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24 मई, 2020|10:55|IST

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पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगी तारेवाली कोठी, बादशाह नसीरुद्दीन हैदर ने 1832 में बनवाया था इमारत को

राजधानी लखनऊ आने वाले पर्यटक अब तारेवाली कोठी के नए रूप से रू-ब-रू हो सकेंगे। लोगों में बहुत समय से यह इमारत सिर्फ बैंक के रूप में पहचानी जा रही थी। अब यह बिल्कुल नए रंग रूप में सामने आई है। एसबीआई की उप प्रबंध निदेशक सलोनी नारायण के प्रयासों से इस कोठी का कायाकल्प कराया गया जिसका उदघाटन उन्होंने 18 मई को किया। इस कायाकल्प के बाद शहर को एक नया पुस्तकालय और साहित्यिक कार्यक्रमों के लिए नई जगह और मिल गई है। नई लाइब्रेरी का नाम 'अदब अंजुमन' रखा गया है।

पर्यटन विभाग के वरिष्ठ टूरिस्ट गाईड नवेद जिया बताते हैं कि सितारों में दिलचस्पी रखने वाले बादशाह नसीरुद्दीन हैदर ने इसे 1832 में बनवाया था। इसमें देश-विदेश के बेहतरीन यंत्र लगवाए गए थे। इसकी दूरबीनें दूर-दूर तक मशहूर थीं। 1857 की क्रांति में इस भवन को काफी नुकसान पहुंचा। आगे चलकर एक जुलाई 1955 को इसी तारेवाली कोठी में भारतीय स्टेट बैंक की लखनऊ मुख्य शाखा स्थापित हुई और आज तक कायम है।

बैंक के अधिकारियों के मुताबिक खास बात ये है कि इस रेनोवेशन को लखनवी तहजीब की थीम पर किया गया है। बैंक के ग्राहकों के अलावा आम निवासी और पर्यटक भी यहां आएं इसलिये इसको और आकर्षक बनाया गया है। शाम को इसकी रोनक देखते ही बनती है। खूबसूरत लाइटों से इसे सजाया गया है। प्रवेश द्वार पर खास लखनऊ का आर्ट वर्क किया गया है। 
 
क्रांतिकारी आंदोलन में इमारत मुख्य केन्द्र रही
1857 की क्रांति के समय जब क्रांतिकारी मौलवी अहमदुल्ला शाह उर्फ डंका शाह फैजाबाद से लड़ते हुए लखनऊ आए तो तारेवाली कोठी को ही अपना अड्डा बनाया और यहीं रहकर क्रांतिकारियों के साथ मंसूबे बनाए। ये जगह रेजीडेंसी, मोती महल, मकबरा सआदत अली खां जैसी तमाम अहम इमारतों के पास थी। लखनऊ में क्रांति की शुरुआत में ये जगह इंकलाब के मरकज के तौर पर मशहूर हो गयी। जंग आगे बढ़ने इस इमारत को काफी नुकसान पहुंचा। 

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  • Web Title:Tarewali Kothi will be a new attraction for tourists the building was built in lucknow by Emperor Nasiruddin Hyder in 1832