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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशसीतापुर के जेई ने 10 साल की नौकरी में 85 प्रतिशत अधिक बनाई सम्पत्ति, एफआईआर

सीतापुर के जेई ने 10 साल की नौकरी में 85 प्रतिशत अधिक बनाई सम्पत्ति, एफआईआर

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊDeep Pandey
Sat, 23 Oct 2021 09:55 AM
सीतापुर के जेई ने 10 साल की नौकरी में 85 प्रतिशत अधिक बनाई सम्पत्ति, एफआईआर

भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने सीतापुर के महमूदाबाद नगर पालिका परिषद के अवर अभियन्ता चन्द्रभान सिंह के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने का मुकदमा सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज कराया है। आरोप है कि 10 साल की नौकरी में उन्होंने अपनी आय से 85 प्रतिशत अधिक सम्पत्ति अर्जित की है। केन्द्रीय मंत्री कौशल किशोर की शिकायत पर जेई के खिलाफ जांच शुरू हुई थी।

इंस्पेक्टर सुशांत गोल्फ सिटी विजयेन्द्र सिंह के मुताबिक भ्रष्टाचार निवारण संगठन के इंस्पेक्टर संजय सिंह की तहरीर पर एफआईआर लिखी गई है। संजय सिंह ने तहरीर में आरोप लगाये हैं कि महमूदाबाद नगर पालिका परिषद के जेई चन्द्रभान सिंह के पास आय से अधिक सम्पत्ति है। जांच में वह इस बारे में संतोषजनक जवाब व साक्ष्य नहीं दे सके। संगठन ने चंद्रभान की जनवरी 2009 से 31 मार्च 2018 के बीच आय और संपत्तियों का ब्योरा जुटाया था।

इंस्पेक्टर संजय सिंह के मुताबिक इस अवधि में चन्द्रभान ने वेतन के रूप में 28 लाख 91 हजार 976 रुपये, बोनस के रुप में 37 हजार 944 रुपये, एरियर के रूप में 71 हजार 208 रुपये और बैंक से ब्याज 60 हजार 963 रुपये हासिल किये। खर्चों के बारे में जेई ने कई बीमा योजना में निवेश बताया। जांच में सामने आया कि सीतापुर के घंटाघर में लक्ष्मी मार्केट में 15 लाख14 हजार 475 रुपये में सम्पत्ति खरीदी। पत्नी व बेटे के नाम कई स्थानों पर संपत्ति होना पाया गया। बच्चों की पढ़ाई पर लाखों रुपये फीस के रूप में खर्च हुए। 10 सालों में 61 लाख 95 हजार 799 रुपये जेई ने खर्च किये। 28 लाख 57 हजार पांच रुपये की अधिक संपत्ति के बारे में जेई चन्द्रभान कुछ नहीं बता सके।

केंद्रीय मंत्री की शिकायत पर हुई कार्रवाई

मोहनलालगंज के भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने 23 अगस्त 2020 को अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र लिखकर जेई के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद भारतीय मजदूर जागरण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र वर्मा ने की थी। रमेश ने यह शिकायती पत्र 24 नवंबर 2020 को भेजा था। दोनों शिकायती पत्र मिलने के बाद अपर मुख्य सचिव गृह ने भ्रष्टाचान निवारण संगठन के अधिकारियों को जांच का आदेश दिया था।
 

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