बच्चे अंतरिक्ष का नजारा देखते हैं। बच्चे ही उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां समझाते हैं।

जी हां, हम बात कर रहे हैं भनवापुर ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय हसुड़ी औसानपुर की। इस स्कूल में विक्रम सारा भाई स्पेस लैब बनाई गई है। 8.24 लाख रुपये की लागत से बनी लैब में कक्षा आठ तक के बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान की खूबियां जानते हैं। यहां के सात बच्चों ने इसरो, अहमदाबाद में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके बाद वे स्पेस लैब में अन्य बच्चों को भी अंतरिक्ष के बारे में जानकारी दे रहे हैं। जिले के 11 हजार से अधिक बच्चे अब तक इस लैब का भ्रमण कर चुके हैं। भोपाल में हुए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में भी हसुड़ी औसानपुर के बच्चों ने बेहतर प्रस्तुति दी थी, जिसे ग्रामीण शिक्षा के बेहतर मॉडल का पुरस्कार भी मिला। प्रशिक्षित बच्चे श्रेया त्रिपाठी, अवंतिका, गरिमा, अभिलाषा, अयांश, शिवेन, शिवांशी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार व इसरो के चेयरमैन एन सोमनाथ से मुलाकात भी कर चुके हैं।

इसरो में मिला था सात छात्रों को प्रशिक्षण

अंतरिक्ष प्रयोगशाला के निर्माण का काम 10 अक्टूबर 2023 से शुरू होकर 15 नवंबर 2023 तक चला। इसरो से संबद्ध व्योमिका स्पेस अकादमी ने इसका निर्माण किया है। स्पेस वीक के पहले इस स्कूल के सात छात्रों के चयन के लिए एक परीक्षा आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले इन छात्रों को स्पेस एजुकेशन के लिए यह संस्था दिसम्बर 2023 में अहमदाबाद ले गई थी, जहां छात्र अंतरिक्ष के विषय में जानकारी दी गई थी।

छात्र कर रहे अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई

प्रयोगशाला निर्माण के बाद स्कूल में ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं के माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई कराई जा रही है। इसके लिए इसरो के रिटायर्ड वैज्ञानिक दो घंटे की ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। साथ ही समय समय पर स्कूल में ऑफलाइन कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं।  ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने कहा कि हमारे गांव और जिले के बच्चे इस इसरो अंतरिक्ष स्पेस का लाभ उठा सकते हैं।

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