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पूर्वांचल की सीटों पर ओबीसी मतों को सहेजने की लड़ाई, समझें समीकरण

उत्तर प्रदेश के साथ ही पूर्वांचल में नजर आने लगा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष जातीय जुगलबंदी के सहारे मतों को सहेजने में जुटे हैं। दर्जन भर से अधिक सीटों ओबीसी जातियां जीत हार में भूमिका निभाती हैं।

पूर्वांचल की सीटों पर ओबीसी मतों को सहेजने की लड़ाई, समझें समीकरण
Deep Pandeyहेमंत श्रीवास्तव,लखनऊThu, 02 May 2024 07:31 AM
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सियासी दल अब मध्य उत्तर प्रदेश के साथ ही पूर्वांचल में नजर आने लगा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष जातीय जुगलबंदी के सहारे मतों को सहेजने में जुटे हैं। गैर यादव ओबीसी की असली लड़ाई छठवें व सातवें चरण के चुनाव में शामिल पूर्वांचल की 27 सीटों पर देखने को मिलेगी। इन दोनों चरणों की दर्जन भर से अधिक सीटों पर कुर्मी, राजभर, निषाद, बिंद, कुशवाहा जैसी ओबीसी जातियां हार जीत में अहम भूमिका निभाती हैं। जिसे देखते हुए विपक्ष ने इन जातियों से अधिक प्रत्याशी देकर बाजी मारने की कोशिश की है तो सत्ता पक्ष भाजपा को सहयोगी दलों की बिरादरी में मजबूत पकड़ पर भरोसा है।

छठवें चरण की 14 और सातवें चरण की 13 सीटों पर जातीय राजनीति का खेल खुलकर देखने को मिलने लगा है। विपक्ष ने इन सीटों पर भाजपा के साथ ही भाजपा गठबंधन के सहयोगियों अपना दल (सोनेलाल), सुभासपा और निषाद पार्टी की पकड़ को ढीली करने की रणनीति के तहत कुर्मी, राजभर, निषाद जैसी जातियों पर अधिक दांव लगाया है। 

इंडिया गठबंधन से 12 प्रत्याशी कुर्मी, निषाद, बिंद जैसी जातियों से
सपा ने यादवों से इतर सुल्तानपुर से निषाद, प्रतापगढ़ से कुर्मी, फूलपुर से मौर्य, अंबेडकर नगर से कुर्मी, श्रावस्ती से कुर्मी, बस्ती से कुर्मी, संतकबीर नगर से निषाद, जौनपुर से कुशवाहा, गोरखपुर से निषाद, सलेमपुर से राजभर, तथा मिर्जापुर से बिंद बिरादरी से प्रत्याशी खड़ा कर इन सीटों पर सत्ता पक्ष को कांटे की टक्कर देने की कोशिश की है। वहीं समझौते के तहत मिली सीटों में से कांग्रेस ने भी महाराजगंज से कुर्मी बिरादरी से प्रत्याशी खड़ा कर मुकाबले को रोचक बनाने का काम किया है। 

बसपा ने भी चार सीटों पर गैर यादव ओबीसी पर जताया है भरोसा
बसपा ने फूलपुर से पाल, आजमगढ़ से राजभर, घोसी से चौहान, चंदौली से मौर्य प्रत्याशी देते हुए गैर यादव ओबीसी जातियों को जोड़ते हुए इन सीटों को जीतने का ताना-बाना बुनने का प्रयास किया है।

एनडीए ने सात सीटों पर इन जातियों से दिए हैं प्रत्याशी
सत्ता पक्ष यानी भाजपा ने भी इन जातियों को साधने की कोशिश की है लेकिन इन जातियों से प्रत्याशी देने में एनडीए गठबंधन विपक्ष से पीछे नजर आ रहा है। भाजपा ने फूलपुर व संतकबीर नगर से निषाद, भदोही से बिंद, महाराजगंज से कुर्मी, भाजपा सहयोगी सुभासपा ने घोसी से राजभर, सलेमपुर से कुशवाहा तथा मिर्जापुर से सहयोग अद (एस) ने कुर्मी प्रत्याशी मैदान में दिया है। 

छठें व सातवें चरण की सीटों पर जीत में भाजपा सहयोगियों की बड़ी भूमिका
भाजपा ने इन दोनों चरणों की 27 सीटों पर चुनाव जीतने के लिए रणनीति के तहत सहयोगी दलों अद (एस), सुभासपा और निषाद पार्टी पर अधिक भरोसा जताया है। इन दोनों चरणों की सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की चुनावी जनसभाओं में मंच पर सहयोगी दलों के नेता भी नजर आएंगे। इन दलों के नेताओं पर इन दोनों चरणों की सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी बिरादरी के मतों को सहेजते हुए वोट कराने की चुनौती इसलिए बढ़ गई है क्योंकि विपक्षी दलों ने इन दलों के आधार वोट बैंक (जाति विशेष) से कई प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं।