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उत्तर प्रदेशशवों को बहाने नहीं दिया जाए, सीएम योगी ने नदियों में नाव से पेट्रोलिंग का दिया निर्देश

लखनऊ। प्रमुख संवाददाताPublished By: Yogesh Yadav
Fri, 14 May 2021 08:17 PM
शवों को बहाने नहीं दिया जाए, सीएम योगी ने नदियों में नाव से पेट्रोलिंग का दिया निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं कि राज्य आपदा प्रबंधन बल (एसडीआरएफ) तथा पीएसी की जल पुलिस को प्रदेश की सभी नदियों में पेट्रोलिंग पर लगाया जाए। नावों से पेट्रोलिंग करते हुए जवान यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नदियों में शवों को ना बहाए। जरूरी हो तो स्थानीय स्तर पर जुर्माना भी लगाए जाएं। 

प्रदेश में नदियों में कुछ स्थानों पर शवों के बरामद होने पर मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कि कोई भी परंपरा के नाते भी नदियों में शव ना बहाए। निर्देशित किया है कि प्रदेश में नदियों के किनारे स्थित सभी गांवों तथा शहरों में ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम प्रधान तथा शहरों में कार्यकारी अधिकारी व नगर पालिका, नगर पंचायत व नगर निगम के अध्यक्षों के माध्यम से समितियां बनाकर यह सुनिश्चित करें कि उनके गांव तथा शहर में से कोई भी व्यक्ति परम्परा के नाते नदियों में शव न बहाए।

​उन्होंने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति जिसकी मृत्यु हुई है उसे सम्मानजनक रूप से अंत्येष्टि का अधिकार है। प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में ही प्रत्येक नागरिक जिसकी दुखद मृत्यु हुई है के शवों के सम्मान पूर्व अंत्येष्टि के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है ऐसे में यदि परम्परागत रूप से भी जल-समाधि हो रही है अथवा कोई लावारिस छोड़ रहा है तो भी उसकी सम्मानजनक तरीके से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराया जाए। किसी भी दशा में किसी को भी धार्मिक परंपराओं के नाते नदी में शव न बहाने दिया जाए।

उन्होंने कहा कि ​आवश्यक हो तो स्थानीय स्तर पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। नदी में शव अथवा मरे हुए जानवर बहाने से नदी प्रदूषित होती है एवं प्रदेश सरकार व केंद्र सरकार नदियों को साफ करने के लिए विशेष कार्यक्रम भी चला रही हैं। इस संबंध में गृह विभाग, नगर विकास विभाग को ग्राम विकास एवं पंचायत विभाग तथा पर्यावरण विभाग मिलकर एक कार्य योजना बनाए जिससे कि पूरे प्रदेश में परंपरा के नाते जो शव इत्यादि नदी बहाए जा रहे हैं वो किसी भी दशा में न बहाए जाएं।

वहीं, शासन ने समस्त जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने जिलों में शवों के अंतिम संस्कार को उचित तरीके से कराने का कार्य करें। शवों को नदियों व जल में प्रवाहित करने पर पूरी तरह रोक लगे। सरकार ने अति निर्धन, निराश्रित परिवारों तथा परिवारीजनों द्वारा अंतिम संस्कार में सहयोग नहीं कर पाने की दशा में शवों के अंतिम संस्कार में 5000 रुपये खर्च करने का आदेश पहले ही जारी किया है। यह खर्च राज्य वित्त आयोग की धनराशि से करने के आदेश है। 

अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखे हैं। इसके लिए पूर्व में पंचायती राज विभाग और नगर विकास विभाग द्वारा जारी शासनादेशों का हवाला दिया है। जिसमें कोविड संक्रमण से मृत्यु की दशा में शवों के निस्तारण के लिए 5000 रुपये की धनराशि व्यय करने के लिए पंचायती राज विभाग तथा नगर विकास विभाग को अधिकृत किया गया है।

पंथ व परंपरा के कारण शव प्रवाहित करने वालों को बताएं दुष्प्रभाव:  उन्होंने लिखा है कि शवों का अंतिम संस्कार ना करके जल में प्रवाहित करने के प्रमुख कारणों में अंतिम संस्कार के लिए धन का अभाव, पंथ व परंपरा तथा कोविड से मृत व्यक्ति के शव को संक्रमण के डर से छोड़ देना है। शासन स्तर से निर्धन परिवारों तथा कोविड-19 से मृत्यु की दशा में शवों के अंतिम संस्कार के लिए जब पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है तो कोई कारण नहीं बनता है कि शवों के अंतिम संस्कार की जगह नदियों में प्रवाहित किया जाए। पंथ व परंपरा के प्रकरण में भी संबंधित को शव को जल में प्रवाहित करने से होने वाले दुष्प्रभावों को समझाते हुए शवों की अंत्येष्टि की जानी चाहिए। किसी भी दशा में शव किसी नदी में प्रवाहित नहीं किए जाने चाहिए। 

नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान अंतिम संस्कार की धनराशि के उपयोग का कार्य करें:  उन्होंने नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों से कहा है कि वह अपने क्षेत्र में यह सुनिश्चित करें कि शासन द्वारा अंतिम संस्कार के लिए अनुमन्य धनराशि का पूरा उपयोग हो। जिलाधिकारियों से कहा है कि वह शासनादेशों में अनुमन्य कराई गई धनराशि के व्यय की नियमित समीक्षा करें और हर सप्ताह इसकी सूचना निदेशक पंचायती राज को उपलब्ध कराएं। 
 

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