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PFI समर्थित SDPI का प्रदेश अध्यक्ष RSS के नागपुर हेडक्वार्टर में 6 महीने रहा, पता लगाई डिटेल

पीएफआई समर्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष निजामुद्दीन खान ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया कि वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नागपुर हेडक्वार्टर में छह माह रह चुका है।

PFI समर्थित SDPI का प्रदेश अध्यक्ष RSS के नागपुर हेडक्वार्टर में 6 महीने रहा, पता लगाई डिटेल
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,अलीगढ़Thu, 29 Sep 2022 06:11 AM

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पीएफआई समर्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया का प्रदेश अध्यक्ष निजामुद्दीन खान समुदाय विशेष को संगठन से जोड़ने का काम करता था। निजामुद्दीन ने एसटीएफ को पूछताछ में बताया कि वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नागपुर हेडक्वार्टर में छह माह रह चुका है। 2012 में आरएसएस से जुड़ने के बहाने, संघ के पदाधिकारियों की अल्पसंख्यकों के प्रति विचारधारा, रणनीति को जानने के लिए, कार्यकर्ताओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग आदि को समझने व उस पर रिपोर्ट तैयार करने के इरादे से हेडक्वार्टर में घुसा था। इस कार्य में वह सफल रहा था।

निजामुद्दीन ने बताया कि आरएसएस के  कैंप से बाहर आने के बाद उसने अल्पसंख्यकों को वहां की गतिविधियों के बारे में बताना शुरू कर दिया था। वह अलग-अलग शहरों, राज्यों में जाता था। इसका खर्चा पार्टी द्वारा उठाया जाता था। उसका काम युवाओं को पार्टी से जोड़ना, लोगों तक विचारधारा पहुंचाने का था। खासकर अल्पसंख्यक और दलितों को वह जोड़ने की कोशिश में रहता था। हाल में उसे उत्तर प्रदेश में 35 पदाधिकारी पार्टी के लिए तैयार करने का लक्ष्य मिला था। छोटी-छोटी सभाओं के जरिये वह इस काम को अंजाम दे रहा था।

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इस्लामिक साहित्य का देता था हवाला
निजामुद्दीन ने पूछताछ में बताया कि वह 11वीं कक्षा तक पढ़ा है। मगर, उसे अरबी और उर्दू की अच्छी जानकारी है। इसके अलावा विभन्नि संगठनों, राजनीतिक पार्टियों के साथ जुड़ने के बाद लोगों को अपनी ओर प्रेरित करने, लुभावने भाषण देने में माहिर हो गया था। वह अपने भाषण में इस्लामिक साहित्य का हवाला देता था, जिससे की लोग आसानी से उसकी बातों में आ जाते थे।

मिशन 2024 पर था निजामुद्दीन, वेस्टर्न यूपी का था जिम्मा
निजामुद्दीन मिशन 2024 पर था। इस वर्ष में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इससे पहले उसे पूरे वेस्टर्न यूपी में अल्पसंख्यकों, समुदाय विशेष के लोगों को एकजुटा करने व मौजूदा केंद्र सरकार के खिलाफ कराने का जिम्मा था। इसके लिए वह वेस्टर्न यूपी में दौरे भी कर रहा था। युवाओं को वह पार्टी से जोड़ने में लगा हुआ था। इसी बीच देशभर में पीएफआई कार्यकर्ताओं पर शुरू हुई छापेमारी से निजामुद्दीन घबरा गया था। उसको खुद के पकड़े जाने की भनक लग गई थी। इस आशंका के तहत उसने अपने मोबइल फोन, सोशल मीडिया से कई डाटा को डिलीट कर दिया। उसके पास से मिले छह मोबाइल फोन के आधार पर इसका खुलासा हुआ है। 

एसटीएफ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगर थोड़ी भी देरी हो जाती तो निजामुद्दीन अलीगढ़ छोड़कर फरार हो जाता। उसने यहां से भागने की पूरी तैयार कर ली थी। एसटीएफ द्वारा किए सवालों के जवाब में उसने डाटा डिलीट किए जाने की बात को स्वीकार किया। इन मोबाइल फोन को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है। वहां इनका डिलीट डाटा रिकवर किया जाएगा, जिससे की निजामुद्दीन द्वारा क्या-क्या गतिविधियां की जा रहीं थीं। वह किन-किन लोगों के साथ बातें करता था आदि जानकारी हासिल हो सकेगी। छह मोबाइल फोन के संबंध में उसने बताया कि वह विभिन्न संगठनों के लोगों से अलग-अलग फोन व नंबरों से बात करता था, जिससे की गोपनीयता को बरकरार रखा जा सके।