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Hindi News उत्तर प्रदेशबुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने में बेटे और बहू आगे, सर्वे में सामने आए कई तथ्य 

बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने में बेटे और बहू आगे, सर्वे में सामने आए कई तथ्य 

बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने में बेटे और बहू आगे हैं। हेल्पएज इंडिया ने 10 राज्यों के 20 टियर प्रथम और टियर द्वितीय शहरों में सर्वे किया। सर्वे में कई तथ्य सामने आए हैं।

बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित करने में बेटे और बहू आगे, सर्वे में सामने आए कई तथ्य 
Deep Pandeyहिन्दुस्तान,लखनऊSat, 15 Jun 2024 12:53 PM
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हेल्पएज इंडिया ने 10 राज्यों के 20 टियर प्रथम और टियर द्वितीय शहरों में सर्वे किया। इसमें 5169 बुजुर्गों और 1333 देखभालकर्ता के प्राथमिक परिवार के सदस्यों का सर्वेक्षण किया गया। हेल्पएज इंडिया के राज्य प्रमुख अनूप पंत ने बताया कि सर्वे में सामने आया कि बुजुर्ग के साथ दुर्व्यवहार में बेटे सबसे आगे हैं। 42 फीसदी बेटे माता-पिता को प्रताड़ित करने में शामिल पाए गए हैं। वहीं 28 प्रतिशत बहू सास-ससुर को प्रताड़ित करने में शामिल मिली हैं।

स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए बुजुर्गों ने टेक्नोलॉजी का उपयोग कम किया है। पिछले एक साल में 1.5 फीसदी बुजुर्गों ने ही स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए टेली-परामर्श सेवाओं का इस्तेमाल किया है। केवल 31 प्रतिशत बुजुर्ग व्यक्तियों ने स्वास्थ्य बीमा का लाभ लिया। कवरेज मुख्य रूप से आयुष्मान भारत कार्यक्रम (एबीपी) प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई), ईएसआई और सीजीएचएस के तहत थी। तीन फीसदी बुजुर्गों ने ही वाणिज्यिक स्वास्थ्य बीमा खरीदा। 32 प्रतिशत बुजुर्गों ने बताया कि स्वास्थ्य बीमा के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं थी। यह तथ्य हेल्पेज इंडिया की ओर से पूरे देश में किए गए सर्वे में सामने आए हैं। इस सर्वे रिपोर्ट को एलयू के समाजकार्य विभाग में प्रस्तुत किया गया। 'विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस' के मौके पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया। रिपोर्ट का विषय 'भारत में वृद्धावस्था: देखभाल चुनौतियों के प्रति तैयारी और प्रतिक्रिया का अन्वेषण' रखा गया था। 

रिटायरमेंट की आयु को 70 वर्ष की जाए
कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के मुख्य सचिव डॉ. हरिओम ने अपनी 2002 की पुस्तक 'फूलों का परचम' के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बुजुर्गों के लिए सहारा बनने की महत्वता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि रिटायरमेंट की आयु को 70 वर्ष तक बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि बुजुर्गों के अनुभव में समाज में महत्वपूर्ण योगदान करने की क्षमता है।

वृद्धों के प्रति सहानुभूति को बढ़ावा दिया जाना चाहिए
एलयू कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि समाजकार्य विभाग उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, सामाजिक जरूरतों की सेवा में भी समर्पित है। उन्होंने समाज, विभाग और संगठनों के बीच सहयोग की महत्ता पर जोर दिया। समाजकार्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश द्विवेदी ने वृद्धों के अधिकारों की सुरक्षा में पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि हम सभी को बुजुर्गों का ध्यान रखना चाहिए। प्रतीक मेहरा ने समाज में विशेष रूप से पीढ़ीओं के बीच विश्वास की पुनः निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में रश्मि मिश्र, पंकज कुमार, धीरज सिंह, आशा गुप्ता, मृदु गुप्ता और आदित्य कुमार मौजूद रहे। 

रिपोर्ट में सामने आए कुछ अन्य तथ्य
-रिपोर्ट से पता चलता है कि बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति खराब है। इसमें बताया गया है कि हर तीन में से एक बुजुर्ग को पिछले एक साल में कोई सहायता नहीं मिली है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में इस बात की अधिकता है। रिपोर्ट में दिखाया गया है कि लगभग 40 फीसदी अनपढ़ बुजुर्गों ने किसी भी आय स्रोत को नहीं अपनाया है।

-रिपोर्ट में सामने आया है कि अधिकांश बुजुर्गों ने वृद्धावस्था की तैयारी नहीं की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि वंचितों के लिए विशेष रूप से कार्यक्रम और सेवाओं को अनुकूलित करने की तत्काल आवश्यकता है।

-अधिकांश बुजुर्ग (79%) ने पिछले एक साल में सरकारी अस्पतालों / क्लीनिकों / पीएचसी का प्रयोग किया। 47% यानी 80 वर्ष से अधिक की आयु के बुजुर्गों सरकारी अस्पतालों / क्लीनिकों में गए ही नहीं।

-परिवार के देखभालकर्ताओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 29% देखभालकर्ताओं ने बुजुर्ग व्यक्ति की देखभाल में शारीरिक चुनौतियों के बारे में बताया। जबकि 32% ने बुजुर्गों की देखभाल में वित्तीय चुनौतियों का सामना करने की बात कही।

- एक साल में दुर्व्यवहार का सामना करने वाले उच्च प्रतिशत बुजुर्ग निरक्षर थे। बुजुर्गों की आय में कमी के साथ दुर्व्यवहार बढ़ गया। दुर्व्यवहार का सामना करने वाले अधिकांश उत्तरदाताओं (73%) ने वार्षिक आय 100000 रुपये से कम होने की जानकारी दी।  

-डिजिटल सशक्तिकरण के मोर्चे पर, 41% बुजुर्गों ने किसी डिजिटल डिवाइस के प्रयोग की जानकारी दी। जबकि 59% के पास कोई डिजिटल डिवाइस नहीं थी। सबसे आम उपयोग किया जाने वाला डिवाइस स्मार्ट फोन था। 48% पुरुष बुजुर्गों के पास डिजिटल डिवाइस थी, जबकि महिलाओं में यह संख्या 33 प्रतिशत थी।

- 34 फीसदी बुजुर्ग नियमित रूप से मनोरंजन और सोशल मीडिया के लिए डिजिटल डिवाइस का प्रयोग कर रहे थे।  जबकि 12 प्रतिशत ने उपयोगिता बिलों का भुगतान करने या इंटरनेट बैंकिंग के लिए बताया।

-59 फीसदी बुजुर्गों ने बताया कि वह अपने परिवार की पसंद और प्रभाव के आधार पर स्वास्थ्य देखभाल सुविधा के प्रकार का निर्णय लेते हैं। 65 प्रतिशत अपने पैसे के निवेश के संबंध में निर्णय लेते हैं। 80+ बुजुर्ग अन्य परिवार के सदस्यों से परामर्श करके या दूसरों को निर्णय लेने की अनुमति देकर निर्णय लेते हैं।