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Hindi News उत्तर प्रदेशजेल में पसंद किए जा रहे दूल्हे, दुल्हन की हो रही मुंह दिखाई, बाहर हो रही शहनाई

जेल में पसंद किए जा रहे दूल्हे, दुल्हन की हो रही मुंह दिखाई, बाहर हो रही शहनाई

जेल में रिश्तों की नई डोर बंध रही है। यहां दूल्हे पसंद किए जा रहे हैं तो बहुओं की मुंह दिखाई भी हो रही है। गोरखपुर जेल से पिछले एक साल में दर्जनभर से ज्यादा बेटे-बेटियों की शादियां तय हुईं।

जेल में पसंद किए जा रहे दूल्हे, दुल्हन की हो रही मुंह दिखाई, बाहर हो रही शहनाई
Deep Pandeyविवेक पांडेय,गोरखपुरFri, 24 May 2024 05:23 AM
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जेल का नाम सुनते ही एक ऐसी चाहरदीवारी जेहन में आती है, जहां अपराध करने वाले अपने किए की सजा भोगते हैं। परिजनों का उत्साह मर जाता है तो कई परिवार बिखर जाते हैं। कैदखाने की इस एकाकी दुनिया में भी जिंदगी के हसीन सपने पल रहे हैं, रिश्तों की नई डोर बंध रही है। यहां दूल्हे पसंद किए जा रहे हैं तो बहुओं की मुंह दिखाई भी हो रही है। गोरखपुर जेल से पिछले एक साल में दर्जनभर से ज्यादा बेटे-बेटियों की शादियां तय हुईं। जिन्हें कानूनी इजाजत मिली, उन्होंने बाहर जाकर शहनाइयों की गूंज भी सुनी। और जो नहीं जा सके, उनकी बहुओं या दामादों ने जेल जाकर परिजनों का आशीर्वाद लिया। 

गोरखुपर जेल में ऐसे तमाम कैदी उम्रकैद या लंबी सजा काट रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारियां अभी बाकी हैं। इनमें से किसी को बेटी के हाथ पीले करने की फिक्र थी तो किसी का बेटा शादी के लायक हो गया था। इनके रिश्तों की बात चली और जेल में उस पर सहमति की मुहर लगी। वर्ष 2023-24 में जेल में 13 शादियां तय हुईं और फिर घरों में शहनाई बजी। इनमें आठ दूल्हे पंसद किए गए और पांच बहुओं की मुंह दिखाई हुई। जेल अधिकारी भी इस खुशी में शरीक हुए और मिठाई खिलाकर मुबारकबाद दी। कुछ और बंदियों-कैदियों के बेटे-बेटियों के रिश्तों की बात चल रही है। वर-वधु पक्ष का लगातार जेल में आना-जाना लगा हुआ है। लगन शुरू होते ही उनके घरों में मंगलगीत बजने की उम्मीद है। 

पैरोल पर बेटी-बहन की शादी में शरीक हुए 
कैदी मेढ़ई, दूधनाथ और सुधीर चौहान ने अपनी बेटियों की शादी जेल से तय की तो रूपेश यादव के परिजनों ने जेल में ही उनके बहनोई की फोटो दिखाई। वहीं कैदी कुटन और आशुतोष पर बेटी की शादी तय करने से लेकर उसकी तैयारी आदि की जिम्मेदारी थी। इनमें से किसी को 10 दिन तो किसी को 29 दिन तक का पैरोल मिला। बड़हलगंज के सुदामा यादव अब रिहा हो गए हैं लेकिन इन्होंने भी भाई की दो बेटियों और अपने एक बेटे की शादी जेल में रहते हुए तय की। पैरोल न मिलने से सुदामा और उनके भाई शादी में शरीक नहीं हो सके लेकिन दामाद और बहू की जेल में ही मुंह दिखाई हुई। भांजे को बेटे की तरह पालने वाले संजीव दुबे ने भी उसकी शादी जेल से तय की।
 
गोरखपुर जेलर एके कुशवाहा ने बताया कि जेल प्रशासन का बंदियों से रिश्ता पारिवार जैसा हो जाता है। जब हमें यह पता चलता है कि कोई रिश्ता तय करने जेल में आया है तो उसकी मुलाकात का समय बढ़ा दिया जाता है। शादी तय होने पर हमें भी खुशी होती है। दोनों पक्षों को हम मिठाई खिलाकर मुबारकबाद देते हैं। पैरोल वाले कैदियों को शादी में शरीक होने की भी इजाजत मिलती है।