'तीन तलाक कानून मंजूर नहीं, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट' - Teen talaq kanoon manjoor nhi jayeinge supreme court DA Image

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'तीन तलाक कानून मंजूर नहीं, जाएंगे सुप्रीम कोर्ट'

सुन्नी उलमा के सम्मेलन में गुरुवार को आम सहमति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि तलाक-ए-सलासा यानी तीन तलाक कानून मंजूर नहीं है। वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर करेंगे। मुकदमा लड़ने के लिए फंड भी जुटाया जाएगा।

गरीब नवाज हॉल बांसमण्डी में आयोजित सुन्नी उलमा और मस्जिदों के इमामों व खानकाहों के सज्जादा नशीनों की बैठक में पूरे वक्त तीन तलाक पर ही चर्चा होती रही। अन्य कुछ मुद्दों को शामिल तो किया गया लेकिन इन पर प्रस्ताव पारित करने के अतिरिक्त कोई खास बहस नहीं हुई। यह बैठक जामिया समदिया फफूंद शरीफ के मौलाना मोहम्मद अनवासुल हसन चिश्ती ने बुलाई थी।

तीन तलाक शरीयत में हस्तक्षेप
मस्जिदों के इमामों और सज्जादा नशीनों ने कहा कि उन्हें संविधान में धार्मिक आजादी मिली हुई है। इसके बावजूद तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया गया। यह सरासर शरीयत में सीधा हस्तक्षेप है। सुन्नी मुसलमानों का आज भी मानना है कि एक बार में तीन तलाक हो जाता है।

मस्जिदों में बताएं सही तरीका
उलमा ने कहा कि मस्जिदों में हर नमाज से पहले लोगों को यह बताया जाए कि एक बार में तीन तलाक देना सही तरीका नहीं है, लेकिन तलाक हो जाता है। कुरान के हिसाब से तलाक देने का जो सही तरीका बताया गया है, उसके बारे में उन्हें जानकारी दें। उन्हें बताएं कि कुछ ताकतें उनके मजहब में हस्तक्षेप करना चाहती हैं, यह तभी रुक सकेगा जब मुसलमान अपने मजहबी नियमों पर पूरी तरह कायम रहें। अपने मसाएल खुद हल करें।

राष्ट्रीय स्तर पर तंज़ीम बनाएं
रुदौली शरीफ से तशरीफ लाए शाह सैयद नैयर ने कहा कि सुन्नी उलमा की राष्ट्रीय स्तर पर कोई ऐसी तंजीम नहीं है जो मुस्लिम मसाएल पर शहर से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ सके। तमाम मामलों में मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड या जमीअत उलमा आगे है लेकिन हमारी कोई तंजीम नजर नहीं आती। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर एक तंजीम का गठन किया जाए। इसका एक फण्ड तैयार किया जाए। तभी हम एक बार में तीन तलाक जैसे मुद्दों पर अदालत में लड़ाई लड़ सकेंगे। 50-50 हजार जमा कर बनाएंगे फंड। उलमा ने कहा कि अगर सुन्नी उलमा की राष्ट्रीय स्तर पर कोई तंजीम बन जाती है तो वह हर मस्जिद से 50-50 हजार रुपए एकत्रित कर इसका फण्ड तैयार कर देंगे। इसके बाद तमाम मसाइल पर अदालत में भी पैरवी की जा सकेगी।

अमन बरकरार रहना चाहिए
शहर काजी मौलाना आलम रजा नूरी ने कहा कि जो भी फैसले बैठक में लिए गए हैं, उनसे वह पूरी तरह सहमत हैं। मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा कि हम जो भी काम करें वह अमन के साथ करें। इस मौके पर प्रदेश के कई जिलों से उलमा ने शिरकत की। इनमें खासतौर से मौलाना खुश्तर रब्बानी, मौलाना कासिम हबीबी, मौलाना हसीब अख्तर, मौलाना मुमताज रब्बानी, मौलाना सैयद अनवर मियां चिश्ती, मौलाना मजहर मियां, मौलाना सैयद नैयर मियां रुदौली शरीफ, मौलाना मसूद अहमद मिस्बाही, मौलाना नफीस अहमद मिस्बाही, मौलाना करामत अली, इख़लाक़ अहमद डेविड, महबूब आलम खान आदि मौजूद थे। सरपरस्ती फफूंद शरीफ से आए सज्जादा नशीन सैय्यद मोहम्मद अख्तर मियां और सदारत मौलाना यासीन अख्तर मिस्बाही ने की।

ये प्रस्ताव पास हुए

  • गुस्सा जहालत या नादानी में दिया गया तीन तलाक, तलाक में शुमार किया जाएगी
  • मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बनाया जाए, परिवार को 50 लाख का मुआवजा दें
  • वसीम रिजवी ने हजरत आयशा सिद्दीका पर जो फिल्म बनाई है, उस पर प्रतिबंध लगे
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