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कानपुर मेट्रो का हालः पौने दो साल में न बन पाई 2.2 किलोमीटर दीवार

न जाने कब चल पाएगी कानपुर मेट्रो

डेढ़ साल बीत गए पर कानपुर मेट्रो रेल परियोजना रफ्तार नहीं पकड़ पाई। राजकीय पॉलीटेक्निक में ही प्रोजेक्ट कई बाधाओं से जूझ रहा है। इसी कारण पौने दो साल में 2.2 किलोमीटर की दीवार तक न बन पाई। अब जाकर जमीन के समतलीकरण का कार्य शुरू हुआ है। 
डिजाइन के मुताबिक पॉलीटेक्निक में यार्ड की दीवार की कुल लंबाई 2200 मीटर तय की गई थी। दीवार के साथ ही यार्ड के लिए मिट्टी भराई का काम भी शुरू हुआ था। हकीकत यह है कि अभी तक 1000 मीटर ही दीवार बन पाई। कुल 34 करोड़ रुपए दीवार और मिट्टी भराई आदि कार्यों पर खर्च होने हैं मगर 8 से 10 करोड़ का ही काम हुआ है। यानी जारी हुई धनराशि का एक तिहाई। सिर्फ दीवार की बात करें तो 50 प्रतिशत से भी कम निर्माण हुआ है।

5 छात्रावास ढहे न 519 पेड़ कटे
पॉलीटेक्निक के जीटी रोड स्थित मुख्य द्वार के सामने से भीतर जाने पर मेट्रो का साइट ऑफिस बना हुआ है जो एक छात्रावास में ही है। इस भवन समेत पांच छात्रावासों को ढहाया जाना था ताकि पिछली दीवार को पूरा किया जा सके मगर यह कवायद आज तक नहीं हुई। खास बात है कि इसमें तीन छात्रावास इतने जर्जर हैं कि इनमें कोई रहता भी नहीं। आदेश यह हुआ था कि फिलहाल तीन छात्रावासों को सबसे पहले ढहा दिया जाए मगर इस पर भी अमल नहीं हुआ। परिसर में 519 पेड़ों को काटे जाने पर वन विभाग व पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी मिल चुकी है मगर पॉलीटेक्निक प्रशासन से ऐसा करने की अनुमति अब तक नहीं मिली।

40 एकड़ जमीन की सुपुर्दगी भी नहीं
सारी बाधाओं की मुख्य वजह पॉलीटेक्निक परिसर में मौजूद 40 एकड़ जमीन है जिसकी सुपुर्दगी लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन गको आज तक नहीं हो सकी। दो साल से यह प्रक्रिया बस चल रही है। शिलान्यास से पहले ही शासन से लेकर स्थानीय प्रशासन पर कई दौर की वार्ता हो चुकी है। अभी कुछ समय पहले ही मुख्य सचिव के निर्देश पर एक कमेटी गठित की गई थी जिसे जमीन समेत अन्य बाधाओं का निराकरण करने का निर्देश दिया गया था। कमेटी ने सारे विवादों को सुलझा लेने की बात कही और जमीन सुपुर्दगी की संस्तुति कर दी मगर शासन स्तर से यह बात आगे ही नहीं बढ़ रही। पॉलीटेक्निक प्रशासन भी तब तक स्वीकृति नहीं देना चाह रहा जब तक कि प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा का लिखित आदेश न आ जाए। 

नए पॉलीटेक्निक भवन का पता नहीं, छात्रों में संशय
यार्ड की डिजाइन जरूर बन चुकी है मगर नए पॉलीटेक्निक भवन का प्रोजेक्ट तक तैयार नहीं है। यह भी तय नहीं है कि नया भवन आईटीआई में ही बनेगा या कहीं और। कुल मिलाकर पॉलीटेक्निक प्रशासन भी अधर में लटका है और यहां अध्ययनरत छात्र भी। जब तक नया भवन नहीं तैयार हो जाता, पॉलीटेक्निक की शिफ्टिंग नहीं हो सकती। जब तक शिफ्टिंग नहीं होती तब तक यार्ड बनकर तैयार नहीं हो सकता। बताते चलें कि 4 अक्तूबर 2016 को कानपुर मेट्रो रेल परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री (अब उप राष्ट्रपति) वेंकैया नायडू और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। उसी दिन राजकीय पॉलीटेक्निक में यार्ड की दीवार बनाने के लिए खुदाई भी शुरू हुई थी।

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  • Web Title:The Kanpur metro was unable to construct a 2 2 km wall in two years