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Hindi News उत्तर प्रदेशHindustan Special: यूपी का ऐसा ऐसा गांव जो पांडवों के अज्ञातवास का रहा साक्षी, अब धूमिल हो रहीं स्मृतियां 

Hindustan Special: यूपी का ऐसा ऐसा गांव जो पांडवों के अज्ञातवास का रहा साक्षी, अब धूमिल हो रहीं स्मृतियां 

जुए में अपना सब कुछ हारने वाले पांडवों ने एक वर्ष अज्ञातवास के दौरान खीरी जिले के बड़खर गांव (अब मोहम्मदी) में लंबा समय बिताया था।

Hindustan Special: यूपी का ऐसा ऐसा गांव जो पांडवों के अज्ञातवास का रहा साक्षी, अब धूमिल हो रहीं स्मृतियां 
Dinesh Rathourहिन्दुस्तान,लखीमपुरSat, 04 Nov 2023 11:25 PM
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जुए में अपना सब कुछ हारने वाले पांडवों ने एक वर्ष अज्ञातवास के दौरान खीरी जिले के बड़खर गांव (अब मोहम्मदी) में लंबा समय बिताया था। कहा जाता है कि यह क्षेत्र सेरंध्री बनकर रह रही रानी द्रौपदी का पसंदीदा स्थान था। महाभारतकाल की अनोखी कथा का गवाह रहा यह क्षेत्र अब अपनी स्मृतियों को धूल धूसरित कर चुका है। धीरे- धीरे पुराने निशान मिट रहे हैं। काफी वन भूमि अब अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है। महाभारत में जुए की बाजी हारने के बाद पांडवों को 12 वर्ष वनवास और एक वर्ष अज्ञातवास की सजा मिली थी।

वनवास के बाद अज्ञातवास को भुगतने के लिए पांडव अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर रहे। उनका सबसे लंबा समय राजा विराट के साम्राज्य में बीता। आज की मोहम्मदी तहसील का बड़खर गांव राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था। पांडवों ने एक वर्ष का अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में शामिल इसी क्षेत्र में बिताया था। अब भी उस दौर के तमाम निशान यहां बाकी हैं लेकिन तमाम स्मृतियों पर अतिक्रमण, कब्जाधारी और लापरवाही की धूल चढ़ चुकी है। 

कभी जंगल हुआ करता था यह क्षेत्र : बड़खर गांव विराट साम्राज्य का हिस्सा था और कभी यहां घना जंगल था। यहीं पर राजा विराट का किला हुआ करता था। किले के खंडहर यहां आज भी ऊंचे टीलों के रूप में मौजूद हैं। जानकार बताते हैं कि इस किले में छह गुंबद हुआ करते थे। किला निर्माण में डेढ़ फुट चौड़ी और इतनी ही लंबी ईटों का प्रयोग किया गया था। दीवारें काफी चौड़ी थीं। 

यहीं भीम ने कीचक को मारा : बड़खर गांव के इसी किले के पास द्रोपदी का निवास स्थल था। यहां बनखंडी नाथ मंदिर व गदाई ताल और बंसीवट तालाब मौजूद है। राजा विराट के किले के आसपास पांच प्राचीन कुएं आज भी मौजूद हैं, जिनमें से तीन कुओं के अवशेष तो दिखाई पड़ रहे हैं जबकि दो विलुप्त हो गए हैं। किवंदती यह भी है कि भीम ने इसी जगह पर कीचक का वध किया था। पहले इसी जगह पर एक बड़ा नाला दिखता था, जिसे कीचकाखार कहा जाता था। मान्यता है कि भीम कीचक को मारकर उसे घसीटते हुए गोमती की तरफ ले गए थे। 

किले के पास ही था द्रौपदी का निवास : जानकार बताते हैं कि इसी किले के पास द्रोपदी का निवास भी था। बाकायदा द्रोपदी की रसोई, स्नानागार और एक मंदिर भी था। मन्दिर के बारे में दावा है कि उसे पांडवों ने स्थापित किया था। जहां जंगल में ही शिवलिंग की स्थापना की थी। धीरे-धीरे वह सब निशान यहां से मिटने लगे हैं। द्रोपदी की रसोई और स्नानघर के कुछ भग्नावशेष अब भी हैं। बाकी क्षेत्र या तो खंडहर बन चुका है या उस पर कब्जा हो चुका है। महाभारतकाल की स्मृतियां व भवन यहां अब सिर्फ किस्से-कहानियों में सिमटकर रह गए हैं। 

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