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अखिलेश यादव को बताया शेखचिल्ली और रामगोपाल को 'बदतमीज', सपा छोड़ खूब बरसे स्वामी प्रसाद

सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव का स्‍वामी प्रसाद मौर्य की बगावत पर पहला रिएक्‍शन सामने आया है। अखिलेश यादव ने कहा कि लाभ लेने के लिए हर कोई आता है लेकिन मौके पर कौन टिकता है।

अखिलेश यादव को बताया शेखचिल्ली और रामगोपाल को 'बदतमीज', सपा छोड़ खूब बरसे स्वामी प्रसाद
Ajay Singhलाइव हिन्‍दुस्‍तान,लखनऊMon, 19 Feb 2024 02:13 PM
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Akhilesh Yadav Vs Swami Prasad Maurya: समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव का स्‍वामी प्रसाद मौर्य की बगावत पर पहला रिएक्‍शन सामने आया। इसके थोड़ी ही देर बाद स्‍वामी ने भी जमकर पलटवार किया। अखिलेश यादव ने कहा कि लाभ लेने के लिए हर कोई आता है। इस पर स्‍वामी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए यहां तक कह दिया कि विपक्ष में रहकर शेखचिल्‍ली बघारना ठीक नहीं है। स्‍वामी ने कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे प्रदेश और केंद्र में समाजवादी पार्टी की सरकार है और वो हमको लाभ दे रहे हैं। इसके साथ उन्‍होंने जल्‍द ही सपा में आने के बाद मिला एमएलसी का पद छोड़ने का भी संकेत दिया। स्‍वामी, सपा के वरिष्‍ठ नेता रामगोपाल यादव से भी खासे नाराज दिखे। उन्‍होंने कहा कि पता नहीं वह कैसे प्रोफेसर हैं। उनकी भाषा में ना सम्मान है ना बातचीत का सलीका और तरीका आता है।

इसके पहले आचार्य नरेन्द्र देव की पुण्यतिथि पर उन्‍हें श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य और हाल के दिनों में हुए इस्तीफों के बारे में पूछे जाने पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह सवाल जरूरी है लेकिन किसी के मन में क्या है यह कौन बताएगा? लाभ लेने के लिए हर कोई आता है लेकिन मौके पर कौन टिकता है। थोड़ी ही देर बाद इस पर स्‍वामी प्रसाद मौर्य की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। स्‍वामी ने कहा, 'ऐसा लगता है समाजवादी पार्टी की केंद्र में और राज्य में सरकार है और वो मुझे लाभ दे रहे हैं। विपक्ष में रहकर ऐसी शेखचिल्ली बघारना उचित नहीं है। मैंने हमेशा पद छोड़ा है। मैंने वैचारिकता को प्राथमिकता दी है। विचारों के सामने पद मायने नहीं रखता है। मैंने बहुजन समाज पार्टी में नेता विरोधी दल रहते हुए पार्टी को छोड़ दिया था। सत्ता में रहते हुए मैंने भारतीय जनता पार्टी को छोड़ दिया था। ओबीसी की जगह जब जनरल भर्ती किये जा रहे थे तब बीजेपी मैंने छोड़ा था। अखिलेश यादव को बहुत बड़ी गलतफहमी है।' 

एमएलसी के पद से भी इस्‍तीफे का दिया संकेत 
स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने संकेत दिया कि जल्‍द ही वह एमएलसी के पद से भी इस्‍तीफा दे सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि रही बात उनके (अखिलेश)  पद की और सम्मान की (MLC) उसको भी जल्द छोड़ दूंगा। समाजवादी पार्टी में शेखचिल्ली कौन है के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जो बड़बोले होगा वही शेखचिल्ली होगा। स्‍वामी, सपा के वरिष्‍ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव पर भी जमकर बरसे। उन्‍होंने कहा कि पता नहीं वह कैसे प्रोफेसर हैं। उनकी भाषा में ना सम्मान है ना बातचीत का सलीका और तरीका आता है। प्रोफेसर रामगोपाल यादव समाजवादी पार्टी के हितेषी है या दुश्मन है कोई अभी तक समझ ही नहीं पाया। 

नई पार्टी के गठन पर क्‍या बोले स्‍वामी 
नई पार्टी का गठन पर स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि 22 तारीख को कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली में बैठक होगी मैं वहां रहूंगा। कांग्रेस की न्याय यात्रा में शामिल होने के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि अवसर मिलेगा तो कांग्रेस की न्याय यात्रा में जरूर सम्मिलित होऊंगा। क्या 85 और 15 का नारा खत्म हो गया के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि  शोषित पार्टी के लोगों ने हमेशा से कहा था कि हमें इनके खिलाफ लड़ाई लड़नी है। 85 और 15 की लड़ाई जारी रहेगी । अखिलेश यादव ने 85 और 15 का विरोध तभी कर दिया था जब सुल्तानपुर में परशुराम की मूर्ति लगाकर और फरसा लहराया था।

सॉफ्ट हिंदुत्‍व पैदा करना चाहते हैं अखिलेश 
स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि  अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व पैदा करना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर चल रहे हैं । वह खुद को सॉफ्ट हिन्दू दिखाने में व्यस्त हैं। क्या बीजेपी में जाएंगे के सवाल पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि जिसको ठुकरा देता हूं उससे कभी दोस्ती नहीं करता। किसानों, महिलाओं और मजलूमों की लड़ाई लड़ता रहूंगा। 

मेरे आने से सपा का वोट बैंक बढ़ा

स्वामी यहीं नहीं रुके। उन्‍होंने कहा कि मैंने समाजवादी पार्टी का वोटबैंक बढ़ाने का काम किया है। जो कभी सपा से नही जुड़े थे उनको जोडने का काम किया है। सपा में मेरे अभियान का मजाक उड़ाया गया। कई छुटभैया नेता मेरे खिलाफ बोलने लगे। अखिलेश यादव को अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नही हुई। अखिलेश यादव की शह के वजह से ही छुटभैया नेता मेरे खिलाफ बोलते थे। अखिलेश यादव ने जो कुछ भी हमको दिया है कुछ वापस कर दिया है और कुछ जल्द हो जाएगा। जनता से जुड़े मुद्दों पर जहां लड़ाई लड़नी चाहिए वहां घर बैठे तमाशा देखा जा रहा है। मेरे अनुरोध करने के बाद भी उस पर चलने की कोशिश नही की गई। पार्टी के अंदर ही पदों को लेकर भेदभाव किया जा रहा है। सपा में एक राष्ट्रीय महासचिव का बयान पार्टी का होता है और एक राष्ट्रीय महासचिव का बयान निजी हो जाता है। बीजेपी की पिच पर खेलने वाले कभी भी सपा का भला नही कर सकते हैं। सपा हमें सम्मान देने की हैसियत में नही है। मेरे आने के बाद सपा के विधायको की संख्या 111 हो गई। 

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