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28 नवंबर, 2020|9:53|IST

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भारत-नेपाल: सरहद पर चिंता में बहनें, इस रक्षाबंधन कहीं सूनी न रह जाए भाई की कलाई

नेपाल बार्डर पर स्थित सोनौली के रिटायर सैन्य अफसर हरिश्चन्द्र त्रिपाठी की पत्नी गायत्री देवी सरहद पर बंदिशों से चिंतित हैं। नेपाल के खकड़ौल से 50 साल पहले ब्याह कर आईं गायत्री देवी के लिए यह पहला रक्षाबंधन होगा जब वह अपने भाई को राखी नहीं बांध पाएंगी। 

न वह नेपाल अपने मायके जा सकेंगी और न ही उनके भाई यहां आ सकेंगे। वजह आजादी के बाद पहली बार रक्षाबंधन पर नेपाल सरहद इस तरह बंदिशों में जकड़ा है। कोरोना ने आना-जाना तो दूर राखी भेजने के लिए भी कोई सुविधा नहीं बहाल होने दी है।

गायत्री देवी जैसा ही दर्द नौतनवा के अभिषेक थापा का भी है। वह नेपाल के बुटवल में ब्याही अपनी बहन से इस बार राखी नहीं बंधवा सकेंगे। गायत्री देवी और अभिषेक तो एक बानगी हैं। सीमा के दोनों ओर रहने वाले हजारों लोग इसी दर्द से गुजर रहे हैं। 

नेपाल की 48 फीसदी आबादी मधेशी है। मधेशियों में ज्यादातर के रिश्ते भारतीय क्षेत्र में हैं। यहां की लड़कियां नेपाल में ब्याही गई हैं, तो नेपाल की बहुत सी लड़कियों की शादी भारतीय क्षेत्र में हुई है। नेपाल के राजा-रजवाड़ों सहित पहाड़ी समुदाय के लोगों की भी उत्तराखंड, दार्जिलिंग, सिक्किम सहित भारत के तमाम जगहों पर रिश्तेदारियां हैं। ज्यादातर वैवाहिक संबंधों के कारण नेपाल की आधी आबादी का सीधा संबंध इस रक्षाबंधन पर्व से है।

राखी भी मिल जाती तो संतोष रहता
नेपाल के थुमवा रूपनदेही निवासी जितेन्द्र बहादुर सिंह की बहन प्रीति सिंह की शादी 14 साल पहले गोरखपुर में हुई है। जितेन्द्र कहते हैं कि हर साल इस पर्व पर भाई-बहन मिलते थे। एक-दो बार नहीं मिल सके तो कोरियर से राखी मिल जाती थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ होने वाला नहीं है। न बहन से मिल सकेंगे और न ही बहन की राखी मिल सकेगी। सोनौली के डिंपल साहू की शादी भैरहवा की अनु से हुई है। डिंपल कहते हैं कि हर रक्षाबंधन में वे अपनी पत्नी को लेकर उसके भाई के पास जाते थे। इस बार उनकी पत्नी बहुत मायूस हैं। 

लॉकडाउन के बाद दोनों देशों की सरकारें अनलॉक कर रही हैं। उसी तर्ज पर कम से कम रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर एक दिन के लिए सीमा खोल देनी चाहिए। ताकि दोनों देशों में रहने वाले भाई-बहन इस पर्व को मना सकें।
सुधीर त्रिपाठी, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि-सोनौली

नेपाल और भारत के बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं। रक्षाबंधन जैसे पर्व से दोनों देशों की संस्कृति व संबंधों को मजबूती मिलती है। इस पर्व को लेकर सीमा को एक दिन के लिए खोल देना चाहिए।
संतोष पांडेय, विधायक, भैरहवां नेपाल

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  • Web Title:sisters are worried first time on indo nepal border on rakshabandhan