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अयोध्या में बनेगा सबसे बड़ा प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने वाला प्लांट, 20 टन होगी क्षमता

अयोध्या में उत्तर भारत का पहला सबसे बड़ा प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने वाला प्लांट बनेगा। इस संयंत्र में रोजाना 20 टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करने के लिए दो रिएक्टर लगाए जाएंगे।

अयोध्या में बनेगा सबसे बड़ा प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने वाला प्लांट, 20 टन होगी क्षमता
Deep Pandeyअजित खरे,लखनऊWed, 22 Nov 2023 06:18 AM
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उत्तर भारत का पहला सबसे बड़ा प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने वाला प्लांट अयोध्या में लगेगा। यहां 20 टन क्षमता का प्लांट लगाने की तैयारी है। इसके लिए निजी कंपनी यहां दो चरणों में 100 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना से कूड़ा उठाने वाले व रिक्शे वालों को भी जोड़ा जाएगा और उन्हें भी बेहतर रोजगार मिलेगा। इस संयंत्र में रोजाना 20 टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करने के लिए दो रिएक्टर लगाए जाएंगे। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद लाखों श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में आएंगे। इस कारण शहर में बढ़े कचरे के निस्तारण के लिहाज से इसे खासा अहम माना जा रहा है।

इसके लिए अयोध्या में 100 कचरा संग्रह बाक्स लगेंगे। प्रत्येक बाक्स के संचालन के लिए एक महिला की नियुक्ति होगी। हर बाक्स से पांच बैटरी रिक्शे व 20 से 25 कचर बीनने वाले गरीबों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए बंगलुरू की कंपनी एम के एरोमेटिक्स लिमिटेड यहां अयोध्या में प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने के लिए संयंत्र लगाएगी। 

चेन्नई में 12  साल से चल रहा है कि कंपनी का संयंत्र
कंपनी का प्लास्टिक कचरे से ईंधन का बनाने का संयंत्र चेन्नई में 12 साल से काम रहा है। इसके जरिए अब तक 26 हजार मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण किया और 24 हजार मीट्रिक कार्बन उत्सर्जन रोका गया। इसी तरह का एक प्लांट इस साल गोवा में शुरू किया गया है। 

यह है मिनी आयल रिफाइनरी 
प्लास्टिक कचरे को एकत्र कर प्लांट में भेजा जाएगा। वहां रियक्टर में प्लास्टिक कचरे को 350 से 450 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाएगा। इससे हाइड्रोकार्बन बनेंगे। इसे क्रूड ऑयल बनेगा।  इसके बाद क्रूड ऑयल को आटोमोटिव ग्रेड डीजल में तब्दील किया जाएगा है। इस डीजल का इस्तेमाल जनरेटर, ट्रैक्टर, पंप सेट, भारी मशीनरी व भारी वाहन व डंपर, बुलडोजर संचालन में होगा। 1000 ग्राम प्लास्टिक कचरे से 800 एमएल क्रूड ऑयल बनेगा। इसमें पालीमर इनर्जी का टेक्नालॉजी का इस्तेमाल होगा। अयोध्या नगर में रोजाना 350 टन सालिड वेस्ट निकलता है। इसमें 30 से 35 टन प्लास्टिक होता है। पर्यटकों की तादाद बढ़ने से प्लास्टिक कचरे में और इजाफा होगा।  

इनका कहना है
संयंत्र लगाने वाली कंपनी के निदेशक इमरान रिजवी का कहना है कि प्रथम चरण में यह योजना अयोध्या शहर में काम करेगी। इसके बाद दूसरे चरण में इसका विस्तार होगा। अयोध्या मंडल के अन्य जिलों के ब्लाकों में यह परियोजना काम करेगी। इस तरह की परियोजना से सड़क पर प्लास्टिक न रहने पर छुट्टा जानवरों खास तौर पर गाएं प्लास्टिक खाने से बच जाएंगी।

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