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अस्पतालों में बढ़ रहे सुपर सीनियर मरीज, संख्या दोगुनी हुई

अस्पतालों में सुपर सीनियर मरीज बढ़ रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने वाले 80 प्लस के मरीजों की संख्या अब बढ़कर दोगुनी हो गई है। अधिक उम्र के लोग काफी संख्या में अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं।

अस्पतालों में बढ़ रहे सुपर सीनियर मरीज, संख्या दोगुनी हुई
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,मुरादाबादThu, 29 Feb 2024 07:21 AM
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देश के सबसे बुजुर्ग सांसद का खिताब हासिल करने वाले डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन, उनकी शख्सियत के साथ ही लंबी उम्र जीने की उपलब्धि एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। इस संदर्भ में यह हकीकत भी सामने आई है कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉ. बर्क की तरह ही भर्ती होने वाले सुपर सीनियर मरीजों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अस्पताल बुजुर्ग मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत महसूस कर रहे हैं। मुरादाबाद में अपेक्स अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. मगन मेहरोत्रा ने बताया कि पिछले दस साल के दौरान यह परिदृश्य काफी तेजी के साथ सामने आया है। अस्पताल में भर्ती होने वाले 80 प्लस के मरीजों की संख्या अब बढ़कर दोगुनी हो गई है। बीमार होने पर सत्तर साल से अधिक उम्र के अब चार गुना अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। कई नाइंटी प्लस मरीज भी अस्पतालों में लाए जा रहे हैं। कुछ अरसा पहले तक इस आयु वर्ग के मरीजों की संख्या लगभग नगण्य ही होती थी।

सिद्ध अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ.अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि लोगों की औसत उम्र बढ़ने की वजह से अब अस्पतालों में अस्सी और नब्बे साल से अधिक उम्र के लोग काफी संख्या में अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। पिछले दिनों तबियत खराब होने पर 97 साल का मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ और ठीक होने पर अपने घर वापस गया।

सिद्ध अस्पताल प्रबंध निदेशक डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि देश में आजादी के समय लोगों की औसत उम्र सिर्फ 27 साल थी। यानि उस समय औसतन लोग 27 साल ही जी पाते थे। अब औसत उम्र बढ़कर 68 साल हो गई है। महिलाओं की औसत उम्र बढ़कर 69 साल हो गई है। इसका असर अस्पतालों में बुजुर्ग मरीजों की बढ़ती संख्या के रूप में दिखाई दे रहा है।

अपेक्स अस्पताल प्रबंध निदेशक डॉ. मगन मेहरोत्रा ने बताया कि सत्तर और अस्सी साल से अधिक उम्र के मरीजों की संख्या चार गुना तक बढ़ने से सुपर सीनियर मरीजों के लिए अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टर होने की जरूरत बहुत बढ़ गई है। इनके इलाज में अधिक देखभाल और संवेदनशीलता जरूरी है। मसलन, ऐसे सुपर सीनियर मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाने पर इसकी मात्रा का अधिक हो जाना उनके हार्ट पर खतरा बन सकता है। 

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