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29 जनवरी, 2020|2:26|IST

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बहुचर्चित बेहमई कांड का फैसला कल

बेहमई नरसंहार मामले में बचाव पक्ष के वकील ने गुरुवार को अपनी अंतिम दलीलें कोर्ट के सामने रखीं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की कई नजीरें भी पेश कीं। इसके बाद बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अब वह फैसले के लिए तैयार हैं। अब 18 जनवरी को इस बहुचर्चित कांड का फैसला सुनाया जाएगा।


राजपुर थाना क्षेत्र के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को दस्यु सरगना फूलनदेवी व उसके गैंग ने शाम करीब 4 बजे धावा बोलकर गांव के कई लोगों को एक जगह एकत्रित कर गोलियां बरसाईं थीं। इसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 6 लोग घायल हुए थे। 39 साल बाद कोर्ट ने इस घटना के फैसले के लिए 6 जनवरी की तारीख तय की थी। लेकिन ऐन वक्त पर बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर सुप्रीम कोर्ट की कुछ नजीरें पेश करने के लिए समय की मांग की थी। इस पर अदालत ने उन्हें 16 जनवरी तक का मौका देकर 18 जनवरी को फैसले की तारीख तय की थी। इसी क्रम में गुरुवार को बचाव पक्ष के वकील गिरीश नारायण दुबे ने कोर्ट के समक्ष अपनी अंतिम दलीलें रखीं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की कई नजीरें भी पेश कीं। उन्होंने बताया कि उनको इस मामले में जो भी कहना था कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख चुके हैं। अब वह फैसले के लिए तैयार हैं।

नामजद आरोपितों की हो चुकी मौतें
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि इस मामले में नामजद फूलन देवी, मुस्तकीम, राम औतार व लल्लू आदि डकैतों की मौत हो चुकी है। शेष बचे पोसा, भीखा, विश्वनाथ व श्याम बाबू को जेल भेज दिया गया था। इनके पास से पुलिस लूट का कोई सामान बरामद नहीं कर सकी थी। जबकि इनकी शिनाख्त करने वाले कई गवाह अदालत में शिनाख्त मेमो को साबित नहीं कर सके। इसी तरह की तमाम तकनीकी खामियां इस मुकदमे में हैं। इन्हीं बिंदुओं पर उन्होंने अपना पक्ष रखने के साथ सुप्रीम कोर्ट की नजीरें भी पेश की हैं। अब उनको इस मामले में कुछ भी कहना शेष नहीं है। 18 जनवरी को कोर्ट के फैसले के लिए वह तैयार हैं। डीजीसी राजू पोरवाल ने बताया कि बचाव पक्ष को कोर्ट ने 16 जनवरी तक का अंतिम मौका दिया था। अब 18 जनवरी को फैसला आना लगभग तय है। 
 

 
 

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  • Web Title:The decision of the famous Behmai scandal tomorrow