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Hindi News उत्तर प्रदेशकाजू-किसमिस से महंगी बिक रही श्रीकृष्ण की भूमि वृंदावन की मिट्टी और धूल, ईएमआई का भी ऑप्शन

काजू-किसमिस से महंगी बिक रही श्रीकृष्ण की भूमि वृंदावन की मिट्टी और धूल, ईएमआई का भी ऑप्शन

श्रीकृष्ण की भूमि वृंदावन की मिट्टी और ब्रज रज (धूल) इस समय काजू और किसमिस से भी महंगी बिक रही है। अमेजान समेत तमाम ऑनलाइन प्लेटफार्म पर यहां की मिट्टी 1200 से 3500 रुपए किलो तक बेचा जा रहा है।

काजू-किसमिस से महंगी बिक रही श्रीकृष्ण की भूमि वृंदावन की मिट्टी और धूल, ईएमआई का भी ऑप्शन
Yogesh Yadavराम कुमार राघव,वृंदावनWed, 12 Jun 2024 03:27 PM
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श्रीकृष्ण की भूमि वृंदावन की मिट्टी और ब्रज रज (धूल) इस समय काजू और किसमिस से भी महंगी बिक रही है। काजू-किसमिस जहां 600 से 1000 रुपए किलो में मिल जाएगा। वहीं, वृंदावन की मिट्टी और धूल इस समय तमाम ऑनलाइन प्लेटफार्म पर 1200 से 3500 रुपए किलो बिक रही है। वृंदावन के कण-कण में श्रीकृष्ण का वास माना जाता है। देवी-देवताओं के साथ तमाम ऋषि मुनियों ने ब्रज रज में मिलने की कामना लेकर वर्षों वर्ष तपस्या भी की है। यहां की पवित्र रज को माथे पर लगाकर श्रद्धालु धन्य हो जाते हैं। जो ब्रज नहीं आ पाते, उनके लिये रज ऑनलाइन मुहैया कराई जाने लगी है। कान्हा ने अपनी लीला करके जिस रज को अनमोल कर दिया, उसके कण-कण का अब डॉलरों में कारोबार हो रहा है। अमेज़न समेत कई प्रमुख ऑनलाइन स्टोर्स पर वृंदावन की रज बेची जा रही है।

वृंदावन में छोटे-बड़े 800 से ज्यादा कारखाने कान्हा से जुड़ी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। आस्था-भक्ति सिर चढ़कर बोल रही है तो धार्मिक वस्तुओं का ऑनलाइन व्यापार भी बढ़ा है। इस कड़ी में अब वृंदावन की रज भी ऑनलाइन बेची जा रही है। अमेज़न पर श्रीहित राधा इंटरप्राइजेज द्वारा 320 रुपए में वृंदावन रज के दो पैकेट बेचे जा रहे हैं। पैकेट का वजन 100 ग्राम प्रदर्शित किया गया है।

अमेज़न पर ही वृंदावनस्टोर.इन नामक स्टोर द्वारा 355 रुपए का 100 ग्राम का पैकेट बेचा जा रहा है। कम्पनी ने इसके लिये ईएमआई का भी ऑप्शन दिया है। श्रीकृष्ण स्टोर पर 121 रुपए में 100 ग्राम वृंदावन रज बेची जा रही है। इस्कॉनशॉप.कॉम पर भी वृंदावन रज 40 रुपए में 100 ग्राम बेची जा रही है। इसके अलावा इंडिया मार्ट, मीशो आदि ऑनलाइन कंपनी पर विभिन्न स्टोर्स द्वारा मिट्टी बेचने का काम हो रहा है।

रज के बारे में उल्लेख करते हुए आनलाइन साइटस पर लिखा गया है कि इसे सभी देवताओं की पूजा करने और हर रोज तिलक लगाने के काम में लिया जा सकता है। ठाकुर श्रीराधाबल्लभ मंदिर के सेवायत आचार्य मुकेश बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ब्रज की रज, यमुना जल और गिरिराजजी की शिला को ब्रज से बाहर नहीं ले जा सकते हैं। यह तीनों ही ठाकुरजी के वांग्यमय स्वरूप हैं। ब्रज में रहकर ही इनका आनंद लिया जा सकता है। इनकी बिक्री करने वालों को प्रकृति के दंड का भागीदार बनना पड़ता है।

ऑनलाइन गिरिराज शिला बेचने का हो चुका है विरोध
2021 में गिरिराजजी की शिला आनलाइन बेचे जाने पर संतों में आक्रोश फैल गया था। थाना गोवर्धन पर प्रदर्शन करते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। ऑनलाइन कंपनी इंडिया मार्ट पर लक्ष्मी डिवाइन आर्टिकल स्टोर द्वारा 5175 रुपए में शिला बेची जा रही थी। विरोध और मुकदमा दर्ज हो जाने के बाद कंपनी ने यह विज्ञापन हटा लिया था। नाम जप का आह्वान करने वाले संत प्रेमानन्द महाराज ने भी गिरिराज शिला को ब्रज से बाहर ले जाने पर अनिष्ट होने की चेतावनी दी थी।

मेरे उठे विरह की पीर सखी री वृंदावन आऊंगी
सोशल मीडिया पर ब्रज की महिमा के बड़ी संख्या में वीडियो और रील्स हैं। इनमें ब्रज की रज में लोट लगाते श्रद्धालुओं को बड़ी संख्या में देखा जा सकता है। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धलु गोवर्धन और वृंदावन की परिक्रमा लेटकर लगाते हैं। रमणरेती आकर ब्रज रज को माथे से लगाने के बाद शरीर पर मलने के दृश्य तो रोजाना दिख जाते हैं। ऐसी पवित्र ब्रज रज को बेचे जाने को लेकर श्रद्धालु आक्रोश जताते हैं।

इनका ऑनलाइन कारोबार
ब्रज रज
कंठी माला
धूपबत्ती
पोशाक
श्रंगार का सामान
इत्र
चन्दन टीका
जप माला
मूर्ति
तस्वीर
प्रसाद
तुलसी के पौधे
तुलसी की माला
धार्मिक पुस्तकें
गाय के गोबर का उपला
हवन के लिये लकड़ी
(इन वस्तुओं की कीमत इंटरनेशनल मार्किट में ऑनलाइन 10 डॉलर से लेकर 100 डॉलर तक है, इसमें शिपिंग चार्ज शामिल होता है। इसके अलावा बड़ी मूर्तियां 200 से 250 डॉलर में भी उपलब्ध हैं)

भागवताचार्य और संत नाराज
भागवताचार्य आचार्य मृदुलकांत शास्त्री का कहना है कि भागवत पुराण में श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि वृंदावन मेरी देह है। वृंदावन की रज बेचकर भगवान को ही बेचा जा रहा है जोकि निंदनीय है। पाप कर्म है। वृंदावन की मिट्टी ठाकुरजी का स्वरूप है, इसे बेचने वालों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। 12 जून को देवालय न्यास की बैठक है, इसमें इस मामले को प्रमुखता से रखते हुए आगे की रूपरेखा बनाकर विरोध किया जायेगा।

महंत चतु: संप्रदाय फूलडोल बिहारी दास के अनुसार ब्रज की रज में आने की भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने इच्छा जताई थी। वृंदावन की रज में मुक्ति बताई गई है। रज में लोटकर पाप धुल जाते हैं। वह रज जिसे भगवान कृष्ण बालपन में खाते थे, राधा और गोपियों को लगाते थे, उसे बेचा जाना पाप है। सरकार को इस ओर ध्यान देकर कार्यवाही करनी चाहिए।